
ISRO के 5 सबसे महंगे अंतरिक्ष मिशन कौन-कौन से हैं?
क्या है खबर?
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अब तक कई महंगे और जटिल अंतरिक्ष मिशन सफलतापूर्वक लॉन्च किए हैं।
ये मिशन न केवल भारत की वैज्ञानिक प्रगति को दर्शाते हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश की पहचान मजबूत करते हैं। इन मिशनों में चंद्रमा, मंगल और सूर्य से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं।
आइए यहां लॉन्च हो चुके ISRO के अब तक के 5 सबसे महंगेमिशनों पर नजर डालते हैं।
#1
चंद्रयान-3
ISRO का तीसरा चंद्र मिशन चंद्रयान-3 आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से 14 जुलाई, 2023 को लॉन्च हुआ और 23 अगस्त को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक उतरा।
इस मिशन की लागत 615 करोड़ रुपये थी। इसमें विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर भेजे गए, जिन्होंने चंद्रमा की सतह पर महत्वपूर्ण प्रयोग किए।
यह मिशन भारत को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग कराने वाला पहला देश बना चुका है।
#2
चंद्रयान-2
चंद्रयान-2 को 22 जुलाई, 2019 को लॉन्च किया गया था। इस मिशन की लागत लगभग 978 करोड़ रुपये आई थी। यह मिशन चंद्रमा पर लैंडर, रोवर और ऑर्बिटर भेजने के लिए बनाया गया था।
हालांकि, विक्रम लैंडर की लैंडिंग सफल नहीं रही, लेकिन ऑर्बिटर अब भी चंद्रमा की परिक्रमा कर रहा है और महत्वपूर्ण वैज्ञानिक डाटा भेज रहा है।
इस मिशन से भारत ने चंद्र अध्ययन में बड़ा कदम बढ़ाया।
#3
मंगलयान
मंगल ग्रह के लिए ISRO का पहला मिशन मंगलयान (मार्स ऑर्बिटर मिशन) 5 नवंबर, 2013 को लॉन्च हुआ था।
मंगलयान मिशन की कुल लागत 450 करोड़ रुपये थी। यह मिशन पहली ही कोशिश में सफल हुआ, जो अब तक दुनिया के कुछ ही देशों ने हासिल किया है।
इस मिशन ने मंगल ग्रह के वातावरण और उसकी सतह से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं और लगभग 8 साल तक काम करता रहा।
#4
आदित्य-L1
आदित्य-L1 भारत का पहला सौर मिशन है, जिसे 2 सितंबर, 2023 को लॉन्च किया गया था। इस मिशन की अनुमानित लागत 400 करोड़ रुपये थी।
यह मिशन सूर्य का अध्ययन करने के लिए L1 लैग्रेंज प्वाइंट पर भेजा गया है। आदित्य-L1 सूर्य के कोरोना, सौर हवाओं और अन्य गतिविधियों का अध्ययन कर रहा है।
आदित्य-L1 मिशन भारत को सौर भौतिकी में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
#5
GSAT-11
GSAT-11 को 4 दिसंबर, 2018 को फ्रेंच गुआना से लॉन्च किया गया था, जिसकी अनुमानित लागत 585 करोड़ रुपये थी।
यह भारत का सबसे भारी संचार सैटेलाइट है, जिसका वजन लगभग 5,854 किलोग्राम था। GSAT-11 को हाई-स्पीड इंटरनेट और ब्रॉडबैंड सेवाएं प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया था।
GSAT-11 सैटेलाइट देश के कुछ बहुत पिछड़े और ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने में मदद कर रहा है।