
BHU में UPSC परीक्षा की तैयारी के लिए मुफ्त कोचिंग शुरू, इन छात्रों को होगा फायदा
क्या है खबर?
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के छात्रों के लिए डॉ अंबेडकर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (DACE) के तहत संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग की शुरुआत हो गई है।
इस कोचिंग में एडमिशन के लिए BHU की ओर से 7 अगस्त, 2022 को प्रवेश परीक्षा आयोजित की गई थी।
बता दें कि इस कोचिंग में छात्रों को मुफ्त कोचिंग दिए जाने का प्रावधान है।
लाभ
SC वर्ग के 100 छात्र ले सकते हैं कोचिंग का लाभ
DACE ने 22 अप्रैल, 2022 को BHU में अपना एक केंद्र लॉन्च किया था।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की पहल के माध्यम से BHU और DACE का उद्देश्य SC वर्ग के छात्रों के लिए सिविल सेवा परीक्षा के लिए मुफ्त कोचिंग देना और समावेशी अवसर प्रदान करना है।
इस वर्ग के छात्रों के लिए यह योजना निशुल्क कक्षाओं के लिए 100 सीटों की पेशकश करती है, जिसमें से 33 प्रतिशत SC वर्ग की पात्र छात्राओं के लिए आरक्षित है।
सुविधाएं
छात्रों को कोचिंग में क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी?
इस कोचिंग में 100 छात्रों के लिए स्मार्ट क्लासरुम, लाइब्रेरी, हाई-स्पीड WIFI की व्यवस्था दी जाएगी।
विश्वविद्यालय UPSC सिविल सेवा परीक्षा के नवीनतम पैटर्न के आधार पर छात्रों को पाठ्यक्रम और तैयारी सामग्री भी प्रदान करेगा।
इसमें प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के अलावा इंटरव्यू तक की पढ़ाई होगी।
कोचिंग को चलाने के लिए तीन शिक्षक भी नियुक्त किए गए हैं जिनको 1.15 लाख रूपये प्रति माह वेतन दिया जाएगा।
कार्यक्रम
देश के 31 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में हुई इस कार्यक्रम की शुरुआत
बता दें कि 22 अप्रैल को BHU से देश भर के 31 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में इस कोचिंग का शुभारंभ किया गया था।
केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और सुपर 30 के फाउंडर आनंद कुमार ने कृषि विज्ञान संस्थान के शताब्दी सभागार से इसकी घोषणा की थी।
इस पूरे कार्यक्रम का नोडल अधिकारी BHU में बॉटनी डिपार्टमेंट के प्रो. आरएन खरवार को बनाया गया है।
नतीजे
बेहतर नतीजे न आने पर विश्वविद्यालयों से वापस ली जा सकती है जिम्मेदारी
DACE के निदेशक विकास त्रिवेदी ने कहा कि UPSC की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में 10 प्रतिशत छात्रों के चयन का लक्ष्य तय किया गया है।
उन्होंने कहा है कि अगर इसे पूरा नहीं किया गया तो विश्वविद्यालयों से उत्कृष्टता केंद्र की जिम्मेदारी वापस ले ली जाएगी।
बता दें कि केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की तरफ से हर साल 75,000 रुपये प्रति छात्र के हिसाब से विश्वविद्यालय को अनुदान मिलेगा।