
जम्मू-कश्मीर: ड्रॉप-आउट बच्चों को स्कूल वापस लाने में मदद कर रही 'तलाश' ऐप
क्या है खबर?
जम्मू-कश्मीर सरकार के शिक्षा विभाग ने स्कूली शिक्षा से दूर हुए बच्चों को स्कूलों तक पहुंचाने के लिए 'तलाश' नाम की एक ऐप तैयार की है ताकि ऐसे बच्चों को उनके स्कूलों में वापस लाया जा सके।
इस ऐप को मार्च, 2021 में जम्मू-कश्मीर समग्र शिक्षा विभाग की तरफ से लॉन्च किया गया था और इसकी मदद से अब तक 86,000 ऐसे बच्चों की पहचान की जा चुकी है जो स्कूली शिक्षा से बाहर हैं।
ऐप
तलाश ऐप काम कैसे करती है?
तलाश ऐप ऐसे बच्चों की जानकारी जुटाने में मदद करती है जिनका कभी स्कूल में दाखिला नहीं हुआ या फिर किसी कारण उन्होंने स्कूल छोड़ दिया।
इस ऐप का उद्देश्य गहन डाटा विश्लेषण और निगरानी के माध्यम से समय पर और गुणवत्तापूर्ण तरीके से स्कूल से बाहर के बच्चों (OOSC) की गणना करना और उनका ट्रैक रखना है।
अध्यापक अपने स्मार्ट फोन में इस ऐप को डाउनलोड कर छात्रों की मैपिंग और सर्वे कर सकते है।
पंजीकरण
जम्मू कश्मीर में पिछले एक साल में 1.65 लाख बच्चों का हुआ पंजीकरण
जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा, "आओ स्कूल चलें अभियान के तहत एक साल में यहां 1.65 लाख बच्चों का पंजीकरण किया जा चुका है।"
उन्होंने आगे कहा, "अब तक 86,000 स्कूल छोड़ चुके बच्चों की पहचान की जा चुकी है और अब इनका स्कूलों में दाखिला कराया जा रहा है। कोरोना वायरस की बाधाओं के बावजूद 1.24 लाख बच्चों को प्रारंभिक बाल देखभाल शिक्षा के लिए नामांकित किया गया।"
शिक्षा
केंद्र-शासित प्रदेश में शिक्षा की दिशा में किए जा रहे सतत प्रयास
सिन्हा ने श्रीनगर की देवकी आर्य पुत्री पाठशाला के वार्षिक समारोह में कहा कि जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूलों में 2019 से पहले छात्रों का पंजीकरण तेजी से घट रहा था, लेकिन पिछले दो वर्षों में यह 14.5 प्रतिशत तक बढ़ गया है।
उन्होंने आगे कहा कि केंद्र-शासित प्रदेश में पिछले दो वर्षों से राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 (NEP) के अनुसार बाल देखभाल और शिक्षा की दिशा में सतत प्रयास किए जा रहे हैं।
NEET
जम्मू-कश्मीर में 14,000 लड़कियों को दी जाएगी NEET की कोचिंग
इस दौरान उन्होंने कहा कि 14,000 लड़कियों को NEET की तैयारी के लिए कोचिंग दी जाएगी, जिसका खर्च प्रशासन उठाएगा।
उन्होंने कहा, "स्वतंत्रता के बाद के वर्षों में कठोर कानूनों के कारण महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित कर दिया गया था। शिक्षा का अधिकार पूरे देश में लागू था, लेकिन इसे जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं किया गया। अगस्त, 2019 के बाद स्थिति में बदलाव आया और इसे सभी 890 केंद्रीय कानूनों के साथ लागू कर दिया गया।"