
'चांद की मिट्टी' खाने वाले कॉकरोच होने वाले थे नीलाम, NASA ने लगाई रोक
क्या है खबर?
अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने बॉस्टन की ऑक्शन कंपनी की ओर से की जा रही चांद की मिट्टी और उसे खाने वाले तीन कॉकरोच की बिक्री पर रोक लगा दी है।
NASA ने ऑक्शन हाउस RR ऑक्शन को उन तीन कॉकरोच के अवशेषों की नीलामी रोकने को कहा, जिन्हें चांद की मिट्टी (मूनडस्ट) खिलाई गई थी।
बता दें, साल 1969 में किए गए अपोलो 11 मिशन के दौरान इकट्ठा की गई चांद की मिट्टी भी नीलामी के लिए रखी जानी थी।
नीलामी
40 मिलीग्राम मूनडस्ट के साथ बिकने वाले थे कॉकरोच
बॉस्टन की ऑक्शन हाउस कंपनी RR ऑक्शन दुनिया की सबसे बड़ी ऑक्शन कंपनियों में शामिल है।
इसने नीलामी के लिए 40 मिलीग्राम चांद की मिट्टी और तीन कॉकरोच आर्टिकल्स के तौर पर लिस्ट किए थे।
माना जा रहा था कि बोली लगने के बाद इनसे चार लाख डॉलर्स (करीब 3.13 करोड़ रुपये) तक की कमाई हो सकती है।
हालांकि, NASA की ओर से रोक लगाए जाने के बाद अब इन आर्टिकल्स को नीलामी से हटा दिया गया है।
लेटर
NASA ने ऑक्शन हाउस को भेजा लेटर
अंतरिक्ष एजेंसी ने ऑक्शन हाउस को एक लेटर भेजकर मूनडस्ट और कॉकरोच से जुड़ी नीलामी रोकने को कहा।
इस लेटर में NASA ने लिखा कि सभी अपोलो 11 अंतरिक्ष मिशन सैंपल्स फेडरल गवर्मेंट की प्रॉपर्टी हैं और इन्हें बेचा नहीं जा सकता।
साथ ही इन सैंपल्स को कहीं डिस्प्ले पर रखना या किसी और तरह इस्तेमाल करना गलत है।
बता दें, RR ऑक्शंस इन आइटम्स की बिक्री एक 'अनाम मालिक' की पहचान के साथ करने जा रही थी।
मिशन
इसलिए खास था अपोलो 11 मिशन
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी की ओर से अपोलो 11 मिशन 16 जुलाई, 1969 को केप कैनेडी से लॉन्च किया गया था।
इस मिशन के जरिए पहली बार किसी इंसान ने चांद की सतह पर कदम रखा था और लोकप्रिय अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग इसके कमांडर थे।
आठ दिन लंबे इस मिशन के बाद यात्री अपने साथ करीब 47 पाउंड की मून रॉक लेकर आए थे, जिससे चांद की मिट्टी और बनावट से जुड़े प्रयोग किए जा सकें।
प्रयोग
इस महत्वपूर्ण प्रयोग का हिस्सा बने कॉकरोच
यूनिवर्सिटी ऑफ मिनिसोटा में रिसर्चर मैरिऑन ब्रूक्स ने इन कॉकरोच को मूनडस्ट खिलाकर जानना चाहा कि चांद की मिट्टी में किसी तरह का जहरीला तत्व तो नहीं है।
अक्टूबर, 1969 में उन्होंने एक पेपर को बताया कि उन्हें मिट्टी में किसी जहरीले या संक्रामक तत्व की मौजूदगी से जुड़े कोई सबूत नहीं मिले।
ब्रूक्स की साल 2007 में मृत्यु हो गई और कॉकरोच या मूनडस्ट कभी NASA तक वापस नहीं पहुंचे।
साल 2010 में उनकी बेटी ने इन्हें बेच दिया।
जानकारी
न्यूजबाइट्स प्लस
अंतरिक्ष वैज्ञानिक शुरू से ही जानवरों के साथ अलग-अलग तरह के प्रयोग करते रहे हैं। नवंबर, 1957 में स्पुतनिक 2 के जरिए भेजी गई लाइका नाम की कुतिया धरती के चारों ओर ऑर्बिटल फ्लाइट का हिस्सा बनने वाला पहला जानवर बनी थी।
राहत
फिलहाल रोक दी गई है नीलामी
NASA की मांग पर फिलहाल नीलामी रोक दी गई है, लेकिन इन आइटम्स का क्या होगा इसपर कुछ नहीं कहा गया है।
माना जा रहा है कि फेडरल प्रॉपर्टी होने के चलते NASA इन्हें जब्त कर सकती है।
हालांकि, अगर मौजूदा ओनर ने इनके लिए कीमत चुकाई है, तो वह इसे अपने पास रख सकता है।
अंतरिक्ष एजेंसी और मौजूदा ओनर को साथ मिलकर तय करना होगा कि इन्हें आगे किसी तरह की नीलामी का हिस्सा ना बनाया जाए।