
RBI की रिपोर्ट में नकली नोट बढ़ने की बात, विपक्ष ने साधा नोटबंदी पर निशाना
क्या है खबर?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की सालाना रिपोर्ट ने विपक्षी पार्टियों को 2016 में की गई नोटबंदी के लिए केंद्र की भाजपा सरकार पर निशाना साधने का एक और मौका प्रदान किया है।
RBI ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पिछले वित्त वर्ष में देश में नकली नोटों की तादाद बढ़ी।
इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने नोटबंदी करने के सरकार के फैसले पर निशाना साधा है।
रिपोर्ट
RBI ने अपनी रिपोर्ट में क्या कहा?
RBI की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष में 10 रुपये के नकली नोटों में 16.4 प्रतिशत, 20 रुपये के नकली नोटों में 16.5 प्रतिशत, 200 रुपये के नकली नोटों में 11.7 प्रतिशत, 500 रुपये के नकली नोटों में 101.9 प्रतिशत और 2,000 रुपये के नकली नोटों में 54.6 प्रतिशत का इजाफा देखने को मिला है।
2021-22 के दौरान पकड़े गए नकली नोटों में से 6.9 प्रतिशत RBI और 93.1 प्रतिशत अन्य बैंकों ने पकड़े हैं।
हमला
कांग्रेस और राहुल गांधी ने साधा सरकार और प्रधानमंत्री पर निशाना
यह रिपोर्ट सामने आने के बाद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, 'नोटबंदी की एकमात्र दुर्भाग्यपूर्ण सफलता भारत अर्थव्यवस्था की तबाही थी।'
वहीं कांग्रेस पार्टी ने कहा, 'प्रधानमंत्री मोदी के वादों से इतर देश में नकली नोटों की संख्या काफी ज्यादा बढ़ गई है। RBI के अनुसार, 1 साल में Rs.500 के नकली नोट दोगुने हो गए हैं। ऐसे वक्त में जनता मोदी जी के नोटबंदी को लेकर दिए गए बयानों को याद कर रही है।'
तृणमूल कांग्रेस
TMC के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने साधा प्रधानमंत्री पर निशाना
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने भी RBI की रिपोर्ट पर ट्वीट कर नोटबंदी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है।
उन्होंने लिखा, 'नमस्कार माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, नोटबंदी? याद है? और किस तेजी के साथ ममता बनर्जी ने आपका सामना किया था? कैसे आपने देश को भरोसा दिलाया था कि नोटबंदी सारे नकली नोटों को खत्म कर देगी। RBI की रिपोर्ट ने नकली नोटों में बड़ी वृद्धि की बात कही है।'
नोटबंदी
2016 में अचानक से की गई थी नोटबंदी
बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी ने 7 नवबंर, 2016 की रात 8 बजे अचानक से देश में नोटबंदी का ऐलान किया था। 8 नवंबर से लागू हुई इस नोटबंदी में 500 और 1000 रुपये के सभी नोटों की कीमत जीरो कर दी गई थी और लोगों से इन्हें बैंक से बदलने को कहा गया था।
शुरूआत में सरकार ने इसे कालेधन को खत्म करने के लिए उठाया गया कदम बताया था, लेकिन फिर इसे डिजिटलीकरण से जोड़ दिया गया।
नुकसान
नोटबंदी के समय देश में मची थी अफरा-तफरी, अर्थव्यवस्था को भी हुआ नुकसान
नोटबंदी के दौरान देशभर के लोगों को भारी समस्याओं को सामना करना पड़ा था और लाइन में लगने जैसे कारणों के कारण कई लोगों की मौत भी हो गई थी।
नोटबंदी का अर्थव्यवस्था पर बहुत बड़ा असर पड़ा था और तभी से ये संभल नहीं पाई है। 500 और 1000 रुपये के नोट बंद होने के कारण कैश पर चलने वाले कारोबारों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था और इनमें से अधिकांश बंद हो गए थे।