
गूगल और फेसबुक समाचार कंपनियों को देंगी कमाई का हिस्सा, IT कानून में बदलाव जल्द
क्या है खबर?
समाचार कंपनियों और डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स के लिए राहत देने वाला कदम उठाते हुए भारत सरकार मौजूदा नियमों में बदलाव करने वाली है।
इस बदलाव के बाद टेक कंपनियों को उनके प्लेटफॉर्म्स पर डिजिटल कंटेंट दिखाने के बदले इन पब्लिशर्स को भुगतान करना होगा और कमाई में से उनका हिस्सा देना होगा।
सरकार के हस्तक्षेप के बाद गूगल, मेटा, ट्विटर और अमेजन जैसी कंपनियां भारतीय समाचार पत्रों और डिजिटल मीडिया संगठनों को ओरिजनल कंटेंट के बदले कमाई का हिस्सा देंगी।
सुधार
कई देशों में बनाए गए हैं ऐसे नियम
डिजिटल न्यूज से जुड़े जिन प्लेटफॉर्म्स को अब भुगतान करना होगा, उनपर जाकर रीडर्स अलग-अलग न्यूज मीडिया वेबसाइट्स का कंटेंट पढ़ सकते हैं।
पिछले कई साल से इसपर चर्चा तेज हुई कि गूगल और मेटा जैसी कंपनियों ने न्यूज बिजनेस और पब्लिशर्स को कैसे प्रभावित किया है।
ऑस्ट्रेलिया के बाद इस साल की शुरुआत में कनाडा की सरकार भी नया नियम लेकर आई है, जिसमें गूगल और फेसबुक से रेवन्यू शेयर करने को कहा गया है।
वजह
मौजूदा कानून में बदलाव क्यों कर रही है सरकार?
कानून में बदलाव की जरूरत इसलिए महसूस हुई क्योंकि गूगल और फेसबुक जैसी कंपनियां जहां मीडिया हाउसेज की ओर से पब्लिश किए गए कंटेंट की मदद से कमाई करती हैं, इन कंपनियों को ठीक से उनका हिस्सा नहीं मिलता।
खासकर नए पब्लिशर्स के लिए इन कंपनियों के रेवन्यू मॉडल्स इस तरह तैयार किए गए हैं, जो पब्लिशर्स के बजाय उनका ज्यादा फायदा देखते हैं।
नए सुधार के साथ इस स्थिति में बदलाव देखने को मिलेगा और पब्लिशर्स की कमाई बढ़ेगी।
शिकायत
DNPA की शिकायत के बाद उठाया गया कदम
भारत सरकार ने दिसंबर, 2021 में कहा था कि उसकी टेक कंपनियों को न्यूज कंटेंट के बदले स्थानीय पब्लिशर्स को भुगतान करने के लिए बाध्य करने की कोई योजना नहीं है।
हालांकि, डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) की शिकायत के बाद कॉम्पिटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) ने इस साल न्यूज इंडस्ट्री में गूगल की पोजीशन की जांच करने के आदेश दिए थे।
जांच के बाद सामने आया कि डिजिटल पब्लिशर्स को उनकी कमाई का सही हिस्सा नहीं मिल रहा है।
जांच
कमाई का सही हिस्सा नहीं दे रही थी गूगल
भारत के कुछ बड़े मीडिया आउटलेट्स की अंब्रेला बॉडी DNPA ने कहा कि गूगल ने विज्ञापनों की मदद से होने वाली उसकी कमाई का सही हिस्सा मेंबर्स को देने से इनकार किया है।
DNPA ने आरोप लगाया कि न्यूज वेबसाइट्स पर आने वाला 50 प्रतिशत से ज्यादा ट्रैफिक गूगल के जरिए ही आता है।
हालांकि, गूगल और उसका एल्गोरिदम तय करते हैं कि किस न्यूज वेबसाइट का लिंक और नाम सबसे ऊपर दिखाया जाएगा।
जानकारी
न्यूजबाइट्स प्लस
अगर आप समाचार कंपनियों की विज्ञापन के चलते होने वाली कमाई को प्रभावित नहीं करना चाहते तो इंटरनेट ब्राउजर में ऐड ब्लॉकर एक्सटेंशन का इस्तेमाल ना करें। आप समाचार कंपनियों का प्रीमियम पेड सब्सक्रिप्शन भी ले सकते हैं।
बाध्यता
टेक कंपनियों को माननी होगी सरकार की बात
ग्लोबल इंटरनेट कंपनियों ने अब तक भारत में रेवन्यू शेयरिंग जैसी मांग पर सहमति नहीं जताई है।
हालांकि, इससे पहले ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस जैसे देशों में कंपनियों को सरकार के फैसले के आगे झुकना पड़ा।
भारत सरकार बीते दो साल में सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही तय कर चुकी है और यही बात बाकी टेक कंपनियों पर लागू होगी।
देश में सेवाएं देने के लिए उन्हें सरकार की ओर से बनाए गए नियमों का पालन करना होगा।