
उत्तर प्रदेश: फर्जी दस्तावेज की मदद से हुई 2,494 शिक्षकों की भर्ती, STF ने किया खुलासा
क्या है खबर?
उत्तर प्रदेश में बीते वर्षों में हुई शिक्षक भर्ती के दौरान फर्जी दस्तावेजों के प्रयोग का मामला सामने आया है।
राज्य बेसिक शिक्षा परिषद और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की तरफ से की गई जांच में पता चला है कि राज्य में लगभग 2,494 उम्मीदवारों ने फर्जी दस्तावेज का प्रयोग करके शिक्षक के पद पर नौकरी हासिल की।
बता दें कि राज्य में शिक्षक भर्ती घोटाले को लेकर विपक्ष लंबे समय से योगी सरकार पर आरोप लगाता आया है।
आदेश
STF को 2020 में मिले थे जांच के आदेश
द क्विंट की रिपोर्ट के मुताबिक, शिक्षा विभाग में भर्ती को लेकर हुए बड़े विवाद के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 2020 में STF को घोटाले की जांच का आदेश दिया था।
STF के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया कि यह आंकड़ें बहुत कम हैं और अगर पूरे राज्य में अच्छी तरह से जांच की जाए तो ऐसे फर्जी शिक्षकों की संख्या 10,000 से भी अधिक पहुंच सकती है।
बर्खास्त
2,461 शिक्षकों को किया जा चुका है बर्खास्त
जानकारी के मुताबिक, इस मामले में शिक्षा विभाग में कार्यरत पाए जाने वाले शिक्षकों की पहचान की गई है और प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) के रजिस्ट्रेशन, सेवा समाप्ति और वेतन राशि की वसूली सहित कार्रवाई चल रही है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भर्ती के दौरान फर्जी दस्तावेज का प्रयोग करने के जुर्म में जांच के दौरान 2,347 FIR दर्ज की गई हैं और फर्जी पाए गए 2,461 शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया गया है।
प्रमाण पत्र
मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड किए शैक्षणिक योग्यता के प्रमाण पत्र
राज्य शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "हमने डाटाबेस बनाया है और कक्षा 10 से 12 तक की सभी अंकतालिका से लेकर बैचलर ऑफ एजुकेशन (BET) और शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को हमारे मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड कर दिया है।"
उन्होंने बताया कि राज्य के विभिन्न जिलों में हमारी समिति ऐसे बहुत से मामलों की जांच कर रही है। इस दौरान हमने कई शिक्षकों को फर्जी पाया और फिर FIR, वसूली नोटिस और निलंबन किया।
उद्देश्य
मानव संपदा पोर्टल पर डाटा अपलोड करने का उद्देश्य क्या था?
उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद की आरे से जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मानव संपदा पोर्टल पर अब तक 5,59,144 शिक्षकों की नियुक्ति और शैक्षणिक योग्यता से संबंधित सेवा रिकॉर्ड और दस्तावेज अपलोड किए जा चुके हैं।
डिजिटलीकरण के अलावा इस मुहिम का उद्देश्य ऐसे शिक्षकों को नौकरी से बाहर निकालने का था, जिन्होंने नौकरी पाने के लिए जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया और अन्य गलत तरीकों से इस पद के लिए चयनित हुए।
उपयोग
227 फर्जी शिक्षकों ने भर्ती के दौरान दूसरों के प्रमाण का किया था उपयोग
STF ने 227 फर्जी शिक्षकों के दस्तावेजों की ताजा जांच में पाया कि 90 प्रतिशत से ज्यादा शिक्षकों ने या तो किसी और के दस्तावेज खुद के रूप में पेश किए या योग्यता मांगों को पूरा करने के लिए जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया।
धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले अन्य साधनों में फर्जी जाति प्रमाण पत्र, स्वतंत्रता सेनानी प्रमाण पत्र, विकलांगता प्रमाण पत्र और ट्रांसफर आदेश शामिल थे।
न्यूजबाइट्स प्लस
अनामिका शुक्ला कांड के बाद उजागर हुआ था शिक्षक भर्ती घोटाला
जून 2020 में उत्तर प्रदेश सरकार को पता चला था कि 'अनामिका शुक्ला' नाम से कई महिलाओं की सरकारी स्कूलों में बतौर शिक्षक भर्ती हुई है।
कथित अनामिका का नाम राज्य के कई जिलों में एक शिक्षिका के रूप में पंजीकृत था। इस महिला ने 13 माह की नौकरी में विभाग से लगभग 1 करोड़ रुपये ले लिए।
इसके बाद ऐसे कई शिक्षकों को गिरफ्तार किया गया था। उसके बाद शिक्षक भर्ती घोटाले ने जोर पकड़ना शुरू कर दिया था।