
#NewsBytesExplainer: स्पॉटिफाई ने क्यों हटा दिए जी म्यूजिक के गाने, क्या है दोनों कंपनियों का विवाद?
क्या है खबर?
कुछ दिन पहले स्पॉटिफाई के श्रोता उस वक्त हैरान रह गए जब उनकी प्लेलिस्ट से उनके पसंदीदा गाने गायब हो गए। रोज की तरह जब उन्होंने अपने पसंदीदा लव सॉन्ग लगाए तो वे स्पॉटिफाई पर मौजूद ही नहीं थे।
धीरे-धीरे मामले ने मीडिया में भी तूल पकड़ लिया।
दरअसल, म्यूजिक स्ट्रीमिंग साइट स्पॉटिफाई ने जी म्यूजिक कंपनी के सभी गाने अपने प्लेटफॉर्म से हटा दिए हैं।
आइए जानते हैं पूरा मामला क्या है।
गाने
स्पॉटीफाई से कौन-कौन से प्रसिद्ध गाने हटे?
स्पॉटिफाई पर 'काला चश्मा' लोगों के पसंदीदा गानों में से एक था। 'बरेली की बर्फी', 'कलंक', 'बाजीराव मस्तानी' जैसी एलबम के रोमांटिक गाने लोगों की प्लेलिस्ट में खास जगह रखते थे। ये सभी गाने और एलबम हटा दिए गए हैं।
'भेड़िया', 'उड़ता पंजाब', 'सीक्रेट सुपरस्टार', 'उरी', 'केसरी' जैसी फिल्मों के गाने भी हटाए गए हैं।
अगर अपने पसंदीदा गानों के लिए यूजर्स ने किसी और प्लेटफॉर्म का रुख कर लिया तो स्पॉटिफाई को यह दांव महंगा पड़ सकता है।
विवाद
स्पॉटिफाई ने क्यों हटाए जी म्यूजिक के गाने?
दरअसल, स्पॉटिफाई और जी म्यूजिक कंपनी के बीच लाइसेंस की वैधता समाप्त हो चुकी है। नए लाइसेंस के लिए अनुबंध को लेकर दोनों कंपनियां एकमत नहीं हो पा रही हैं।
सहमति न बन पाने की वजह से वे नया लाइसेंस बनाने में असमर्थ हैं और लाइसेंस के बिना प्लेटफॉर्म से गाने हटाने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचता है।
बता दें कि जी म्यूजिक स्पॉटिफाई पर टी-सीरीज के बाद दूसरा सबसे ज्यादा सब्सक्राइब किया गया चैनल था।
जी म्यूजिक का पक्ष
दोनों कंपनियों में किस बात को लेकर असहमति?
जी म्यूजिक भारत की सबसे बड़ी म्यूजिक लेबल कंपनियों में से एक है। यह जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज के तहत काम करती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों कंपनियों के बीच रॉयल्टी रेट को लेकर सहमति नहीं बन पा रही है।
अपने म्यूजिक कैटालॉग की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए जी म्यूजिक कंपनी रॉयल्टी रेट को बढ़ाने की मांग कर रही है, जिससे स्पॉटिफाई सहमत नहीं है।
जी म्यूजिक के पास यूट्यूब पर 9 करोड़ से ज्यादा सब्सक्राइबर हैं।
स्पॉटिफाई का पक्ष
स्पॉटिफाई ने मामले पर क्या कहा?
रिपोर्ट्स के अनुसार, स्पॉटिफाई का कहना है कि वे पहले से ही जी म्यूजिक को ज्यादा रॉयल्टी दे रहे हैं, ऐसे में इसमें इजाफे की मांग अनुचित है।
एक बयान में कंपनी ने कहा, "स्पॉटिफाई और जी म्यूजिक किसी समझौते पर पहुंचने में कामयाब नहीं हुई हैं। पूरी बातचीत के दौरान स्पॉटिफाई ने करार करने की रचनात्मक कोशिशें कीं। हमें बातचीत पर पूरा विश्वास है और भरोसा है कि हम जल्द ही किसी समझौते पर पहुंच जाएंगे।"
प्लेटफॉर्म
क्या है स्पॉटिफाई?
जिस तरह कंटेंट स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म (OTT प्लेटफॉर्म) दर्शकों को देखने के लिए कंटेंट उपलब्ध कराते हैं, उसी तरह म्यूजिक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म यूजर को म्यूजिक उपलब्ध कराते हैं।
स्पॉटिफाई के अलावा 'गाना', 'अमेजन प्राइम म्यूजिक', 'विंक ऐप', 'यूट्यूब प्रीमियम' और 'जियो सावन' आदि लोकप्रिय म्यूजिक स्ट्रीमिंग ऐप हैं।
ये श्रोताओं को सिर्फ लोकप्रिय गाने ही नहीं, बल्कि मनोरंजक पॉडकॉस्ट भी उपलब्ध कराते हैं। श्रोता खुद भी इन पर अपना चैनल बनाकर अपना ऑडियो कंटेंट डाल सकते हैं।
बिजनेस
इस तरह मुनाफा कमाती हैं ये कंपनियां
महंगे दरों पर म्यूजिक कंपनियों से गाने खरीदने वाली ये कंपनियां मुनाफा कैसे कमाती हैं? इनकी कमाई के तीन मुख्य जरिये हैं।
पहला है यूजर सब्सक्रिप्शन। यूजर इन ऐप्स का मासिक या वार्षिक सब्सक्रिप्शन लेते हैं, जिसमें उन्हें कुछ प्रीमियम फायदे दिए जाते हैं।
दूसरा है विज्ञापन। स्ट्रीमिंग कंपनियां मुख्यत: गानों के बीच में आने वाले विज्ञापनों से पैसे कमाती हैं।
तीसरा है प्रमोशन। ये कंपनियां संगीतकारों से उनके नए गानों के प्रमोशन के बदले में भी पैसे लेती हैं।
लाइसेंस
क्यों जरूरी है लाइसेंस?
गानों को अपने प्लेटफॉर्म पर श्रोताओं के लिए उपलब्ध कराने के लिए म्यूजिक स्ट्रीमिंग साइट्स को कॉपीराइट मालिकों (आमतौर पर म्यूजिक कंपनी) से लाइसेंस लेना पड़ता है।
इस लाइसेंस के जरिए कॉपीराइट मालिक स्ट्रीमिंग सर्विस को अपने नियम और शर्तों के साथ गाने इस्तेमाल करने की इजाजत देते हैं।
बिना लाइसेंस के किसी भी प्लेटफॉर्म पर गाने इस्तेमाल करने पर कॉपीराइट मालिक प्लेटफॉर्म के खिलाफ कॉपीराइट उल्लंघन का मामला दर्ज कर सकते हैं और उन्हें दंड भरना पड़ सकता है।