
रसोई की ये चीजें धीरे-धीरे आपके स्वास्थ्य पर डालती हैं नकारात्मक प्रभाव, जरा बचकर रहें
क्या है खबर?
लंबे और स्वस्थ्य जीवन के लिए जरूरी है कि आप ऐसी सभी चीजों से दूर रहें जो आपके स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं।
इसकी शुरूआत आप अपनी रसोई से कर सकते हैं क्योंकि यहां पर ऐसी कई चीजें हैं जिनका आप हर दिन इस्तेमाल करते हैं और वह धीरे-धीरे आपके स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं।
चलिए आज हम आपको रसोई से संबंधित ऐसी ही कुछ चीजों के बारे में बताते हैं।
#1
नॉन स्टिक बर्तन
आज के समय में ज्यादातर लोग नॉन स्टिक बर्तनों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इनमें बना खाना आपके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है ।
दरअसल, नॉन स्टिक बर्तन बनाने के दौरान पॉलीटेट्रफ्लुओरोएथिलीन (PFOA) नामक रसायन का इस्तेमाल किया जाता है और इससे बने बर्तन ओवरहीट होने पर वे जहरीले धुआं छोड़ते हैं।
इसलिए नॉन स्टिक बर्तनों का इस्तेमाल करने से पहले यह जरूर सुनिश्चित कर लें कि वह PFOA मुक्त हों।
#2
प्लास्टिक कंटेनर
प्लास्टिक के कंटेनरों से आप अपने भोजन को जितना दूर रखें, उतना आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छा है क्योंकि प्लास्टिक कंटेनरों को बनाने के लिए कई रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है।
ऐसे में जब इन कंटेनरों में भोजन (विशेष रूप से गर्म भोजन) रखा जाता है तो उनके रसायन भोजन में मिल सकते हैं जिससे शारीरिक के साथ-साथ कई मानसिक समस्याएं हो सकती हैं।
इसलिए जितना संभव हो सके रसोई में प्लास्टिक कंटेनरों का इस्तेमाल करने से बचें।
#3
एल्युमिनियम बर्तन
कई घरों में एल्युमिनियम बर्तनों का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एल्युमीनियम बर्तनों में पकाए गए भोजन में एक-दो मिलीग्राम एल्युमिनियम मिल जाता है जो कई स्वास्थ्य जोखिमों का कारण बन सकता है।
शरीर में थोड़ा सा भी अधिक एल्युमिनियम गुर्दे की समस्याओं का कारण बन सकता है। वहीं रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी क्षति पहुंचाता है।
इसलिए इस तरह के बर्तनों का इस्तेमाल गलती से भी न करें।
#4
माइक्रोवेव
इस बात में कोई दो राय नहीं है कि माइक्रोवेव से खाना बनाना बहुत आसान हो गया है। लेकिन माइक्रोवेव में बनाया या फिर गर्म किया हुआ खाना खाने से शरीर में व्हाइट और रेड ब्लड सेल्स की मात्रा प्रभावित होती है जिसकी वजह से कोलेस्ट्रॉल जैसे समस्या समस्या उत्पन्न हो सकती है।
इतना ही नहीं माइक्रोवेव में खाना बनाने से खाने में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट तत्व खत्म हो जाते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ने लगती है।