
भारत के पाँच डॉक्टर, जिन्होंने बदल दिया भारतीय स्वास्थ्य सेवा का चेहरा
क्या है खबर?
डॉक्टर बनाना कई छात्रों का सपना होता है और यह देश में सबसे ज़्यादा पसंद किए जाने वाले व्यवसायों में से भी एक है।
हालाँकि, डॉक्टर होने का मतलब बड़ी ज़िम्मेदारी और इसके लिए प्रतिबद्धता की ज़रूरत होती है।
भारत के कई महान डॉक्टर हैं, जिन्होंने अपने योगदान से प्रभाव डाला है।
आज हम आपको भारत के ऐसे ही पाँच डॉक्टरों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने भारत में स्वास्थ्य सेवा का चेहरा बदल दिया है।
#1
डॉक्टर एसआई पद्मावती: भारत की पहली महिला हृदय रोग विशेषज्ञ
भारत की पहली महिला हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर शिवरामकृष्ण अय्यर पद्मावती पिछले 60 सालों से मरीज़ों की सेवा कर रही हैं।
उन्होंने भारतीय मेडिकल कॉलेज में भारत का पहला कार्डियोलॉजी क्लीनिक, उत्तर भारत का पहला कार्डिएक कैथेटर लैब और पहला कार्डियोलॉजी विभाग स्थापित किया।
वर्तमान में पद्म विभूषण से सम्मानित 101 वर्षीया डॉक्टर पद्मावती दिल्ली के राष्ट्रीय हृदय संस्थान के निदेशक के रूप में कार्यरत हैं। वो ऑल इंडिया हार्ट फ़ाउंडेशन की संस्थापक अध्यक्ष भी हैं।
#2
देवी प्रसाद शेट्टी: नारायण हृदयालय के संस्थापक
कार्डिएक सर्जन डॉक्टर देवी प्रसाद शेट्टी कार्डियोलॉजी के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित डॉक्टर हैं।
उन्होंने अब तक 15,000 से ज़्यादा हार्ट सर्जरी की है। वो बेंगलुरु के पास स्थित मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल नारायण हृदयालय के संस्थापक हैं। साथ ही नारायण हेल्थ चेन के संस्थापक अध्यक्ष भी हैं।
भारत में सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं में उनके योगदान के लिए उन्हें 2004 में पद्म श्री और 2012 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।
#3
डॉक्टर एजीके गोखले: एक प्रतिष्ठित कार्डिएक सर्जन
डॉक्टर आल्ला गोपाला कृष्णा गोखले एक अन्य प्रतिष्ठित कार्डिएक सर्जन और कीहोल बाईपास सर्जरी के प्रणेता हैं।
उन्होंने तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में पहले मानव से मानव हृदय प्रत्यारोपण, पहले फेफड़े का प्रत्यारोपण और पहले वेंट्रिकुलर असिस्ट डिवाइस के आरोपण का सफल प्रदर्शन किया।
पद्म श्री से सम्मानित डॉक्टर गोखले ने 15,000 से अधिक ओपन हार्ट सर्जरी, 34 हृदय प्रत्यारोपण, और तीन फेफड़ों का प्रत्यारोपण किया है। वर्तमान में वो हैदराबाद के अपोलो में कार्यरत हैं।
#4
डॉक्टर इंदिरा हिंदुजा: देश को दिया पहला टेस्ट-ट्यूब बेबी
डॉक्टर इंदिरा हिंदुजा मुंबई की स्त्री रोग विशेषज्ञ, प्रसूती रोग विशेषज्ञ और बांझपन विशेषज्ञ हैं।
उन्हें 1986 में भारत को पहला टेस्ट-ट्यूब बेबी देने के लिए भी जाना जाता है। उन्होंने गैमेटे इंट्राफ़ॉलोपियन ट्रांसफ़र (GIFT) तकनीक का नेतृत्व किया, जिसके परिणामस्वरूप 1988 में भारत का पहला GIFT बच्चा पैदा हुआ।
2011 में पद्म श्री से सम्मानित डॉक्टर हिंदुजा ने रजोनिवृत्ति और समय से पहले डिंबग्रंथि विफलता से पीड़ित महिलाओं के लिए oocyte दान तकनीक विकसित की।
#5
डॉक्टर कामिनी राव: प्रजनन में सहायता के लिए दिया विशेष योगदान
बेंगलुरु की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर कामिनी राव ने प्रजनन में सहायता के लिए बड़ा योगदान दिया है।
वो प्रजनन एंडोक्रिनोलॉजी, डिंबग्रंथि शरीर विज्ञान और सहायक प्रजनन तकनीक में विशेषज्ञ हैं।
उन्हें भारत के पहले SIFT (सीमेन इंट्रैफोपोपियन ट्रांसफ़र) बच्चे के जन्म का श्रेय दिया जाता है।
पद्म श्री विजेता डॉक्टर कामिनी ने दक्षिण भारत का पहला वीर्य बैंक शुरू किया और ICSI (इंट्रा साइटोप्लासमिक स्पर्म इंजेक्शन) और लेज़र असिस्टेड हैचिंग के से देश के पहले शिशुओं का जन्म कराया।