
#NewsBytesExplainer: क्या है जीका वायरस, जिसकी वजह से कर्नाटक में हाई अलर्ट घोषित किया गया?
क्या है खबर?
कर्नाटक के चिक्काबल्लापुर जिले में एक मरीज के जीका वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने राज्य में अलर्ट जारी किया है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, राज्य भर में एकत्र किए गए संभावित संक्रमित मरीजों के 100 नमूनों में से 6 चिक्काबल्लापुर से लिए गए थे। इन नमूनों में से एक मरीज में वायरस की पुष्टि हुई है।
आइए जानते हैं कि जीका वायरस क्या है और इसके संक्रमण के लक्षण क्या है।
जीका
क्या है जीका वायरस?
जीका वायरस मुख्यत: एडीज मच्छरों के काटने से फैलता है, जो डेंगू और चिकनगुनिया भी फैलाते हैं।
ये वायरस फ्लेविविरिडी वायरस फैमिली से आता है, जो पहली बार 1947 में युगांडा के जीका जंगल के बंदरों में पाया गया था। इसके कारण ही इस वायरस का नाम 'जीका' रखा गया।
इंसानों में इसका पहला मामला 1952 में सामने आया, जिसके बाद से इसका प्रकोप अफ्रीका समेत एशिया और प्रशांत क्षेत्र के कई देशों में भी देखने को मिला है।
वायरस
मच्छरों के अलावा और कैसे फैल सकता है जीका वायरस ?
अमेरिकी रोग नियंत्रण केंद्र (CDC) के अनुसार, जीका वायरस 4 तरीके से फैल सकता है। मुख्य तौर पर ये वायरस एडीज मच्छरों के जरिए ही फैलता है।
इसके अलावा ये वायरस गर्भवती महिलाओं से उनके अजन्मे बच्चों में भी फैल सकता है। जीका वायरस संक्रमित व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध बनाने या संक्रमित व्यक्ति का खून चढ़ाने से भी फैल सकता है।
हालांकि, वैज्ञानिकों ने खून के जरिए इसके फैलने की अभी पूरी तरह पुष्टि नहीं की है।
लक्षण
क्या हैं जीका वायरस से संक्रमण के लक्षण?
जीका वायरस से संक्रमण के लक्षणों में बुखार, त्वचा पर चकत्ते, आंख आना, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, अस्वस्थता और सिरर्द शामिल हैं।
किसी व्यक्ति के संक्रमित होने पर ये लक्षण कुछ दिन से लेकर एक हफ्ते तक रह सकते हैं।
इसके अलावा अधिकांश मामलों में संक्रमण के कोई लक्षण नहीं दिखते या हल्के लक्षण दिखते हैं। इससे संक्रमित ज्यादातर लोगों को अस्पताल जाने की जरूरत नहीं पड़ती और वो 7 दिन में खुद से ठीक हो जाते हैं।
वायरस
वायरस से संक्रमित होने से बाद किसे सबसे अधिक खतरा?
जीका वायरस की संक्रमण की मृत्यु दर बहुत कम है, लेकिन इससे गर्भवती महिलाओं को खतरा है। उनके संक्रमित होने पर गर्भ में पल रहे बच्चे को माइक्रोसेफली जैसी मानसिक समस्या हो सकती है।
माइक्रोसेफेली एक ऐसी स्थिति है, जिसमें बच्चे के दिमाग का पूरा विकास नहीं हो पता या विकास रुक जाता है।
कुछ संक्रमितों में तंत्रिका विकार से संबंधित एक दुर्लभ सिंड्रोम भी देखा गया है, जो मांसपेशियों में कमजोरी और पक्षाघात का कारण बन सकता है।
भारत
देश में पहली बार कब सामने आए थे जीका वायरस के मामले?
देश में पहली बार 2016-17 में गुजरात के अहमदाबाद में जीका वायरस के मामले मिले थे। 2021 में केरल में 14 लोगों के जीका से संक्रमित होने की पुष्टि हुई थी।
पिछले साल दिसंबर में कर्नाटक में एक 5 साल की बच्ची में संक्रमण की पुष्टि हुई थी। इसी साल पुणे में भी बावधन क्षेत्र में 67 वर्षीय बुजुर्ग में जीका वायरस पाया गया था।
इसके अलावा केरल और उत्तर प्रदेश में भी जीका वायरस के मरीज सामने आए थे।
जानकारी
वायरस से संक्रमित होने से कैसे बचें?
जीका वायरस से बचाव के लिए मच्छरों के काटने से बचें और शरीर का अधिकतम हिस्सा ढक कर रखें। इसके अलावा सोते समय मच्छरदानी या मच्छरों को मारने के लिए बाजार में उपलब्ध उत्पादों का इस्तेमाल करें। घर में आसपास पानी इकट्ठा न होने दें।