
कोरोना वायरस के खिलाफ भारत का नेतृत्व कर रहा ICMR क्या-क्या काम करता है?
क्या है खबर?
पूरी दुनिया कोरोना वायरस से जूझ रही है और देश में भी संक्रमण के मामले बढ़ते जा रहे हैं।
स्वास्थ्यकर्मी मरीजों को ठीक करने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। वहीं टेस्टिंग और वैक्सीन से संबंधित रिसर्च के बारे में आए दिन खबरें आती हैं, जिनमें आप अक्सर भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) का जिक्र सुनते हैं।
क्या आपको पता है कि ICMR क्या है? अगर आप इसके बारे में कुछ नहीं जानते हैं तो यह लेख पढ़ें।
ICMR
क्या है ICMR?
ICMR पूरी दुनिया की सबसे पुरानी और बड़ी मेडिकल रिसर्च बॉडीज में से एक है।
भारत सरकार ने सन 1911 में देश में मेडिकल रिसर्च को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इंडियन रिसर्च फंड एसोसिएशन (IRFA) की स्थापना की थी।
आजादी के बाद IRFA की गतिविधियों में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए। जिसके बाद 1949 से इसे इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के नाम से जाना जाने लगा।
यह स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा वित्त पोषित है।
काम
क्या हैं इसके काम?
काउंसिल रिसर्च के जरिए देश के लोगों का स्वास्थ्य बेहतर करने और इलाज के तरीके ढूंढने का काम करता है।
इसके साथ ही इसका काम समाज की स्वास्थ्य समस्याओं पर रिसर्च करना, मॉडर्न बॉयोलॉजी टूल्स, बीमारियों से बचाव के लिए डायग्नोस्टिक्स, इलाज और वैक्सीन को बढ़ावा देने और देश के मेडिकल कॉलेजों और हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट्स में रिसर्च को डेवलप करना होता है।
बता दें कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ही इसके अध्यक्ष होते हैं।
जानकारी
बलराम भार्गव हैं ICMR के मौजूदा डायरेक्टर जनरल
पद्म श्री से सम्मानित प्रोफेसर बलराम भार्गव ICMR के डायरेक्टर जनरल हैं। वहीं डाक्टर जी एस तोतेजा एडीशनल डायरेक्टर जनरल, डॉक्टर जी एस जी अयंगर सीनियर ड्यूटी डायरेक्टर जनरल और श्री राजीव रॉय इसके सीनियर फाइनेंस एडवाइजर हैं।
रिसर्च
कई बीमारियों पर कर चुका है रिसर्च
ICMR के देशभर में 21 परमानेंट रिसर्च सेंटर हैं जहां कोरोना वायरस, रोटा वायरस, डेंगू, इबोला, इन्फ्लुएंजा, जापानी इंसेफेलाइटिस, एड्स, मलेरिया, कालाजार जैसी कई संक्रामक बीमारियों पर रिसर्च की जाती है।
इतना ही नहीं टीबी, कुष्ठ, डायरिया जैसी बीमारियों पर भी यहां रिसर्च की जा चुकी है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ICMR के छह रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर्स स्थानीय स्वास्थ्य समस्याओं को हल करने पर फोकस करते हैं।
कोरोना वायरस
कोरोना वायरस लड़ाई में कैसे कर रहा मदद?
देश में कई प्रयोगशालाएं कोरोना वायरस का टेस्ट कर रही हैं और उन्हें इसकी अनुमति ICMR द्वारा दी गई है। काउंसिल ने ही टेस्टिंग, क्वारंटीन और मरीजों की देखभाल के लिए कई गाइडलाइंस जारी की हैं।
यह मरीजों के डाटा के आधार पर आगे की स्ट्रेटजी तैयार करता है। यह लगातार कोरोना वायरस पर रिसर्च कर रहा है ताकि इसकी वैक्सीन तैयार की जा सके।
इसने ही देश में कोरोना वायरस की पूल टेस्टिंग को अनुमति दी थी।
NVI
सबसे पहले NIV ने किया था कोरोना वायरस का टेस्ट
पुणे की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) ICMR का ही एक हिस्सा है, जिसने भारत में सबसे पहले कोरोना वायरस का टेस्ट किया था।
इसने कोरोना वायरस की एंटीबॉडी का पता लगाने के लिए एक Anti-SARS-CoV-2 Human IgG ELISA टेस्ट किट भी डेवलप की थी।
इतना ही नहीं इसने कोरोना वायरस पर दवाओं का ट्रायल भी किया। NIV की मदद से कोरोना वायरस से लड़ने में देश को काफी मदद मिली है।
जानकारी
अभी तक इतने लोग हो चुके संक्रमित
देश में अभी तक 1,65,799 लोग कोरोना वायरस से संक्रिमत हो चुके हैं। जिसमें से 89,987 एक्टिव केस हैं, 71,105 लोग सही हो चुके हैं और 4,706 लोगों की इससे मौत हो चुकी है। अभी देश में 31 मई तक लॉकडाउन 4.0 लागू है।