
ब्लैक फंगस के बढ़ते प्रकोप के बीच AIIMS निदेशक ने बताए बचाव के प्रमुख उपाय
क्या है खबर?
देश में कोरोना से ठीक होने वाले लोगों के लिए म्यूकरमायकोसिस यानी ब्लैक फंगस जानलेवा बना हुआ है। इसके मामलों में तेजी से इजाफा हो रहा है।
यही कारण है कि देश में अब तक इसके 7,000 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं और कई लोगों की मौत भी हो चुकी है।
इसी बीच दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया ने इसकी गंभीरता को देखते हुए इससे बचाव में अहम उपाय बताए हैं।
जानकारी
क्या है म्यूकरमायकोसिस या ब्लैक फंगस?
म्यूकरमायकोसिस या ब्लैक फंगस एक बेहद दुर्लभ संक्रमण है। यह म्यूकर फंगस के कारण होता है जो मिट्टी, पौधों, खाद, सड़े हुए फल और सब्ज़ियों में पनपता है। यह आम तौर पर उन लोगों को प्रभावित करते हैं जो लंबे समय दवा ले रहे हैं और जिनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है।
AIIMS के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि कोरोना वायरस के मरीजों खासकर मधुमेह रोगियों में स्टेरॉयड का अधिक उपयोग इस संक्रमण का प्रमुख कारण है।
लक्षण
क्या है ब्लैक फंगस के प्रमुख लक्षण?
विशेषज्ञों के अुनसार ब्लैक फंगस से पीड़ित व्यक्ति को चेहरे के एक हिस्से में सूजन, सिरदर्द, नाक में संक्रमण, नाक या मुंह के ऊपरी हिस्से पर काले घाव, बुखार, खांसी, छाती में दर्द, सांस लेने में परेशानी, आंखों में सूजन और दर्द, पलकों का गिरना, धुंधला दिखना, अंधापन जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
कोरोना संक्रमण से ठीक होने वाले मरीजों में यह ठीक होने के दो-तीन दिन बाद या ठीक होने के दौरान भी नजर आ सकते हैं।
उपाय
ब्लैक फंगस से बचाव के लिए महत्वपूर्ण है तीन कारक- गुलेरिया
हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार डॉ गुलेरिया ने कहा, "ब्लैक फंगस की रोकथाम के लिए तीन कारक बहुत महत्वपूर्ण हैं। पहला शुगर पर नियंत्रण बहुत अच्छा होना चाहिए, दूसरा हमें स्टेरॉयड कब देने हैं, इसके लिए सावधान रहना चाहिए और तीसरा स्टेरॉयड की हल्की या मध्यम खुराक लेनी चाहिए।"
उन्होंने आगे कहा, "साल 2002 में सार्स के प्रकोप के दौरान भी ब्लैक फंगस के मामले देखे गए थे। वर्तमान में कोरोना के साथ शुगर होना सबसे बड़ा खतरा है।"
कारण
स्टेरॉयड के अधिक इस्तेमाल से बढ़ा ब्लैक फंगस का खतरा- गुलेरिया
डॉ गुलेरिया ने कहा कि कोरोना महामारी की इस दूसरी लहर में स्टेरॉयड का इस्तेमाल बहुत अधिक मात्रा में किया गया है। हल्के और प्रारंभिक रोग में संकेत ना होने पर भी स्टेरॉयड देने से अन्य संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि लक्षण ना होने के बाद अगर लोगों को अधिक मात्रा में स्टेरॉयड दिया गया है तो उनमें हाई ब्लड शुगर लेवल और ब्लैक फंगस का खतरा बढ़ सकता है। इसे नियंत्रित किया जाना चाहिए।
बयान
"झूठे दावों पर नहीं किया जाना चाहिए भरोसा"
डॉ गुलेरिया ने कहा, "ब्लैक फंगस को लेकर झूठे दावे फैलाए जा रहे हैं कि कच्चा खाना खाने से हो रहा है, लेकिन इसकी पुष्टि का कोई आंकड़ा नहीं है। इसी तरह ऑक्सीजन के अधिक इस्तेमाल से भी ब्लैक फंगस का कोई लेना-देना नहीं है।"
उपचार
लक्षण दिखने पर तत्काल उपचार है जरूरी- त्रेहान
मेदांता अस्पताल के चेयरमैन डॉ नरेश त्रेहान ने बताया कि कोरोना संक्रमित मरीज को हुए ब्लैक फंगस में पहले लक्षण दर्द, नाक में भारीपन, गालों पर सूजन, मुंह के अंदर फंगस का पैच और पलकों में सूजन है। इनके नजर आते ही तत्काल डॉक्टर के पास जाना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि ब्लैक फंगस को नियंत्रित करने का सबसे महत्वपूर्ण तरीका कोरोना के उपचार में स्टेरॉयड का विवेकपूर्ण इस्तेमाल और ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करना है।
जानकारी
केंद्र ने राज्यों को अधिसूचित बीमारी घोषित करने के निर्देश दिए
बता दें देश में ब्लैक फंगस के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार ने गुरुवार को सभी राज्यों को इसे महामारी अधिनियम के तहत अधिसूचित बीमारी घोषित करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा इसके सभी मामलों की रिपोर्ट करने को भी कहा है।
परिणाम
राजस्थान सहित कई राज्यों ने घोषित की महामारी
ब्लैक फंगस के बढ़ते मामलों को देखते हुए राजस्थान सरकार ने बुधवार को इसे महामारी और अधिसूचित बीमारी घोषित कर दिया था।
इसी तरह हरियाणा, चंडीगढ़, असम, तेलंगाना, गुजरात, ओडिशा, पंजाब, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश सरकार भी इसे अधिसूचित बीमारी घोषित कर चुकी है।
वर्तमान में महाराष्ट्र और दिल्ली में इसके मामलों में तेजी से इजाफा हो रहा है।
इसको लेकर गुरुवार को दिल्ली AIIMS ने इसकी पहचान और उपचार के लिए एडवायजरी भी जारी की है।