
शुरू हो सकेगा नए संसद भवन का निर्माण कार्य, सुप्रीम कोर्ट ने दी हरी झंडी
क्या है खबर?
दिल्ली के इंडिया गेट के पास नए संसद भवन के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है और सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में केंद्र सरकार की 20,000 करोड़ रुपये की सेंट्रल विस्टा परियोजना को हरी झंडी दिखा दी है।
परियोजना को रोकने के लिए दाखिल की गई याचिकाओं को आज खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नई संसद बनाने के लिए दी गई पर्यावरण और जमीन संबंधी किसी भी मंजूरी में कोई खामी नहीं पाई गई है।
पृष्ठभूमि
क्या है सेंट्रल विस्टा परियोजना?
सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत राष्ट्रपति भवन से लेकर इंडिया गेट तक के 4 किलोमीटर लंबे राजपथ को विकसित और संवारा जाएगा और यहां नए संसद भवन और कॉमन केंद्रीय सचिवालय समेत कई नई इमारतों का निर्माण किया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में नए संसद भवन की नींव रख चुके हैं, हालांकि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी होने तक कोई भी निर्माण कार्य न करने का वादा किया था।
याचिका
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में इन चीजों पर उठाए गए थे सवाल
सेंट्रल विस्टा परियोजना के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिकाओं में इसके लिए लैंड यूज में बदलाव, सेंट्रल विस्टा समिति द्वारा दिए गए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) और निर्माण कार्य को मिली पर्यावरण संबंधी मंजूरी पर सवाल उठाए गए थे।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट की बेंच को परियोजनाओं से संबंधित मंजूरियों में कोई खामी नहीं मिली और उसने 2-1 के बहुमत से सरकार को निर्माण कार्य शुरू करने की मंजूरी दे दी। जस्टिस संजीव खन्ना ने खिलाफ वोट दिया।
सरकार का पक्ष
परियोजना के पक्ष में सरकार ने दी थी ये दलीलें
इससे पहले सुनवाई के दौरान परियोजना का बचाव करते हुए सरकार ने कहा था कि मौजूदा संसद भवन न केवल छोटा है, बल्कि इसमें कोई भी फायर सेफ्टी नहीं है और ये भूकंप-रोधी भी नहीं है।
उसने सरकार की कार्यक्षमता में सुधार के लिए सभी मंत्रालयों के एक जगह होने की दलील भी दी थी।
सरकार ने ये भी कहा था कि कोर्ट केवल मौलक अधिकारों से संबंधित मुद्दों पर आदेश दे सकती है और यह एक नीतिगत मामला है।
निर्माण
नए संसद भवन का निर्माण 2022 तक पूरा होने की उम्मीद
बता दें कि विस्टा परियोजना के तहत बनाए जाने वाले नए संसद भवन का निर्माण 2022 में देश की आजादी की 75वीं वर्षगांठ तक पूरा होने की उम्मीद है।
नए संसद भवन में 1,224 सांसदों के बैठने की क्षमता होगी। इसके अलावा सभी सांसदों के लिए अलग-अलग पेपर रहित कार्यालय भी बनाए जाएंगे।
पूरी योजना में लगभग 20,000 करोड़ रुपये की लागत आएगी और इसमें 2,000 लोग प्रत्यक्ष रूप से और 9,000 लोग अप्रत्यक्ष रूप से लगे हुए हैं।
मौजूदा संसद
मौजूदा संसद भवन का क्या होगा?
नए संसद भवन के निर्माण के बाद मौजूद संसद भवन को पुरातात्विक संपत्ति के रूप में संरक्षित किया जाने की योजना है और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला इसकी पुष्टि कर चुके हैं।
बता दें कि मौजूदा संसद की आधारशिला 12 फरवरी, 1921 को रखी गई थी और इसका उद्घाटन 18 जनवरी, 1927 को हुआ था। इसे बनाने में तब 83 लाख रुपये खर्च हुए थे। इसका डिजाइन एडविन लुटियंस और हर्बर्ट बेकर द्वारा तैयार किया गया था।