
क्या होगा अगर पेट्रोल से चलने वाली गाड़ी में डीजल डाल दिया जाए?
क्या है खबर?
समय के साथ ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में काफी बड़े बदलाव हुए हैं। काठ के पहिए से शुरू हुआ यह सफर अब पेट्रोल-डीजल से होकर इलेक्ट्रिक वाहनों पर आ पहुंचा है।
कीमतों के लिहाज से अब पेट्रोल और डीजल में कोई ख़ास फर्क नहीं रह गया है और लोग अब पेट्रोल की कारों को प्राथमिकता देने लगे हैं।
क्या आप ने कभी सोचा है कि अगर पेट्रोल गाड़ी में डीजल का प्रयोग किया जाए तो क्या फर्क पड़ेगा।
प्रभाव
पेट्रोल गाड़ी में डीजल डाल दें तो क्या होगा?
पेट्रोल और डीजल दोनों का काम करने का तरीका अलग है। डीजल इंजन में लुब्रिकेशन ऑयल के रूप में काम करता है। वहीं अगर इसे पेट्रोल के साथ मिक्स कर दिया जाए तो ये साल्वेंट का रूप ले लेता है।
यही कारण है कि पेट्रोल गाड़ी में अगर डीजल गलती से डाल दिया जाए तो इतना खतरनाक असर नहीं होगा, लेकिन हां इतना जरूर है कि ऐसा करने से इंजन पर कुछ वक्त के बाद प्रभाव जरूर पड़ने लगेगा।
अंतर
पेट्रोल-डीजल में क्या अंतर होता है?
पेट्रोल की अपेक्षा डीजल को अधिक किफायती माना जाता है। डीजल गाड़ियों से न सिर्फ माइलेज अच्छा मिलता है, बल्कि पेट्रोल के मुकाबले डीजल गाड़ियों में पिकअप भी ज्यादा होता है।
डीजल की अपेक्षा पेट्रोल अधिक शुद्ध होता है, इसे 35 से 200 डिग्री सेंटीग्रेट के बीच उबाल कर तैयार किया जाता है। तो वहीं दूसरी तरफ डीजल को 250 से 350 डिग्री सेंटीग्रेट के बीच उबाल कर तैयार किया जाता है।
पेट्रोल की अपेक्षा डीजल अधिक प्रदूषणकारी होता है।
कारण
क्यों डीजल गाड़ियों का पिकअप अधिक होता है?
डीजल गाड़ियों में पिकअप ज्यादा होने का सबसे पहला और प्रमुख कारण है, इंजन में टॉर्क का ज्यादा होना।
जो कि इंजन को शुरुआती एक्सलरेशन देने मे मदद करता है, जिस कारण इंजन शुरुआत में अधिक उत्तेजना के साथ के परफॉर्म करता है और चालक को एक बेहतर स्टार्ट मिलता है।
हालांकि, पेट्रोल की अपेक्षा में डीजल इंजन मेंटेनेंस ज्यादा मांगता है और सरकारी निर्देशों के मुताबिक डीजल गाड़ी का शुरुआती रजिस्ट्रेशन 10 साल का होता है।
टॉर्क
क्या होता है टॉर्क?
अगर बात टॉर्क की हो ही रही है तो लगे हाथ ये भी जान लेते हैं कि आखिरकार टॉर्क क्या होता है।
किसी भी इंजन के ट्विस्टिंग एवं टर्निंग फाॅर्स को टॉर्क कहां जाता है, यह वाहन के शुरुआती एक्सलरेशन में मदद करता है।
जितना ज्यादा टॉर्क होता है उतना ही अच्छा पिकअप होता है। यही कारण है कि SUV जैसी भारी गाड़ियों में ऐसे इंजनों का इस्तेमाल होता है, जो कि अधिक मात्रा में टॉर्क उत्पन्न करते हैं।
जानकारी
ऐसी स्थिति में क्या करें (हमारी सलाह)
अगर कभी आप भी इस समस्या के शिकार हो जाते हैं, तो आपको उस वक्त अपनी कार के इंजन को स्टार्ट न करें और उसे धक्का देकर किनारे करें। इसके बाद मैकैनिक की मदद से पेट्रोल-डीजल के मिश्रण को टैंक से निकलवा दें।