
पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को झटका, दिग्गज नेता अश्विनी कुमार का पार्टी से इस्तीफा
क्या है खबर?
पंजाब में आगामी 20 फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी कांग्रेस को बड़ा झटका लगा।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री अश्विनी कुमार ने मंगलवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।
कुमार पिछले चार दशकों से पार्टी के साथ जुड़े हुए थे और उन्हें अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी का सबसे करीबी और वफादार नेता माना जाता था।
ऐसे में उनका अचानक पार्टी से इस्तीफा देना कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है।
बयान
पीड़ा देने वाला था कांग्रेस छोड़ने का निर्णय- कुमार
कुमार ने सोनिया गांधी को अपना इस्तीफा भेजकर कहा, "मैं कांग्रेस पार्टी के बाहर रहकर देश की बेहतर तरीके से सेवा कर सकता हूं इसलिए मैं पार्टी से इस्तीफा दे रहा हूं। मैं सोनिया गांधी को अतीत में उनके "विचारों" के लिए धन्यवाद देता हूं और उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता हूं।"
उन्होंने कहा, "कांग्रेस छोड़ने का निर्णय पीड़ा देने वाला था, लेकिन पार्टी अब राष्ट्रीय उम्मीदों का चेहरा नहीं रही और परिवर्तनकारी नेतृत्व का वादा नहीं करती है।"
संदेश
"कांग्रेस को सामूहिक नेतृत्व संरचना को अस्तित्व में लाना होगा"
उन्होंने द इंडियन एक्सप्रेस से कहा, "सोनिया गांधी के फैसलों का अब कोई महत्व नहीं रहा है। ऐसे में कांग्रेस को सामूहिक नेतृत्व संरचना को अस्तित्व में लाने के लिए सख्त निर्णय करने जरूरत है। जिसमें वरिष्ठता और योग्यता को उचित सम्मान मिले और बड़ों को उनकी गरिमा से वंचित नहीं किया जाए।"
उन्होंने कहा, "कांग्रेस की आंतरिक सोच ने अन्य नेताओं का महत्व कम किया है और यही पार्टी के कमजारे होने का सबसे बड़ा कारण है।"
वोट
"वोट प्रतिशत में होती गिरावट दे रही स्पष्ट संदेश"
कुमार ने कहा, "कांग्रेस के वोट प्रतिशत में गिरावट लोकप्रिय समर्थन के मामले में स्पष्ट संदेश है कि पार्टी देश की सोच के साथ तालमेल नहीं बैठा रही है। एक राजनीतिक दल का कार्य है कि वह राष्ट्रीय मनोदशा का आकलन करे और जहां आवश्यक हो, इसे रूपांतरित करे।"
उन्होंने राहुल गांधी का नाम लिए बिना कहा, "राष्ट्रीय मूड उस विकल्प के पक्ष में नहीं है जिसे कांग्रेस अपने भविष्य के नेतृत्व के लिए लोगों के सामने पेश करती है।"
आलोचना
कुमार ने की अमरिंदर सिंह के साथ पार्टी के व्यवहार की आलोचना
कुमार ने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के साथ कांग्रेस के व्यवहार की भी आलोचना की।
उन्होंने कहा, "पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह को सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया था। यह उन सिद्धांतों के खिलाफ था जिनके लिए कांग्रेस हमेशा से खड़ी रही है।"
उन्होंने पंजाब में मुख्यमंत्री पद के लिए मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच खुली होड़ पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इससे पार्टी की खराब छवि सामने आई है।
संबंध
राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं कुमार
बता दें कि कुमार राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके दिवंगत पिता प्रबोध चंद्र एक स्वतंत्रता सेनानी और गुरदासपुर के कांग्रेस नेता थे। वह पंजाब में विधायक, मंत्री और स्पीकर रहे थे। कुमार साल 1976 में गुरदासपुर जिला कांग्रेस कमेटी के संयुक्त सचिव के रूप में कांग्रेस में शामिल हुए थे।
इसके बाद 1990 में उन्हें चंद्रशेखर सरकार द्वारा भारत का अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया गया था। उसके बाद वह चर्चा में आए थे।
राजनीति
साल 2002 में पंजाब से राज्यसभा पहुंचे थे कुमार
कुमार 2002 में पहली बार पंजाब से राज्यसभा सांसद चुने गए। इसके बाद 2004 और 2010 में भी उन्हें पंजाब से राज्यसभा के लिए चुना गया था।
वह 2006 में केंद्र में कांग्रेस सरकार के दौरान पहली बार मंत्रीमंडल में शामिल हुए थे। उन्हें वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय में औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग का प्रभार दिया गया था।
इसके बाद 2011 में उन्हें विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री और 2012 में केंद्रीय कानून मंत्री की जिम्मेदारी दी गई थी।
चुनाव
न्यूजबाइट्स प्लस (जानकारी)
117 विधानसभा सीटों वाले पंजाब में 20 फरवरी को एक चरण में चुनाव होगा और 10 मार्च को नतीजे घोषित किए जाएंगे।
पंजाब में कांग्रेस जहां अपना किला बचाने की कोशिश में है, वहीं आम आदमी पार्टी और अकाली दल पिछली हार को भूलकर सत्ता में आने के प्रयास कर रही हैं।
कांग्रेस से अलग होने के बाद अमरिंदर सिंह ने अपनी अलग पार्टी बनाई है और वो भाजपा के साथ मिलकर सत्ता की दावेदारी पेश कर रहे हैं।