
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चाइनीज स्मार्टफोन कंपनी वीवो के 44 ठिकानों पर ED की छापेमारी
क्या है खबर?
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चाइनीज स्मार्टफोन कंपनी वीवो और उससे जुड़ी फर्मों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है।
ED ने कंपनी के उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और दक्षिण भारत के राज्यों में स्थित 44 ठिकानों पर छापेमारी की है।
एजेंसी की ओर से यह कार्रवाई वीवो और उससे संबंधित कंपनियों और सहायक कंपनियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज करने के बाद की है।
आरोप
रॉयल्टी के नाम पर पैसों की हेराफेरी का है आरोप
बता दें कि पिछले साल दिसंबर में भी आयकर विभाग ने वीवो और अन्य चीनी मोबाइल फोन निर्माताओं के परिसरों पर छापेमारी की थी।
आयकर विभाग ने आरोप लगाया था कि कंपनियों ने 500 करोड़ रुपये से अधिक की आय की गलत घोषणा की थी।
इसके अलावा आरोप था कपंनियों की ओर से रॉयल्टी के नाम पर पैसों की हेराफेरी की जा रही है। उसके बाद से ही वीवो और उससे जुड़ी कंपनियां ED के निशाने पर आ गई थी।
वसूली
कंपनी से की जा चुकी है 220 करोड़ रुपये की वसूली
बता दें कि मई 2021 में वैश्विक टेलीकम्युनिकेशन उपकरण और सिस्टम कंपनी ZTE कॉर्पोरेशन और वीवो मोबाइल कम्युनिकेशंस कंपनी की स्थानीय इकाइयों को कथित वित्तीय अनियमितताओं के लिए जांच का सामना करना पड़ा था।
उस दौरान वीवो का गुरुग्राम स्थित HSBC बैंक का खाता अटैच कर SGST विभाग ने करीब 220 करोड़ रुपये की वसूली की थी।
इसी तरह अगस्त 2021 में ZTE के गुड़गांव स्थित कॉर्पोरेट कार्यालयों में छापेमारी की गई थी।
पृष्ठभूमि
वीवो के खिलाफ दर्ज हो चुका है धोखाधड़ी का मामला
द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, ED की इस छापेमारी से जुड़े मामले का अभी पूरी तरह खुलासा नहीं हो सकता है, लेकिन 2020 में मेरठ पुलिस ने कंपनी के खिलाफ एक ही इंटरनेशनल मोबाइल इक्विपमेंट आइडेंटिटी (IMEI) नंबर से देश में लगभग 13,500 फोन संचालित करने के आरोप में धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था।
बता दें कि 15 अंकीय IMEI नंबर का इस्तेमाल व्यक्तिगत रूप से स्मार्टफ़ोन की पहचान करने के लिए किया जाता है।
जानकारी
TRAI ने जारी किए थे आदेश
इस मामले में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने 2017 में एक अधिसूचना जारी कर सभी स्मार्टफोन्स कंपनियों को प्रत्येक फोन के लिए अलग IMEI रखने का निर्देश दिया था। ऐसा नहीं करने पर दोषी को तीन साल की जेल का प्रावधान किया था।
अन्य
शाओमी के खिलाफ भी की जा चुकी है कार्रवाई
इससे पहले चीनी स्मार्टफोन कंपनी शाओमी के खिलाफ भी देश में टैक्स चोरी और विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA), 1999 के प्रावधानों के उल्लंघन के तहत कार्रवाई की जा चुकी है।
मामले में आयकर विभाग ने जहां 12 मई को कंपनी के स्थानीय बैंक खातों में 478 मिलियन डॉलर की राशि को सीज कर दिया था, वहीं 30 अप्रैल को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने FEMA के उल्लंघन के तहत कंपनी की 5,551.27 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की थी।
प्रकरण
शाओमी के खिलाफ क्या है मामला?
शाओमी ने साल 2014 में भारत में अपना कारोबार शुरू किया था। इसके बाद कंपनी ने 2015 से अवैध तरीके से भारत से बाहर पैसा भेजना शुरू कर दिया।
कंपनी ने तीन विदेशी कंपनियों को 5551.27 करोड़ रुपये के बराबर विदेशी मुद्रा भेजी थी। इनमें रॉयल्टी की आड़ में एक शाओमी समूह इकाई भी शामिल है।
अधिकारियों का दावा था कंपनी ने रॉयल्टी की आड़ में भारत में कमाई रकम विदेश भेजकर FEMA की धारा चार का उल्लंघन किया है।
रुख
न्यूजबाइट्स प्लस (जानकारी)
बता दें कि गलवान घाटी हिंसा के बाद भारत ने चीन को आर्थिक झटका देने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं। सरकार ने सुरक्षा को खतरा बताते हुए अब तक 321 चीनी मोबाइल ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया। इनमें 54 ऐप्स पर तो फरवरी में ही प्रतिबंध लगाया गया था।
इसी तरह सरकार ने देश में संचालित चीनी कंपनियों के खिलाफ भी टैक्स चोरी सहित अन्य मामलों में जांच शुरू कर रखी है। यह चीन के लिए झटका है।