
क्या कोविड महामारी अपने अंत की तरफ बढ़ रही है? जानें विशेषज्ञों की राय
क्या है खबर?
भारत और अमेरिका समेत कई देशों में कोरोना वायरस के दैनिक मामलों में गिरावट के बाद एक बार फिर से कोविड महामारी के समाप्ति की ओर बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
अमेरिका में क्वारंटीन और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे नियमों में ढील से इस उम्मीद को और अधिक बल मिला है।
लेकिन क्या सच में महामारी अपने अंत की ओर बढ़ रही है? आइए इस पर विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों की राय जानते हैं।
मत
वैज्ञानिकों का मत- अभी बहुत दूर है महामारी का अंत
वैज्ञानिकों का मानना है कि अभी कोविड महामारी का अंत बहुत दूर है। ये महामारी पहले ही 1918 की स्पेनिश फ्लू महामारी से ज्यादा समय तक चल चुकी है और इसके इतना लंबा चलने के पीछे की मुख्य वजह लगातार म्यूटेशन के कारण कोरोना वायरस का वैक्सीनेशन और संक्रमण से प्राप्त हुई इम्युनिटी को मात देने में बेहतर होते जाना है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, अमेरिका में सामने आया BA.4.6 सब-वेरिएंट इम्युनिटी को मात देने में बाकी सब-वेरिएंट्स से बेहतर है।
समय
कितने समय तक रहेगा कोविड?
व्हाइट हाउस के कोविड कॉर्डिनेटर डॉ आशीष झा के अनुसार, कोविड पूरे जीवन हमारे साथ रहेगा।
विशेषज्ञों का मत है कि आने वाले समय में कोविड एक स्थानीय महामारी बन जाएगा, यानि ये कुछ इलाकों में नियमित तौर पर फैलेगा। हालांकि उनका मानना है कि ऐसा निकट भविष्य में होने की संभावना नहीं है।
उन्होंने यह भी आशंका जताई कि कोविड के कारण कई लोगों को गंभीर बीमारी होती रहेगी।
उछाल
कब तक देखने को मिलेगा कोरोना के मामलों में उछाल?
स्क्रिप्स रिसर्च ट्रांसलेशनल इंस्टीट्यूट के प्रमुख एरिक टोपोल ने कहा कि अगली पीढ़ी की कोविड वैक्सीनें विकसित होने और दुनियाभर में इनके समान वितरण तक दुनिया में बार-बार कोरोना के मामलों में उछाल देखने को मिलता रहेगा।
उन्होंने कहा कि अभी कोरोना वायरस के पास इंसान की रणनीतियों से पार पाने के कई तरीके हैं और वह ऐसा करता रहेगा।
इसका मतलब महामारी की समाप्ति के लिए नई पीढ़ी की वैक्सीनें और बूस्टर खुराक अहम हो जाती हैं।
म्यूटेशन
आगे कैसे म्यूटेट करेगा कोरोना वायरस?
वैज्ञानिकों के अनुसार, अभी के लिए कोरोना वायरस की स्पाइक प्रोटीन में म्यूटेशन होते रहेंगे, जिनकी मदद से वह इंसानी सेल्स से जुड़कर उनके शरीर में दाखिल होता है। हालांकि हमेशा ऐसा नहीं होता रहेगा।
मिनेसोटा के मायो क्लीनिक में क्लिनिकल वायरोलॉजी के निदेशक मैथ्यू बिनिकर ने कहा कि अभी ऐसे बहुत से लोग हैं जिनके पास इम्युनिटी नहीं है और जब मानवता की इम्युनिटी का न्यूनतम स्तर काफी बढ़ जाएगा, अधिक संक्रामक वेरिएंट्स का सामने आना कम हो जाएगा।
घातक
वायरस के अधिक घातक होने की भी संभावना
हालांकि इस बात की संभावना है कि मानवता की इम्युनिटी बढ़ने पर वायरस में ऐसे म्यूटेशन हों, जो उसे अधिक संक्रामक बनाने की बजाय अधिक घातक बनाए।
ह्यूस्टन मेथोडिस्ट अस्पताल के पैथोलॉजिस्ट डॉ वैजली लॉन्ग के अनुसार, बायोलॉजिकली ऐसा कोई जरूरी नहीं है कि वायरस समय के साथ कम घातक हो।
उन्होंने कहा कि अभी ये कम घातक है, इसका श्रेय काफी हद तक इम्युनिटी को जाता है, हालांकि इम्युनिटी के खत्म होने का खतरा हमेशा बना रहता है।
वैक्सीनेशन
क्या लोग प्रभावित कर सकते हैं महामारी का भविष्य?
विशेषज्ञों का कहना है कि लोग महामारी के भविष्य को प्रभावित कर सकते है और इसका एक तरीका वैक्सीनेशन कराना और बूस्टर खुराक लगवाना है।
वैक्सीन न केवल गंभीर बीमारी और मौत से बचाती है, बल्कि ये वैश्विक स्तर पर इम्युनिटी का स्तर भी बढ़ाती है।
अमेरिका रोग नियंत्रण केंद्र (CDC) की निदेशक रोचेल वेलेंस्की के अनुसार, अगर अमेरिका के लोग फ्लू की तरह कोविड की भी बूस्टर खुराक लगवाते हैं तो इस पतझड़ लगभग 9,000 मौतें बच जाएंगी।
कोविड महामारी
दुनियाभर में क्या है महामारी की स्थिति?
जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के मुताबिक, दुनियाभर में अब तक लगभग 60.70 करोड़ लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं, वहीं 65.08 लाख लोगों की मौत हुई है।
सर्वाधिक प्रभावित अमेरिका में 9.50 करोड़ लोग संक्रमित हो चुके हैं और 10.49 लाख लोगों की मौत हुई है।
दूसरे सबसे प्रभावित देश भारत में 4.45 करोड़ संक्रमितों में से 5.28 लाख और तीसरे सबसे अधिक प्रभावित देश फ्रांस में 3.49 करोड़ संक्रमितों में से 1.55 लाख मरीजों की मौत हुई है।