
हरियाणा: 3 निर्दलीय विधायकों के समर्थन वापस लेने के बाद क्या गिर जाएगी सरकार?
क्या है खबर?
हरियाणा में सियासी संकट सामने आ रहा है। 7 मई को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार से 3 निर्दलीय विधायकों ने अपना समर्थन वापस ले लिया है।
इन तीनों विधायकों ने कांग्रेस को समर्थन दे दिया है, जिसके बाद राज्य सरकार अल्पमत में आ गई है।
आइए जानते हैं कि हरियाणा में सरकार बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा क्या है और समीकरण किसके पक्ष में हैं।
विधायक
किस पार्टी के पास है कितने विधायक?
हरियाणा में कुल विधानसभा सीटों की संख्या 90 है। हालांकि, इनमें से 2 सीटें फिलहाल खाली हैं, जिन पर 25 मई को उपचुनाव होना है।
बहुमत के लिए 45 विधायकों का समर्थन होना जरूरी है। फिलहाल भाजपा के पास 40, कांग्रेस के पास 30, जननायक जनता पार्टी (JJP) के पास 10, इंडियन नेशनल लोकदल और हरियाणा लोकहित पार्टी के पास एक-एक विधायक हैं।
इसके अलावा 6 विधायक निर्दलीय भी हैं।
भाजपा
भाजपा को कितने विधायकों का समर्थन है?
सैनी सरकार के पास 43 विधायक थे, जिसमें से अब 3 ने समर्थन वापस ले लिया है। यानी अब उनके पास 40 विधायक रह गए हैं।
हालांकि, भाजपा के दावा है कि उसके पास अभी भी 47 विधायकों का समर्थन हैं। इनमें खुद भाजपा के 40, 2 निर्दलीय और 1 हरियाणा लोकहित पार्टी (HLP) का विधायक है।
भाजपा का कहना है कि उसे JJP के भी 4 विधायकों का समर्थन है, जिसके बाद ये संख्या 47 पर पहुंच गई है।
कांग्रेस
कांग्रेस के पास है सरकार बनाने का मौका?
कांग्रेस के खुद के 30 और 3 निर्दलीय विधायक मिलाकर संख्या 33 होती है। JJP के दुष्यंत चौटाला ने कहा है कि अगर सरकार को घेरा जाता है तो वे कांग्रेस को समर्थन देंगे। अगर JJP के विधायकों को भी शामिल किया जाए तो ये संख्या 43 होती है।
हालांकि, JJP के 10 विधायकों में से भी कुछ बागी बताए जाते हैं। इस हिसाब से उम्मीदें बहुत कम है कि 10 के 10 विधायक कांग्रेस को समर्थन देंगे।
सरकार
तो क्या गिर जाएगी सरकार?
सैनी की सरकार भले ही अल्पमत में है, लेकिन उस पर गिरने का खतरा नहीं है।
दरअसल, 13 मार्च को ही सैनी सरकार ने अविश्वास प्रस्ताव पर बहुमत साबित किया है।
कानूनन एक बार अविश्वास प्रस्ताव लाने के बाद दूसरा अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए कम से कम 180 दिनों का अंतर होना चाहिए। इस आधार पर फिलहाल सरकार के खिलाफ 13 सितंबर तक कोई अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता।
हरियाणा में अक्टूबर-नवम्बर में विधानसभा चुनाव होने हैं।
निर्दलीय
किन निर्दलीय विधायकों ने वापस लिया समर्थन?
नीलोखेड़ी से विधायक धर्मपाल गोंदेर, पुंडरी से रणधीर गोलन और दादरी से सोमबीर सांगवान ने भाजपा से अपना समर्थन वापस ले लिया है।
गोंदर का कहना है कि उन्हें किसी भी चुनावी कार्यक्रम में बुलाया नहीं गया और सिर्फ कांग्रेस पार्टी ही गरीबों और किसानों के बारे में सोचती है।
गोलन ने कहा कि उन्होंने भाजपा सरकार को अपना समर्थन दिया था, लेकिन आज बेरोजगारी और महंगाई चरम पर है।