
चीन की आबादी में क्यों आ रही कमी और क्या होगा इसका असर?
क्या है खबर?
इसी सप्ताह खबर आई कि चीन की आबादी 60 साल में पहली बार घटी है।
2022 के अंत तक चीन की आबादी 1.41175 अरब थी, जो एक साल पहले 1.41260 अरब थी। यानी एक साल में करीब 8.5 लाख लोग कम हुए हैं।
जानकारों का कहना है कि चीन की आबादी अब चरम पार कर चुकी है और जल्द ही भारत सबसे अधिक आबादी वाला देश बन जाएगा।
आइये समझते हैं कि चीन की आबादी क्यों घट रही है।
कारण
आबादी में कमी के कारण क्या हैं?
वन-चाइल्ड पॉलिसी के चलते 1980 के दशक के बाद पहली बार जन्मदर में गिरावट दर्ज की गई है।
चीन ने बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए एक संतान पैदा करने की नीति लागू की थी और लोगों से इसका पालन करवाने के लिए बेहद कड़े कदम उठाए थे।
चीनी सरकार आज भी इस नीति का बचाव करते हुए कहती है कि इसके कारण 40 करोड़ कम बच्चे पैदा हुए हैं। हालांकि, विशेषज्ञों को इस अनुमान पर भरोसा नहीं है।
कारण
देरी से बच्चे पैदा कर रहे हैं चीनी दंपत्ति
वन-चाइल्ड नीति के अलावा जनसंख्या में गिरावट का दूसरा कारण शादी में देरी है।
द हिंदू के अनुसार, एशिया सोसायटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के एक पेपर में बताया गया है कि युवा चीनी लोग देर से शादी कर रहे हैं। वो कम बच्चे पैदा कर रहे हैं और कई लोग बच्चे पैदा करने से भी बच रहे हैं।
2013 में 1.34 करोड़ चीनी लोगों ने शादी की थी, लेकिन 2020 में यह संख्या गिरकर 81 लाख रह गई।
चीन
पैरेंट बनने की औसत उम्र भी बढ़ी
चीन में लोगों के पैरेंट बनने की उम्र भी बढ़ी है। 1990-2020 तक चीन में पहली बार पैरेंट बनने वाले लोगों की औसत उम्र 24.1 साल से बढ़कर 27.5 साल हो गई है।
शादी करने और परिवार शुरू करने में देरी कर युवा अब कम बच्चे चाहते हैं।
पिछले साल पहली बार चीन में पैदा होने वाले बच्चों की संख्या (95.6 लाख) मरने वालों से कम रही है। जन्मदर में 2021 की तुलना में 10 प्रतिशत गिरावट आई है।
चीन
जन्मदर में आई बड़ी गिरावट
चीन में 2021 में बच्चों के पैदा होने की जन्म दर प्रति 1,000 लोगों पर 7.52 थी, जो 2022 में घटकर 6.67 रह गई।
जन्म दर का यह आंकड़ा 1949 के बाद सबसे कम है। वहीं मृत्यु दर 1976 के बाद सर्वाधिक है। चीन में 2022 में प्रति 1,000 लोगों पर 7.37 लोगों की मृत्यु हुई।
लगातार घटती आबादी से चीन की सरकार भी चिंतित है और उसने 2016 में वन-चाइल्ड नीति को समाप्त कर दिया था।
असर
घट रही चीन की कामकाजी आबादी
चीन में जन्मदर कम होने से कामकाजी आबादी की संख्या भी घट रही है। 2022 के अंत में चीन की कामकाजी आबादी (16-59) 87.5 करोड़ यानी आबादी का 62 प्रतिशत थी, जो 2010 की कामकाजी जनसंख्या से 7.5 करोड़ कम है।
वहीं 60 साल से ऊपर की आबादी 28 करोड़ (कुल आबादी का 20 प्रतिशत) थी। पिछले 12 सालों में इसमें तीन करोड़ का इजाफा हुआ है। यानी आश्रित लोगों की संख्या बढ़ी है।
जानकारी
60+ लोगों पर बढ़ेगा सरकार का खर्च
2050 तक चीन में 60+ लोगों की संख्या कुल आबादी की 35 प्रतिशत हो जाएगा। इनकी स्वास्थ्य जरूरतों पर 2015 में GDP (सकल घरेलू उत्पाद) का 7 प्रतिशत पैसा खर्च किया गया था, जो 2050 तक बढ़कर 26 प्रतिशत हो जाएगा।
असर
चीन की अर्थव्यवस्था पर इसका क्या असर होगा?
चीन का श्रमिक बल भी अपने चरम को पार कर चुका है और अब इसमें गिरावट देखी जा रही है।
2011 में चीन के पास 92.5 करोड़ श्रमिक बल था और 2050 तक यह घटकर 70 करोड़ रह जाएगा।
ग्रामीण इलाकों से आकर फैक्ट्रियों में काम करने वाले श्रमिकों की संख्या भी अब कम हो रही है। मजूदरों की कमी और बढ़ती मजदूरी के कारण कई कंपनियां चीन से बाहर दूसरे देशों में अपने प्लांट लगा रही हैं।
असर
ऑटोमेशन पर पैसा खर्च कर रहीं कंपनियां
कम होते मजदूरों के कारण कई कंपनियों ऑटोमेशन पर पैसा खर्च कर रही है। ई-कॉमर्स क्षेत्र की दिग्गज JD ने ऑटोमेशन पर भारी निवेश किया है ताकि मजदूरों की कमी से न जूझना पड़े।
वहीं जिन कंपनियों को मजदूरों की जरूरत होगी, वो भारत का रूख कर रही हैं। भारत इस साल दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बन जाएगा। यहां पर कंपनियों को वैसा ही श्रमिक बल मिल रहा है, जो 1980 के दशक में चीन में था।
उपाय
अब चीन दे रहा आबादी बढ़ाने पर ध्यान
घटती आबादी का अनुमान देखते हुए चीन ने 2016 में वन-चाइल्ड नीति को समाप्त कर दिया था। उसके बाद लाई गई दो बच्चों की नीति को भी समाप्त किया गया और लोगों को ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
हालांकि, महंगाई और जीने की बढ़ती लागत के चलते लोग इसके लिए उत्साहित नहीं है। एक सर्वे में सामने आया था कि चीन में औसतन हर महिला दो से कम बच्चे चाहती है।