
पायरेसी करने वालों को मिलेगी सजा, सरकार ने सिनेमेटोग्राफ संशोधन विधेयक पर मांगी जनता से राय
क्या है खबर?
सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने बदलते समय के अनुरूप फिल्मों को प्रमाणित करने की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने व पायरेसी का खतरा रोकने के लिए सिनेमेटोग्राफ संशोधन विधेयक, 2021 पेश करने का प्रस्ताव दिया है।
केंद्र सरकार ने 2 जुलाई तक इस विधेयक पर जनता की राय मांगी है। यह कदम वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के लिए नए आईटी नियमों के मुताबिक उठाया गया है।
आइए जानते हैं विधेयक में किन प्रावधानों को शामिल किया गया है।
अधिकार
पुनरीक्षण शक्तियों का प्रयोग कर सकेगी सरकार
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने आम जनता से सिनेमेटोग्राफ संशोधन विधेयक पर 2 जुलाई तक अपने सुझाव भेजने को कहा है।
अधिसूचना के अनुसार इसमें फिल्मों के प्रदर्शन के लिए स्वीकृति की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने का प्रावधान भी शामिल है।
विधेयक पारित होने के बाद केंद्र सरकार, सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष को उन फिल्मों की फिर से जांच करने का आदेश दे सकती है, जो पहले से बोर्ड द्वारा प्रमाणित हैं।
वर्गीकरण
मौजूदा 'U/A' श्रेणी को और श्रेणियों में विभाजित करने का प्रस्ताव
मंत्रालय ने कहा कि प्रस्तावित बदलावों में फिल्मों को 'अप्रतिबंधित सार्वजनिक प्रदर्शन' की श्रेणी में प्रमाणित करने से संबंधित प्रावधानों में संशोधन का प्रस्ताव है ताकि मौजूदा 'U/A' श्रेणी को आयु के आधार पर और श्रेणियों में विभाजित किया जा सके।
हर आयुवर्ग द्वारा देखी जा सकने वाली सामग्री की 'U' रेटिंग होगी। अन्य रेटिंग U/A 5+, U/A13+ और U/A 16+ होगी। वयस्कों के लिए प्रतिबंधित 'A' रेटिंग होगी।
रोक
पायरेसी की समस्या पर भी लगेगी लगाम
विधेयक में पायरेसी पर लगाम लगाने के लिए भी प्रावधान हैं। मंत्रालय ने विधेयक के मसौदे में फिल्म पायरेसी के लिए दंडनीय प्रावधान शामिल किया है और कहा कि इंटरनेट पर फिल्मों के पायरेटेड संस्करण जारी करने से फिल्म जगत और सरकारी खजाने को बहुत नुकसान होता है।
एक सरकारी बयान में कहा गया है कि वर्तमान में सिनेमेटोग्राफ अधिनियम, 1952 में पायरेसी को रोकने के लिए कोई सक्षम प्रावधान नहीं है। इसके लिए अधिनियम में प्रावधान होना आवश्यक है।
दंड
पायरेसी करने वालों को जेल की सजा के साथ भरना पड़ सकता है जुर्माना
प्रावधानों का उल्लंघन करने पर पायरेसी करने वाले को कम से कम तीन महीने की जेल की सजा हो सकती है, जो तीन साल तक बढ़ाई जा सकती है और जुर्माना भी भरना पड़ सकता है। जुर्माने की राशि तीन लाख रुपये तय की गई है।
एक और बदलाव जो सरकार करना चाहती है, वो है फिल्म को सदा के लिए प्रमाणपत्र प्रदान करना। वर्तमान प्रावधान के अनुसार बोर्ड द्वारा जारी प्रमाणपत्र केवल 10 वर्षों के लिए वैध होता है।