
पंजाब और छत्तीसगढ़ के बाद राजस्थान की कांग्रेस सरकार भी लाई कृषि कानूनों के खिलाफ विधेयक
क्या है खबर?
पंजाब और छत्तीसगढ़ के बाद अब राजस्थान की कांग्रेस सरकार भी केंद्र सरकार के कृषि कानूनों को निष्प्रभावी करने के लिए विधेयक लेकर आई है।
आज राजस्थान विधानसभा के नए सत्र के पहले दिन राज्य के विधायी मामलों के मंत्री शांति धरीवाल ने इससे संबंधित तीन विधेयक पेश किए। विधानसभा से पारित होने के बाद इन विधेयकों को मंजूरी के जरिए राज्यपाल और फिर राज्यपाल के जरिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा।
नए विधेयक
ये हैं राजस्थान के तीन नए विधेयक
राजस्थान सरकार जो तीन विधेयक लेकर आई है, उनके नाम आवश्यक वस्तु (विशेष प्रावधान और राजस्थान संशोधन) विधेयक 2020, किसान उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन एवं सुविधा और राजस्थान संशोधन) विधेयक 2020 और मूल्य आश्वासन किसान (सशक्तीकरण और संरक्षण) समझौता और कृषि सेवाएं (राजस्थान संशोधन) विधेयक 2020 हैं।
इनके जरिए इन्हीं नामों से लाए गए केंद्रीय कानूनों के महत्वपूर्ण प्रावधानों में बदलाव किया गया है और विवादित प्रावधानों को निष्प्रभावी कर दिया गया है।
पृष्ठभूमि
क्या है कृषि विधेयकों का पूरा मुद्दा?
दरअसल, मोदी सरकार कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए तीन कानून लेकर लाई है जिनमें सरकारी मंडियों के बाहर खरीद के लिए व्यापारिक इलाके बनाने, अनुबंध खेती को मंजूरी देने और कई अनाजों और दालों की भंडार सीमा खत्म करने समेत कई प्रावधान किए गए हैं।
कई राज्यों, विशेषकर पंजाब और हरियाणा, के किसान इन कानूनों का जमकर विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इनके जरिए सरकार मंडियों और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से छुटकारा पाना चाहती है।
अपील
सोनिया गांधी ने कांग्रेस शासित राज्यों से की थी निष्प्रभावी करने वाले विधेयक लाने की अपील
इन कृषि कानूनों पर किसानों के गु्स्से को भुनाने के लिए कांग्रेस भी उनके साथ खड़ी हुई है और इन कानूनों का जबरदस्त विरोध कर रही है।
यहां पार्टी सांसद राहुल गांधी ने इन कानूनों के खिलाफ पंजाब और हरियाणा में बड़ी रैलियां की थीं, वहीं पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कांग्रेस शासित सभी राज्यों से केंद्र सरकार के इन कृषि कानूनों को निष्प्रभावी करने के लिए विधेयक लाने को कहा था।
विरोधी विधेयक
सोनिया की अपील के बाद पहले पंजाब और फिर छत्तीसगढ़ सरकार लाई विधेयक
सोनिया की अपील के बाद पंजाब सरकार इन कृषि कानूनों को निष्प्रभावी करने के लिए तीन संशोधन विधेयक और एक नया विधेयक लेकर आई।
इन विधेयकों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम कीमत पर गेंहू और धान की खरीद और बिक्री पर प्रतिबंध भी लगाया गया है। ये विधेयक पंजाब विधानसभा से पारित हो चुके हैं।
इसके बाद छत्तीसगढ़ सरकार छत्तीसगढ़ कृषि उपज मंडी (संशोधन) विधेयक लेकर आई जिसमें पूरे राज्य को कृषि बाजार घोषित कर दिया गया है।
जानकारी
अशोक गहलोत ने किया था विधेयक लाने का ऐलान
पंजाब के कृषि कानूनों के विरोध में विधेयक लाने के बाद राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी उसके नक्शे-कदम पर चलते हुए ऐसे ही विधेयक लाने का ऐलान किया था और अब उनकी सरकार ने ये विधेयक ले आई है।
आगे क्या?
आसान नहीं आगे की राह, लेनी होगी राष्ट्रपति की मंजूरी
हालांकि कृषि कानूनों के विरोध में विधेयक लाए इन तीनों ही राज्यों की आगे की राह आसान नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 254(2) के अनुसार, राज्य समवर्ती सूची में आने वाले विषयों पर बने केंद्र सरकार के कानूनों में बदलाव तो कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें राष्ट्रपति की मंजूरी लेनी होती है।
राज्यों को अपने विधेयक राज्यपाल के जरिए राष्ट्रपति के पास भेजने होते हैं जो गृह मंत्रालय की राय जानने के बाद इन पर फैसला लेते हैं।