
तेल के दामों में फिर इजाफा, सात शहरों में पेट्रोल की कीमत 110 रुपये से पार
क्या है खबर?
देश में पेट्रोल और डीजल के दामों में लगातार बढ़ोतरी जारी है। शनिवार को लगातार चौथे दिन तेल की कीमतों देखने को मिली।
राजधानी दिल्ली में 35 पैसे की बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल 107.24 रुपये और डीजल 95.97 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। मुंबई की बात करें तो यहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत 113.12 रुपये और डीजल की 104 रुपये है।
देश के सात शहर ऐसे हैं, जहां पेट्रोल 110 रुपये प्रति लीटर से महंगा है।
तेल की कीमतें
सितंबर के बाद से जारी है इजाफा
सितंबर के बाद से 19 बार पेट्रोल और 22 बार डीजल के दाम बढ़े हैं। इस कारण 24 सितंबर के बाद पेट्रोल 5.7 रुपये प्रति लीटर और डीजल 7 रुपये प्रति लीटर महंगा हो गया है।
इससे पहले 4 मई से 17 जुलाई के बीच पेट्रोल के दाम 11.44 रुपये और डीजल के दाम 9.14 रुपये प्रति लीटर बढ़े थे।
सरकार तेल आयातक देशों से बात कर रही है, लेकिन लोगों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।
कीमत
इन सात शहरों में पेट्रोल 110 रुपये लीटर से भी महंगा
राजस्थान के गंगानगर में तेल की कीमतें सबसे ज्यादा है। यहां पेट्रोल 119.42 और डीजल 110.26 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है।
दूसरे स्थान पर भोपाल है, जहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत 115.90 और डीजल की 105.27 रुपये है।
जयपुर में पेट्रोल 114.48 और डीजल 105.71 रुपये, मुंबई में पेट्रोल 113.12 और डीजल 104 रुपये, हैदराबाद में 111.55 रुपये और 104.70 रुपये, बेंगलुरू में 110.98 और 101.86 रुपये, पटना में 110.87 और 102.57 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है।
महंगाई
रिकॉर्ड स्तर पर है तेल की कीमतें
रोजाना होती बढ़ोतरी ने देश में तेल की कीमतों को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है। देश के अधिकतर बड़े शहरों में पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर से पार पहुंच चुकी है तो करीब एक दर्जन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में डीजल भी 100 का आंकड़ा पार कर चुका है।
तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से सामानों की आवाजाही महंगी हो गई है, जिससे सीधे तौर पर आम लोगों की जेब पर भार बढ़ रहा है।
वजह
क्यों बढ़ रहे हैं तेल के दाम?
भारत में पेट्रोल-डीजल की आसमान छूती कीमतों की बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का महंगा होना है।
एक महीने पहले तक इसकी कीमत 73.51 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अब बढ़कर 84.8 डॉलर हो गई है। सात सालों में पहली बार कीमत इस स्तर पर पहुंची है।
इसके अलावा सरकारों की तरफ से टैक्स की ऊंची दरें भी लोगों की जेब खाली कर रही है। विपक्षी पार्टियां और लोग लगातार कीमतें कम करने की मांग कर रहे हैं।