
हरियाणा: भूपेंद्र हुड्डा के करीबी को बनाया गया कांग्रेस इकाई का प्रमुख, चार कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त
क्या है खबर?
कांग्रेस ने अपनी हरियाणा इकाई में बड़ा फेरबदल किया है और कुमारी शैलजा को हटाकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के करीबी उदय भान को नया अध्यक्ष बना दिया है।
इसके अलावा पार्टी ने चार कार्यकारी अध्यक्ष भी नियुक्त किए हैं। श्रुति चौधरी, राम किशन गुज्जर, जितेंद्र कुमार भारद्वाज और सुरेश गुप्ता वो नेता हैं जिन्हें कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है।
इस फेरबदल को लेकर पार्टी में कुछ समय से मंथन चल रहा था और अब अंतिम मुहर लग गई है।
स्वागत
हुड्डा ने किया फैसले का स्वागत
हरियाणा में नेता विपक्ष भूपेंद्र हुड्डा ने उदय भान को नया अध्यक्ष बनाने के पार्टी के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि भान एक मेहनती नेता हैं और उन्होंने जमीनी स्तर पर काम किया हुआ है।
समाचार एजेंसी PTI से उन्होंने कहा कि उनकी नियुक्ति कांग्रेस को मजबूत करेगी। वहीं चार कार्यकारी अध्यक्षों की नियुक्ति पर उन्होंने कहा कि सभी साथ मिलकर काम करेगे और कांग्रेस को मजबूत करेंगे।
कुमारी शैलजा
कुमारी शैलजा ने दिया इस्तीफा, बोली- मैं पार्टी की सच्ची सिपाही
कुमारी शैलजा ने अपना इस्तीफा कांग्रेस प्रमुख को सौंप दिया है और उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है।
खुद को पार्टी का एक सच्चा सिपाही बताते हुए उन्होंने कहा, "मेरा हाईकमान पर पूरा भरोसा है और हम सभी साथ काम करेंगे। राज्य इकाई के नए अध्यक्ष और कार्यकारी अध्यक्षों को मेरी शुभकामनाएं।"
उन्होंने बताया कि उन्होंने कुछ दिन पहले ही अपना इस्तीफा पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेज दिया था।
आंतरिक फूट
शैलजा के अध्यक्ष बने रहने से खुश नहीं थे हुड्डा
हरियाणा कांग्रेस के सबसे बड़े नेता माने जाने वाले हुड्डा कुमारी शैलजा के अध्यक्ष बने रहने से खुश नहीं थे और इसके कारण पार्टी में दो धड़े बन गए थे।
हुड्डा चाहते थे कि पार्टी शैलजा को हटाकर कोई नया अध्यक्ष बनाए। हालांकि पार्टी के लिए मुसीबत ये थी कि शैलजा दलित समुदाय से आती हैं, ऐसे में उन्हें हटाने पर पार्टी को इस समुदाय की नाराजगी मोल लेनी पड़ती।
वहीं हुड्डा की न मानने पर जाट उससे नाराज होते।
एक तीर से दो निशाने
उदय भान को अध्यक्ष बना पार्टी ने दोनों समस्याओं का किया समाधान
अब उदय भान को अध्यक्ष बनाकर कांग्रेस ने इन दोनों समस्याओं को समाधान कर लिया है।
उदय भान दलित समुदाय से आते हैं और कई बार के विधायक हैं, ऐसे में उन्हें पार्टी अध्यक्ष बनाने से दलितों के पार्टी से नाराज होने का खतरा लगभग खत्म हो गया है।
भान हुड्डा के करीबी हैं, इसलिए उन्हें अध्य़क्ष बनाकर पार्टी ने हुड्डा का भी सम्मान रखा है और जाटों की नाराजगी मोल लेने से भी बच गई है।