
मेटा से यूजर्स का डाटा मांगने के मामले में विश्वभर में भारत दूसरे नंबर पर
क्या है खबर?
भारत सरकार ने 2022 की दूसरी छमाही यानी जुलाई से दिसंबर के बीच में सोशल मीडिया कंपनी मेटा से यूजर्स के डाटा के लिए 63,852 अनुरोध किए हैं। इस आंकड़े के हिसाब से अमेरिका के बाद यूजर्स की जानकारी मांगने के मामले में भारत दूसरे नंबर पर है।
मेटा के मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी गाय रोसेन ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा कि 2022 की दूसरी छमाही के दौरान यूजर्स डाटा के लिए वैश्विक सरकारी अनुरोध 0.8 प्रतिशत बढ़े हैं।
अनुरोध
बढ़े हैं डाटा से जुड़े सरकारी अनुरोध
रोसेन के मुताबिक इस दौरान सरकारी अनुरोधों की संख्या 2,37,414 से बढ़कर 2,39,388 हो गई है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका के बाद यूजर्स का डाटा मांगने में भारत, जर्मनी, ब्राजील, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देश आगे हैं।
अपनी नई पारदर्शिता रिपोर्ट के अनुसार, मेटा ने कहा कि अमेरिका ने कुल 64,148 अनुरोध किए हैं।
यूजर्स के डाटा के लिए सरकारी अनुरोधों में नियमित कानूनी प्रक्रिया और इमरजेंसी डिस्क्लोजर अनुरोध दोनों शामिल हैं।
भारत
दूसरी छमाही में बढ़ी अनुरोधों की संख्या
भारत के मामले में एक दिलचस्प बात यह है कि वर्ष 2022 की दूसरी छमाही में अनुरोधों की संख्या इसी साल की पहली छमाही की तुलना में अधिक है।
वर्ष 2022 की पहली छमाही में भारत सरकार ने यूजर्स के डाटा के लिए मेटा को 55,497 अनुरोध भेजे थे।
कंपनी ने कहा कि दूसरी छमाही के कुल अनुरोध में 58,681 कानूनी प्रक्रिया के अनुरोध थे और 5,171 इमरजेंसी डिस्क्लोजर से जुड़े अनुरोध थे।
मेटा
वैध कानूनी प्रक्रिया के बिना नहीं करेंगे जानकारी का खुलासा- मेटा
मेटा ने कहा कि वह औपचारिक कानूनी प्रक्रिया के लिए खातों की जानकारी को संरक्षित करने के सरकारी अनुरोधों को स्वीकार करती है।
कंपनी ने कहा, "जब हमें एक संरक्षण अनुरोध प्राप्त होता है तो हम प्रासंगिक खाते की जानकारी का एक अस्थायी स्नैपशॉट संरक्षित रखेंगे और जब तक हमें औपचारिक और वैध कानूनी प्रक्रिया प्राप्त नहीं होगी तब तक किसी भी संरक्षित रिकॉर्ड का खुलासा नहीं करेंगे।"
मेटा को 13,500 अनुरोध यूजर्स/अकाउंट को संरक्षित करने से संबंधित प्राप्त हुए।
रिक्वेस्ट
क्या है लीगल और इमरजेंसी अनुरोध?
लीगल अनुरोध यूजर्स का डाटा पाने के लिए कानूनी प्रक्रिया के तहत भेजा जाने वाला अनुरोध है।
इमरजेंसी अनुरोध किसी प्रकार की आपात स्थिति होने पर बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के तहत भेजा जाने वाला अनुरोध है।
फेसबुक ने पहले एक आधिकारिक ब्लॉग पोस्ट में कहा था कि आपात स्थिति में सरकार बिना कानूनी प्रक्रिया के अनुरोध भेज सकती है, लेकिन परिस्थितियों को समझने के बाद ही कंपनी सरकार को जानकारी देगी।