
गुलाम नबी ने किया नई पार्टी का ऐलान, जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाना उद्देश्य
क्या है खबर?
पूर्व कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने आज जम्मू में रैली करते हुए अपनी नई पार्टी बनाने का ऐलान किया। उनकी ये पार्टी फिलहाल जम्मू-कश्मीर में ही कार्य करेगी और यहां अच्छा प्रदर्शन रहने पर राष्ट्रीय संभावनाएं तलाशी जाएंगी।
अभी उन्होंने पार्टी के नाम और झंडा घोषित नहीं किया है और इसकी जिम्मेदारी लोगों पर डाली गई है।
जम्मू-कश्मीर में इस साल या अगले साल विधानसभा चुनाव हो सकते हैं, ऐसे में उनका ये ऐलान काफी महत्वपूर्ण हो जाता है।
मुद्दे
इन मुद्दों पर रहेगा आजाद की पार्टी का ध्यान
रैली में आजाद ने कहा कि उनकी पार्टी का ध्यान जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने और जमीन का अधिकार और केवल स्थानीय लोगों को रोजगार जैसे पुराने कानूनों की बहाली पर होगा।
उन्होंने कांग्रेस पर भी निशाना साधा और कहा कि पार्टी कंप्यूटर और ट्वटिर से नहीं, बल्कि उन जैसे नेताओं के खून से खड़ी हुई थी। उन्होंने कहा कि लोग उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनकी पहुंच केवल कंप्यूटर और ट्वीट्स तक है।
प्रभाव
आजादी की पार्टी में शामिल होंगे कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले कई बड़े नेता
शुक्रवार को ही आजाद के समर्थन में जम्मू-कश्मीर के 20 अन्य नेताओं ने कांग्रेस से इस्तीफा दिया था और ये सभी आजाद की पार्टी में शामिल हो सकते हैं।
इन नेताओं में जम्मू-कश्मीर के पूर्व उपमुख्यमंत्री ताराचंद, माजिद वानी, मनोहर लाल शर्मा और घारू चौधरी जैसे पूर्व मंत्री और कई पुराने विधायक शामिल हैं।
इन नेताओं के अलावा कई पार्षदों, जिला और ब्लॉक स्तर के पदाधिकारियों और पंचायती राज संस्था (PRI) के सैकड़ों सदस्यों ने भी कांग्रेस छोड़ दी है।
रिपोर्ट्स
जम्मू-कश्मीर में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहते हैं आजाद
आजाद के करीबी लोगों का कहना है कि विधानसभा चुनाव से पहले आजाद जम्मू-कश्मीर में अपने पैर मजबूत करना चाहते हैं। बता दें कि आजाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।
अगर जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में आजाद की पार्टी अकेले दम पर चुनाव लड़कर कुछ सीटें जीतने में सफल रहती है तो वह चुनाव के बाद किंगमेकर की भूमिका में आ सकते हैं। कयास हैं कि भाजपा भी उनसे हाथ मिला सकती है।
इस्तीफा
आजाद ने 26 अगस्त को दिया था कांग्रेस से इस्तीफा
शीर्ष नेतृत्व से नाराज चल रहे गुलाम नबी ने 26 अगस्त को कांग्रेस से इस्तीफा दिया था।
सोनिया गांधी को भेजे गए अपने इस्तीफे में उन्होंने राहुल गांधी के कामकाज करने के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए थे।
उन्होंने कहा था कि राहुल ने पार्टी का खाका नष्ट कर दिया है और अनुभवी नेताओं का साइडलाइन कर बिना अनुभव वाले नेताओं को तवज्जो दी गई। उन्होंने कहा कि राहुल के निजी सहायक और सुरक्षाकर्मी फैसला ले रहे हैं।
सवाल
आजाद ने कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव पर भी उठाए थे सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव पर भी सवाल उठाते हुए आजाद ने अपने इस्तीफे में कहा था कि अब पार्टी को चलाने के लिए कठपुतली की तलाश हो रही है और पार्टी जिस स्थिति में पहुंच गई है, वहां से वो वापस नहीं लौट सकती।
इस्तीफा देने के बाद आजाद के भाजपा में शामिल होने की संभावना भी जताई गई थी, हालांकि आजाद ने इसका खंडन करते हुए कहा था कि वह अपनी खुद की पार्टी बनाएंगे।
G-23 समूह
न्यूजबाइट्स प्लस
आजाद कांग्रेस के 'G-23' समूह के प्रमुख सदस्य थे। इस समूह ने अगस्त, 2020 में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पार्टी में बड़े बदलावों की मांग की थी। आजाद समेत कुल 23 नेता इस समूह में शामिल थे और ये सभी कई मौकों पर कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की आवाज उठा चुके हैं।
आजाद को 25 अगस्त को जम्मू-कश्मीर कांग्रेस की प्रचार समिति का प्रमुख नियुक्त किया गया था, लेकिन अगले ही दिन उन्होंने इस्तीफा दे दिया।