
भारत में लोगों को फिर से मिलने लगा है रोजगार, बेरोजगारी दर घटकर 8.5% पर पहुंची
क्या है खबर?
कोरोना महामारी के कारण दो महीने से अधिक तक चले लॉकडाउन के बाद भारत के अनलॉक होते ही अर्थव्यवस्था में सुधार होता नजर आ रहा है।
इसका कारण है कि जून के तीसरे सप्ताह में बेरोजगारी दर में आश्चर्यजनक रूप से कमी आई है।
सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के थिंक टैंक के सर्वेक्षण के अनुसार देश की बेरोजगारी दर 21 जून को समाप्त हुए सप्ताह में लॉकडाउन से पहले के स्तर यानी 8.5% पर पहुंच गई है।
लॉकडाउन
कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए मार्च में लागू किया था लॉकडाउन
कोरोना वायरस के तेजी से प्रसार को रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 मार्च से देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा कर दी थीं।
इसमें आवश्यक सेवाओं को छोड़कर ट्रेन, बस, उड़ानें, बाजार और कार्यालय सब को बंद कर दिया था। इसके बाद लॉकडाउन को चार बार आगे बढ़ा दिया गया और हर बार थोड़ी-थोड़ी छूट दी गई।
एक जून से अनलॉक की शुरुआत के बाद अधिकतर पाबंदियों को खत्म कर दिया गया। इससे अर्थव्यवस्था में सुधार देखा गया।
पलायन
प्रवासी मजदूरों के पलायन से अर्थव्यवस्था के पटरी पर लौटने में आ रही परेशानी
सरकार की ओर से अनलॉक लागू करने के बाद भी अर्थव्यवस्था के पटरी पर लौटने के रास्ते में खासी परेशानी आ रही है।
इसका प्रमुख कारण है कि लॉकडाउन में अधिकर प्रवासी मजदूर अपने गृह राज्यों को लौट गए।
मजदूरों की बिगड़ी दशा के कारण केंद्र और राज्य सरकारों को आलोचना का भी सामना करना पड़ा था।
ऐसे में अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए प्रधानमंत्री ने 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज की घोषणा की थीं।
बेरोजगारी दर
तीन मई को समाप्त हुए सप्ताह में 27.1% पर पहुंच गई थी बेरोजगारी दर
CMIE के अनुसार 22 मार्च को देश मे बेरोजगारी दर 8.41 प्रतिशत थी, जो कोरोना महमारी के चलते लॉकडाउन में 5 अप्रैल को बढ़कर 23.38 प्रतिशत पर पहुंच गई थी।
इसके बाद दर 3 मई को बढ़कर 27.1 प्रतिशत पर पहुंच गई। इसके बाद जब अनलॉक चालू हुआ तो जून के पहले सप्ताह में यह दर 17.5 प्रतिशत, दूसरे में 11.6 प्रतिशत और अब तीसरे सप्ताह में गिरकर 8.5 प्रतिशत पर आ गई है। यह बड़ी राहत की बात है।
शहरी
शहरी बेरोजगारी दर में भी हुआ काफी सुधार
CMIE के अनुसार अनलॉक में शहरी बेरोजगारी दर में भी सुधार हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार 21 जून को समाप्त हुए सप्ताह में शहरी बेरोजगारी दर 11.2 प्रतिशत पर आ गई है।
यह अप्रैल-मई के उच्चतम स्तर 25.83 प्रतिशत से बहुत कम है। इसी तरह यह 13 सप्ताह की लॉकडाउन अवधि के दौरान औसत बेरोजगारी दर 23.18 प्रतिशत से भी कम है।
हालांकि, देश में लॉकडाउन लागू होने से पहले शहरी बेरोजगारी दर 9 प्रतिशत थी।
ग्रामीण भारत
ग्रामीण भारत की बेरोजगारी दर में हुआ सबसे अधिक सुधार
CMIE के CEO महेश व्यास ने बताया कि ग्रामीण भारत की बेरोजगारी दर में सबसे अधिक सुधार हुआ है और आने वाले समय भी यह सुधार जारी रहेगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी की दर 21 जून को समाप्त हुए सप्ताह में सुधरकर 7.26% तक पहुंच गई है।
22 मार्च को समाप्त हुए प्री-लॉकडाउन सप्ताह में यह दर 8.3% थी। उन्होंने कहा कि फरवरी और मार्च में औसत बेरोजगारी दर क्रमशः 7.34% और 8.4% थी।
जानकारी
ग्रामीण बेरोजगारी दर के सुधार में मनरेगा ने निभाई अहम भूमिका
व्यास ने कहा कि अनलॉक से बेरोजागारी दर के कम होने में मदद मिली है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर को कम करने में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA) की अहम भूमिका रही है। इसमें लोगों को खूब रोजगार मिला है।
लाभ
मई 2020 में बड़ी संख्या में परिवारों को लाभ मिला
अध्ययन के अनुसार मई में लोगों के काम के दिन बढ़कर 565 मिलियन पर पहुंच गए थे। तुलनात्मक रूप से मई 2019 में लोगों के काम के दिनों की संख्या 370 मिलियन।
ऐसे में इस बार मई में 33 मिलियन परिवारों को मनरेगा योजना का पूरा लाभ मिला है। यह पिछले साल की तुलना में 55 प्रतिशत अधिक है।
इसी तरह इस बार अच्छी बारिश से खरीफ की फसल की बुवाई में भी 39.4% की वृद्धि हुई है।
बयान
ग्रामीण भारत में खपत बढ़ने की है उम्मीद
व्यास ने निष्कर्ष निकाला, "मनरेगा के साथ गरीब कल्याण योजना की ओवरलैपिंग अस्पष्ट है। फिर भी, ग्रामीण बेरोजगारी के कम से कम अक्टूबर 2020 तक कम रहने की उम्मीद की जा सकती है। इन प्रयासों से उपभोग की मांग बढ़ने की उम्मीद रहेगी।"