
डोनाल्ड ट्रंप पर हमले के साजिश रच रहा था ईरान, सीक्रेट सर्विस को मिली थी जानकारी
क्या है खबर?
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर एक रैली के दौरान जानलेवा हमला किया गया था। अब इस हमले में अमेरिका के कट्टर दुश्मन ईरान का नाम भी जोड़ा जा रहा है।
CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, हमले से पहले अमेरिका की खुफिया एजेंसियों को जानकारी मिली थी कि ईरान ट्रंप की हत्या की साजिश रच रहा है। खतरे की जानकारी मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने ट्रंप की सुरक्षा भी बढ़ा दी थी।
सुरक्षा
जून में बढ़ाई गई थी ट्रंप की सुरक्षा
एक अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी के अनुसार, अमेरिकी सीक्रेट सर्विस और ट्रंप की कैंपेन टीम को ईरानी खतरे के बारे में सूचित किया गया था। इसके बाद ट्रंप की सुरक्षा बढ़ा दी गई थी।
BBC के मुताबिक खुफिया सूत्रों ने बताया कि ईरानी खतरे के जवाब में सीक्रेट सर्विस ने जून में ट्रंप सुरक्षा बढ़ाई थी। इसमें अतिरिक्त जवाबी हमला और जवाबी स्नाइपर एजेंट, ड्रोन और रोबोट कुत्ते जैसे उपाय शामिल थे।
खुफिया जानकारी
कैसे मिली थी खुफिया जानकारी?
CBS के मुताबिक, संभावित ईरानी ऑपरेशन की जानकारी 'मानव सोर्स इंटेलिजेंस' के जरिए हासिल की गई थी। यह जानकारी ट्रंप के खिलाफ हमलों के बारे में ईरानी चर्चा में बढ़ोतरी के बीच आई थी।
बता दें कि ट्रंप और उनके पूर्व विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ सहित कई अधिकारियों को 2020 में इराक में ईरान के कुद्स फोर्स के कमांडर कासिम सुलेमानी की ड्रोन हमले से हत्या का आदेश देने के बाद से धमकियों का सामना करना पड़ रहा है।
ईरान
हमलावर का कोई ईरानी संबंध नहीं मिला- अधिकारी
हालांकि, अभी तक ट्रंप पर हमला करने वाले थॉमस मैथ्यू क्रुक्स और कथित ईरानी साजिश के बारे में कोई संबंध नहीं मिला है।
व्हाइट हाउस राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की प्रवक्ता एड्रिएन वॉटसन ने कहा, "अमेरिका के सुरक्षा अधिकारी पूर्व ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों के विरुद्ध ईरानी खतरों पर सालों से नजर रख रहे थे। अभी तक कि जांच में क्रुक्स और किसी भी विदेशी या घरेलू सहयोगी या षड्यंत्रकारी के बीच संबंधों की पहचान नहीं हुई है।"
बयान
मामले पर ईरान ने क्या कहा?
संयुक्त राष्ट्र (UN) में ईरानी मिशन ने रिपोर्ट को 'निराधार और दुर्भावनापूर्ण' बताया और कहा कि ट्रंप एक अपराधी हैं, जिन पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए और उन्हें कानून की अदालत में दंडित किया जाना चाहिए। ईरान ने कहा कि उसने ट्रंप को न्याय के कटघरे में लाने के लिए कानूनी रास्ता चुना है।
बता दें कि कई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सुलेमानी की हत्या का बदला लेने के लिए ईरान के निशाने पर अमेरिकी अधिकारी हैं।
हमला
रैली के दौरान ट्रंप पर हुआ था हमला
14 जुलाई को पेंसिल्वेनिया में एक चुनावी रैली में बोलते समय ट्रंप पर जानलेवा हमला किया गया था।
20 साल के हमलावर क्रुक्स ने एक इमारत की छत से ट्रंप पर गोलियां चलाई थीं, जिसमें से एक उनके कान को छूकर निकल गई थी। तुरंत ही सीक्रेट सर्विस ने हमलावर को मार गिराया था।
घटनास्थल से एक AR-15 सेमी-ऑटोमेटिक राइफल भी बरामद हुई थी। हमलावर बेथेल पार्क पेंसिल्वेनिया का रहने वाला था।