
जानिए क्यों महत्वपूर्ण है फोलिक एसिड और इसके लिए किन खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए
क्या है खबर?
शरीर को स्वस्थ रखने में पोषक तत्वों की संतुलित मात्रा अहम भूमिका निभाती है। इन्हीं पोषक तत्वों में से एक है फोलिक एसिड।
फोलिक एसिड को फोलेट और विटामिन-B9 भी कहा जा सकता है।
यह पोषक तत्व शरीर की कोशिकाओं को स्वस्थ रखने में काफी मदद करता है। इसी कारण फोलिक एसिड हमारे शरीर के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
चलिए फिर जानते हैं कि फोलिक एसिड पाने के लिए आपको किन खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए।
#1
ब्रोकली
ब्रोकली फूलगोभी की तरह दिखने वाली हरे रंग की पौष्टिक सब्जी होती है।
ब्रोकली में फोलिक एसिड के साथ-साथ प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, कैल्शियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम और फास्फोरस जैसे कई तरह के पोषक तत्व मौजूद होते हैं।
100 ग्राम ब्रोकली में लगभग 63 माइक्रोग्राम फोलिक एसिड मौजूद होता है।
ब्रोकली के फायदों की बात की जाए तो इसका सेवन कई तरह से शरीर को सुरक्षा प्रदान करने में सहयोगी है।
#2
राजमा
राजमा को डाइट में शामिल करने से हृदय रोगों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है, क्योंकि ये अच्छे कोलेस्ट्रॉल को प्रभावित किए बिना ही खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में सक्षम हैं।
खराब कोलेस्ट्रोल हृदय की समस्याओं के साथ-साथ कई अन्य बीमारियों का भी कारण बन सकता है और राजमा आपको इन सभी समस्याओं से बचाता है।
बता दें कि 100 ग्राम राजमा में लगभग 394 माइक्रोग्राम फोलिक एसिड मौजूद होता है।
#3
बादाम
सूखे मेवे आकार में भले ही छोटे होते हैं, लेकिन इनमें पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।
इसी श्रेणी में बादाम भी शामिल हैं जिसमें फोलिक एसिड भरपूर मात्रा में पाया जाता है।
100 ग्राम बादाम के सेवन से शरीर को लगभग 44 माइक्रोग्राम फोलिक एसिड मिल सकता है।
इसके सेवन से कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रण में रखा जा सकता है। इसके अलाव, यह चयापचय सिंड्रोम और टाइप- 2 मधुमेह से राहत दिलाने में भी मदद कर सकता है।
#4
एवोकाडो
एवोकाडो को यूं ही सुपर फूड नहीं कहा जाता और इसमें अच्छी मात्रा में फोलिक एसिड के साथ-साथ फाइबर, विटामिन-A, विटामिन-C, विटामिन-E, विटामिन-K और मैग्नीशियम जैसे कई तरह के पोषक तत्व भी शामिल होते हैं।
100 ग्राम एवोकाडो में लगभग 81 माइक्रोग्राम फोलिक एसिड होता है।
एक शोध के अनुसार, एवोकाडो का सेवन करने से मोटापा, चयापचय सिंड्रोम, कोलेस्ट्रॉल और हृदय संबंधी जोखिमों से दूरी बनी रहती है।