
क्या है तबलीगी जमात और यह अब चर्चा में क्यों है?
क्या है खबर?
देश में फिलहाल दो नामों की बहुत चर्चा है। इनमें से एक कोरोना वायसस और दूसरा तबलीगी जमात है। जब ये दोनों नाम आपस में जुड़े तो यह चर्चा शुरू हुई।
दरअसल, दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज में तबलीगी जमात का कार्यक्रम हुआ था। इनमें से कुछ लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं और कईयों की मौत हो गई है।
इसके बाद से हर किसी की जुबान पर तबलीगी जमात का नाम है।
तबलीगी जमात
आइये तबलीगी जमात का मतलब जानते हैं
सबसे पहले तबलीगी का मतलब जानते हैं। इसका मतलब अल्लाह की कही बातें का प्रचार और जमात का मतलब लोग या समूह होता है।
इस तरह तबलीगी जमात का मतलब अल्लाह की कही बातों का प्रचार करने वाले लोग होते हैं। इससे जुड़े लोग पारंपरिक इस्लाम को मानते हैं।
इसकी शुरुआत आजादी से पहले 1926 में इस्लामी वि्दवान मौलाना मोहम्मद इलियास ने की थी। इसका मुख्यालय दिल्ली में स्थित है।
वहीं मरकज का मतलब बैठक की जगह होता है।
तबलीगी जमात
इसकी शुरुआत क्यों हुई थी?
बताया जाता है कि मुगल काल में कई लोगों ने इस्लाम कबूल किया था, लेकिन वो हिंदू परंपराओं और रीति-रिवाजों का पालन कर रहे थे।
इसी बीच आर्य समाजियों ने उन्हें दोबारा हिंदू बनाने का शुद्धिकरण अभियान शुरू किया, जिसके बाद मौलाना इलियास ने उन लोगों को इस्लाम की शिक्षा देने का काम शुरू किया।
इसके लिए उन्होंने दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मस्जिद में कुछ लोगों के साथ मिलकर तबलीगी जमात की शुरुआत की।
प्रभाव
भारतीय उप महाद्वीप में काफी प्रभावशाली है तबलीगी जमात
मौलाना इलियास यहां से पहली पहली जमात हरियाणा के नूंह कस्बे में लेकर गए थे। वहां उन्होंने मेवाती समुदाय के लोगों को नमाज, कलमा और इस्लामी शिक्षा सिखाने पर जोर दिया।
कलिमा, सलात, इल्म, इक्राम-ए-मुस्लिम, इख्लास-ए-निय्यत, दावत-ओ-तबलीग इस जमात के छह उसूल हैं। इन्हीं उद्देश्यों के साथ इस जमात से जुड़े लोग दुनियाभर के मुस्लिमों में जाकर इस्लाम का प्रचार-प्रसार करते हैं।
भारतीय उप महाद्वीप में यह काफी प्रभावशाली है।
तबलीगी जमात
आजादी से पहले हुआ था पहला जलसा
मरकज से जमातें निकलकर अलग-अलग हिस्सों में जाती हैं और लोगों को मस्जिदों में जाने की अपील करते हैं। इनका ज्यादा जोर नमाज पढ़ने और रोजा रखने पर होता है।
तबलीगी जमात का पहला जलसा 1941 में भारत में हुआ था, जिसमें हजारों लोगों ने हिस्सा लिया था। धीरे-धीरे यह दुनिया के कई देशों में फैल गया।
अब हर साल तबलीगी जमात एक बड़ा कार्यक्रम करती है, जिसे इज्तेमा कहते हैं। इसमें लाखों मुसलमान भाग लेते हैं।
मौजूदा हालात
अब यह चर्चा में क्यों है?
13-15 मार्च को निजामुद्दीन स्थित मरकज में तबलीगी जमात का कार्यक्रम था। इसमें शामिल होने वाले कुछ लोगों ने अपनी विदेश यात्राओं की जानकारी नहीं दी।
कार्यक्रम के खत्म होने के बाद भी लगभग 1,400 लोग यहां रुके रहे। वहीं इसमें शामिल होकर घर लौटे कुछ लोगों में कोरोना वायरस के संक्रमण की पुष्टि हुई थी।
मंगलवार को यहां से सैंकड़ों लोगों को निकालकर अस्पतालों और आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया है ताकि संक्रमण से बचा जा सके।
कार्रवाई
आयोजकों के खिलाफ मामला
शुरूआती जांच में सामने आया है कि जिन 281 विदेशी नागरिकों ने इस समारोह में हिस्सा लिया और जो मस्जिद में रह रहे थे, उन्होंने वीजा नियमों का उल्लंघन किया है।
इंडोनेशिया, बांग्लादेश, म्यांमार, मलेशिया, श्रीलंका और किर्गिस्तान समेत 21 देशों के लोगों ने इस समारोह में हिस्सा लिया।
दिल्ली सरकार ने इसके आयोजकों के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया है।
साथ ही देशभर में कार्यक्रम में भाग लेने वाले लोगों की तलाश तेज हो गई है।