
#NewsBytesExplainer: क्या है ज्ञानवापी स्थित 'व्यास जी के तहखाने' का इतिहास, जहां पूजा की अनुमति मिली?
क्या है खबर?
ज्ञानवापी मस्जिद मामले में 31 जनवरी को वाराणसी की कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। वाराणसी जिला कोर्ट ने हिंदू पक्ष को ज्ञानवापी परिसर में मौजूद व्यास जी के तहखाने में पूजा करने की अनुमति दे दी है।
इसके बाद गुरुवार रात में ही व्यास परिवार ने करीब 30 साल बाद तहखाने में पूजा-अर्चना की।
आइए जानते हैं कि ये व्यास जी का तहखाना क्या है और इसका क्या इतिहास है।
तहखाना
क्या है व्यास जी का तहखाना?
दरअसल, ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में 4 तहखाने हैं। इनमें से एक अभी व्यास परिवार के कब्जे में है, जो यहां सालों से पूजा करते आ रहा है।
ये तहखाना ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में दक्षिण में स्थित है। इसकी ऊंचाई करीब 7 फुट और क्षेत्रफल 40 वर्ग फुट है। इसके ठीक सामने नंदी की मूर्ति है।
ये तहखाना करीब 30 सालों से बंद है। यहां 1993 से पहले पूजा हुआ करती थी।
नाम
कैसे पड़ा तहखाने का नाम?
हिंदू पक्ष के मुताबिक, व्यास परिवार 2 शताब्दियों से तहखाने के अंदर पूजा कर रहा था। ब्रिटिश शासन के दौरान भी परिवार को तहखाने का नियंत्रण प्राप्त था।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा, "1819 में दंगों के बाद ब्रिटिश प्रशासन ने ज्ञानवापी मस्जिद के कुछ हिस्सों का नियंत्रण हिंदुओं को दे दिया था। मंदिर के पास रहने वाले व्यास परिवार ने तब तहखाने में पूजा करना शुरू की। इसी आधार पर इसका नाम व्यास जी का तहखाना पड़ गया।"
पूजा
तहखाने में क्यों बंद की गई थी पूजा?
आजादी के बाद भी व्यास परिवार तहखाने में पूजा करता था। हालांकि, 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया।
इसके अगले साल यानी 1993 में राज्य में मुलायम सिंह यादव की सरकार बनी। 1993 में मुलायम सरकार ने सुरक्षा स्थितियों का हवाला देते हुए मौखिक आदेश के जरिए तहखाने में पूजा बंद करवा दी थी। यहां मौजूद पुजारियों को भी हटा दिया गया था।
फैसला
किसने की थी तहखाने में पूजा की मांग?
तहखाने में दोबारा पूजा शुरू किए जाने को लेकर व्यास परिवार के शैलेंद्र कुमार पाठक ने याचिका दायर की थी। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के सर्वे के दौरान भी तहखाने की साफ-सफाई हुई थी।
17 जनवरी को व्यास जी के तहखाने को जिला प्रशासन ने अपने कब्जे में ले लिया था। इसके बाद 31 जनवरी को फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने हिंदू पक्ष को तहखाने में पूजा का अधिकार दे दिया।
श्रृंगार गौरी
क्या श्रृंगार गौरी मामले से अलग है तहखाने का मामला?
अगस्त, 2021 में 5 महिलाओं ने याचिका दायर कर ज्ञानवापी मस्जिद के बगल में बने श्रृंगार गौरी मंदिर में रोजाना पूजन-दर्शन की मांग की थी।
इस याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने परिसर के ASI सर्वे का आदेश दिया था।
इसी परिसर में तहखाना भी मौजूद है, इसलिए तहखाने का सर्वे भी हुआ था।
हालांकि, फिलहाल जिस मामले में तहखाने में पूजा की अनुमति मिली है, वो श्रृंगार गौरी से अलग है।
दावा
तहखाने पर हिंदू पक्ष का क्या है दावा?
सोमनाथ व्यास ने 1991 में तहखाने की जमीन पर मालिकाना हक के लिए एक मूल वाद दाखिल किया था। व्यास का दावा था कि तहखाना, मंदिर और उसकी जमीन उनके कब्जे में है।
उन्होंने कहा था कि हिंदू यहां पूजा करते हैं और इसे आदि विश्वेश्वर का मंदिर मान परिक्रमा भी करते हैं।
2000 में सोमनाथ व्यास के निधन के बाद उनके वकील विजय शंकर रस्तोगी स्वयंभू भगवान आदि विश्वेश्वर के सखा बन कर मुकदमा लड़ रहे हैं।
प्रतिक्रियाएं
मामले पर किस पक्ष ने क्या कहा?
फैसले को हिंदू पक्ष ने ऐतिहासिक बताया है तो मुस्लिम पक्ष ने निराशा जाहिर की है।
आज मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जहां से उन्हें हाई कोर्ट जाने को कहा गया है।
मस्जिद समिति के वकील अखलाक अहमद ने कहा, "आदेश में 2022 की एडवोकेट कमिश्नर रिपोर्ट, ASI रिपोर्ट और 1937 के फैसले को नजरअंदाज किया गया है। हिंदू पक्ष ने इस बात का कोई सबूत नहीं दिया कि 1993 से पहले प्रार्थनाएं होती थीं।"