
राष्ट्रपति चुनाव को लेकर भाजपा और विपक्ष की अहम बैठकें, जानें क्या कहते हैं आंकड़े
क्या है खबर?
सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी पार्टियों ने दो महीने बाद जुलाई में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं।
कल शाम केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत भाजपा के शीर्ष नेताओं ने इस मुद्दे पर चार घंटे लंबी बैठक की। नड्डा के घर पर हुई इस बैठक में जून में होने वाले राज्यसभा चुनाव पर भी चर्चा की गई।
राज्यसभा की 57 सीटों के लिए 10 जून को वोटिंग होनी है।
विपक्षी पार्टियां
विपक्षी पार्टियों को एकजुट करने में लगे चंद्रशेखर राव
विपक्ष की तरफ से तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव विपक्षी पार्टियों को एकजुट करने में लगे हुए हैं। अपने इस लक्ष्य के साथ वे पिछले कुछ दिनों में कई राज्यों का दौरा कर चुके हैं और कई बड़े विपक्षी नेताओं से मिले हैं।
इन नेताओं में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) प्रमुख शरद पवार और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव शामिल हैं।
अन्य मुलाकातें
ममता बनर्जी और नीतीश कुमार से भी मिलेंगे राव
राव पश्चिम बंगाल जाकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी मुलाकात करेंगे। इसके अलावा वो बेंगलुरू में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा से भी मिलेंगे।
राव की बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नेता विपक्ष तेजस्वी यादव से भी मिलने की योजना है।
दिलचस्प है कि भाजपा का सहयोगी होने के बावजूद पिछले कुछ चुनावों में नीतीश ने उसके राष्ट्रपति उम्मीदवारों का समर्थन नहीं किया है। इस बार भी उनके भाजपा उम्मीदवार के खिलाफ वोट करने की संभावना बनी हुई है।
जानकारी
25 जुलाई को खत्म हो रहा है मौजूदा राष्ट्रपति का कार्यकाल
बता दें कि मौजूद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 25 जुलाई को पूरा हो रहा है और इससे पहले नया राष्ट्रपति चुनना होगा। अभी तक न तो भाजपा के राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (NDA) और न ही विपक्षी पार्टियों ने अपने उम्मीदवार का ऐलान किया है।
आंकड़े
क्या कहते हैं आंकड़े?
राष्ट्रपति चुनाव के समय सभी सांसदों और विधायकों के लगभग 48.9 प्रतिशत वोट भाजपा और उसके NDA सहयोगियों के पास होंगे, वहीं विपक्ष और अन्य "निष्पक्ष" पार्टियों के पास 51.1 प्रतिशत वोट होंगे।
ऐसे में अगर पूरा विपक्ष एकजुट हो जाता है तो भाजपा के राष्ट्रपति उम्मीदवार को हराया जा सकता है। हालांकि इसकी संभावना बेहद कम है और अपनी जीत पक्की करने के लिए भाजपा ऐसी निष्पक्ष पार्टियों से संपर्क कर रही है जो उसका साथ दे सकती हैं।
अहम पार्टियां
इन दो पार्टियों पर भाजपा की खास नजर
जिन पार्टियों पर भाजपा की नजर है, उनमें ओडिशा के मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की पार्टी बीजू जनता दल (BJD) और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी की पार्टी YSR कांग्रेस सबसे अहम हैं।
अगर इनमें से एक भी पार्टी भाजपा के राष्ट्रपति उम्मीदवार का समर्थन कर देती है तो वह आसानी से जीत जाएगा। इतिहास भी इस मामले में भाजपा के पक्ष में हैं और BJD कई मुद्दों पर सरकार के समर्थन में वोट कर चुकी है।
राष्ट्रपति चुनाव
न्यूजबाइट्स प्लस
भारत में राष्ट्रपति का चुनाव निर्वाचन मंडल (इलेक्टोरल कॉलेज) के जरिए होता है। इसके सदस्यों का प्रतिनिधित्व आनुपातिक होता है और उनका सिंगल वोट ट्रांसफर होता है। साथ ही उनकी दूसरी पसंद की भी गिनती होती है।
राष्ट्रपति चुनाव में सभी विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य और लोकसभा और राज्यसभा के सांसद वोट डालते हैं। इस वजह से इसे अप्रत्यक्ष चुनाव भी कहा जाता है। सांसदों और विधायकों के वोटों की वेटेज हर राज्य के लिए अलग होती है।