
21 महीनों में 25,000 से ज्यादा उड़ानें हुई रद्द, सर्वे में किया यह दावा
क्या है खबर?
हवाई यात्रा की बढ़ती मांग के बीच एयरलाइंस कंपनियां परिचालन और बेड़े की क्षमता बढ़ाने के लिए भारी निवेश कर रही हैं।
दूसरी तरफ खराब सेवाएं भारतीय विमानन उद्योग में बाधा बन रही हैं। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि खराब सेवाएं, देरी और उड़ान रद्द होने से विमानन उद्योग को तगड़ा नुकसान हो रहा है।
आंकड़ों के अनुसार, जनवरी, 2022 से सितंबर, 2024 के बीच 25,500 उड़ान रद्द होने से 10.76 लाख से अधिक यात्री प्रभावित हुए हैं।
मुआवजा
यात्रियों को कितना मिला मुआवजा?
लोकल सर्किल्स के सर्वेक्षण के अनुसार, 61 प्रतिशत हवाई यात्रियों ने बताया है कि पिछले 12 महीनों में उन्हें कम से कम एक बार आंतरिक कारणों से उड़ान रद्द करने या पुनर्निर्धारित करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
इस दौरान यात्रियों को मुआवजा नहीं दिया गया, जबकि खुद रद्द कराने पर 50-100 फीसदी जुर्माना वसूला गया।
पिछले 3 सालों में इंडिगो की उड़ान रद्द होने से 5.47 लाख से ज्यादा ग्राहक प्रभावित हुए, लेकिन मुआवजा सिर्फ 18,000 रुपये दिया।
उड़ान रद्द
इस कंपनी की उड़ानें हुई सबसे ज्यादा रद्द
आंकड़ों के अनुसार, उड़ानें रद्द होने का सबसे बड़ा कारण 41.56 प्रतिशत मौसम बताया गया था, जबकि शेष कारण तकनीकी, वाणिज्यिक और परिचालन संबंधी थे।
2024 के पहले 9 महीनों में सबसे ज्यादा उड़ानें रद्द की गईं, जिसमें भारत की शीर्ष एयरलाइन इंडिगो की हिस्सेदारी 60.53 प्रतिशत और 15,464 मामले थे।
नागरिक उड्डयन मंत्री मुरलीधर मोहोल ने राज्यसभा में बताया कि एलायंस एयर ने 2,707, एयर इंडिया ने 1,934 और स्पाइसजेट ने 1,731 उड़ानें रद्द की थी।