
कोरोना महामारी के डर से गृह नगर में ही रहे 70 प्रतिशत प्रवासी मजदूर- सर्वे
क्या है खबर?
कोरोना वायरस महामारी ने प्रवासी मजदूरों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। महामारी के कारण करोड़ों प्रवासियों की नौकरी चली गई और राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के कारण उन्हें अपने घर पहुंचने में काफी संघर्ष करना पड़ा था।
इस स्थिति के कारण उनके दूसरे शहर या राज्यों में जाकर नौकरी करने के रूझान में खासा बदलाव देखने को मिला है।
जन सहस, एडलगिव फाउंडेशन और ग्लोबल डेवलपमेंट इन्क्यूबेटर द्वारा प्रवासी मजदूरों पर किए गए संयुक्त सर्वे में इसका खुलासा हुआ है।
प्रभाव
कोरोना संक्रमित होने के डर से 70 प्रतिशत मजदूरों ने नहीं छोड़ा घर
जन सहस, एडलगिव फाउंडेशन और ग्लोबल डेवलपमेंट इन्क्यूबेटर की ओर से किए गए इस संयुक्त सर्वे में पांच राज्यों के कुल 2,342 श्रमिकों को शामिल किया गया था।
इनमें से 70 प्रतिशत ने कहा कि पहले लॉकडाउन में घर लौटने के बाद उन्होंने कोरोना संक्रमण की चपेट में आने के डर से दुबारा घर नहीं छोड़ा और उन्होंने अपने गृह नगर में रहकर ही कार्य किया है।
इसी तरह 55 प्रतिशत ने प्रवासन में कमी आने की बात कही है।
परेशानी
54 प्रतिशत श्रमिकों ने बताई नौकरियों की कमी
सर्वे में शामिल श्रमिकों में से 54 प्रतिशत ने कहा कि पहले लॉकडाउन के बाद से बड़े शहरों में नौकरियों की कमी आ गई थी। उन्होंने पिछली नौकरी वाली जगहों पर बात की थी, लेकिन काम नहीं मिला।
इसी तरह 45 प्रतिशत श्रमिकों ने अचानक लॉकडाउन के डर से दूसरे शहर में नौकरी करने का विचार छोड़ दिया था।
इसी तरह नौकरी पर लौटने वालों में से 55 प्रतिशत ने कम समय के लिए जाने की बात कही है।
गिरावट
70 प्रतिशत श्रमिकों की मासिक आय में आई गिरावट
70 प्रतिशत श्रमिकों ने कहा कि पिछले एक साल में स्थायी नौकरी मिलना मुश्किल हो गया है। इसके कारण उनकी मासिक आय में बड़ी गिरावट देखने को मिली है।
इसी तरह 40 प्रतिशत श्रमिकों ने कमाई पर कोई असर नहीं बताया और मजदूरी की दर पिछले साल के बराबर ही रही है।
इसी तरह 36 प्रतिशत श्रमिकों ने कहा कि पहले लॉकडाउन के बाद मजदूरी की दरों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। इससे उन्हें बड़ा नुकसान हुआ है।
कमी
महिलाओं के पलायन में आई बड़ी कमी
सर्वे में 60 प्रतिशत श्रमिकों ने कहा कि कोरोना महामारी से पहले की तुलना में अब महिलाएं काम के लिए बहुत कम संख्या में दूसरे राज्य या शहरों में जा रही हैं।
इसी तरह सर्वे में यह भी सामने आया कि प्रवासियों में अब पुरानी जगहों पर नौकरी नहीं मिलने का बड़ा डर है और वह गृह नगर में ही रोजगार की तलाश में जुटे हैं। इसी प्रकार पुरुषों को परिवार पालने में अधिक मेहनत करनी पड़ रही है।
राहत
दिल्ली और छत्तीसगढ़ सरकार ने दी मजदूरों को बड़ी राहत
सर्वे में यह भी सामने आया कि दिल्ली और छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रवासी मजदूरों को बड़ी राहत पहुंचाई है।
दिल्ली सरकार ने भवन और निर्माण श्रमिक अधिनियम (BOCW) के तहत 1.05 लाख से अधिक श्रमिकों को पंजीकृत किया है।
इसी तरह छत्तीसगढ़ सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत 97.8 प्रतिशत उत्तरदाताओं को लॉकडाउन अवधि में मुफ्त या सब्सिडी वाला राशन मुहैया कराया है। इससे उन्हें बड़ी राहत मिली है।