
कौन था पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड आतंकी हाशिम मूसा, जिसे सेना ने मुठभेड़ में किया ढेर?
क्या है खबर?
भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकवादी हमले के करीब 3 महीने बाद बड़ी सफलता हासिल की है। सेना ने सोमवार को 'ऑपरेशन महादेव' के तहत श्रीनगर दाचीगाम इलाके के लिडवास में महादेव पहाड़ी 3 आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया। इनमें पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड सुलेमान शाह उर्फ हाशिम मूसा भी शामिल है। ऐसे में आइए जानते हैं कौन था हाशिम मूसा और यह कौनसे हमलों में शामिल रहा था।
सफलता
सेना को कैसे मिली सफलता?
सेना की श्रीनगर स्थित चिनार कोर के अनुसार, महादेव पहाड़ियों के जंगलों में आतंकियों के छिपे होने की गुप्त सूचना मिलने पर सेना ने 'ऑपरेशन महादेव' शुरू कर सोमवार को सर्च अभियान चलाया था। सुबह इलाके में सेना के जवानों को देखकर आतंकियों ने गोलियां बरसाना शुरू कर दिया। सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए मूसा समेत 3 आतंकियों को मार गिराया। सेना आतंकियों के पास से 17 ग्रेनेड, एक M-4 कार्बाइन, 2 AK-47 राइफलें भी बरामद की हैं।
पहचान
कौन था आतंकी हाशिम मूसा?
रिपोर्ट के अनुसार, मूसा पाकिस्तान की सेना के विशेष सेवा समूह (SSG) का पूर्व पैरा-कमांडो था, लेकिन उसे बर्खास्त कर दिया था। सेना में पद से बर्खास्त होने के बाद वह प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) में शामिल हो गया था। पाकिस्तानी सेना में उसे सुलेमान और आतंकियों में मूसा के नाम से जाना जाता था। सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि मूसा को जम्मू-कश्मीर में LeT के आतंकी अभियानों में मदद के लिए SSG से उधार लिया गया था।
दक्षता
अपरंपरागत युद्ध और गुप्त अभियानों में माहिर था मूसा
रिपोर्ट के अनुसार, प्रशिक्षित पैरा कमांडो मूसा अपरंपरागत युद्ध और गुप्त अभियानों में माहिर था। इसका कारण है कि उसे पैरा कमांडों के रूप में कठोर प्रशिक्षण मिला था। ऐसे प्रशिक्षित कमांडो आमतौर पर अत्याधुनिक हथियारों को संभालने में माहिर होते हैं। इसके अलावा वह हाथापाई, जंगल में रहने, जंगली जानवरों से मुकाबला करने, पानी में लंबे समय तक रहने में भी माहिर होते हैं। उन्हें विषम और कठोर परिस्थितियों में जीने की कला सिखाई जाती है।
घुसपैठ
मूसा ने कब की थी भारत में घुसपैठ?
इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, मूसा ने सितंबर 2023 के आसपास नियंत्रण रेखा (LoC) पर कठुआ-सांबा सेक्टर के रास्ते भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की थी। जम्मू-कश्मीर में प्रवेश करने के बाद वह बडगाम, बारामूला, राजौरी, पुंछ और गंदेरबल जैसे जिलों में सक्रिय रहा था। इन गतिविधियों का पता खुफिया आकलन और पहलगाम हमले के बाद हिरासत में लिए गए आतंकियों की मदद करने वाले ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGW) से पूछताछ के आधार पर लगाया गया था।
हमले
मूसा ने 2024 में इन हमलों को दिया था अंजाम
रिपोर्ट्स के अनुसार, आतंकी मूसा भारत में घुसपैठ करने के बाद कई आतंकी हमलों में शामिल रहा था। साल 2024 में उसने कम से कम तीन आतंकी हमलों को अंजाम दिया था। इनमें गंदेरबल और बारामूला में हुए हमले भी शामिल हैं, जहां आतंकियों ने सुरक्षा बलों और आम नागरिकों को निशाना बनाया था। इन इलाकों में उसकी मौजूदगी की पुष्टि कई महीनों से एकत्रित डिजिटल खुफिया जानकारी और मानवीय इनपुट से हुई थी।
खुलासा
पहलागाम हमले का मास्टरमाइंड निकला था मूसा
गत 22 अप्रैल को पहलगाम के पास बैसरन घाटी में भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों ने 26 पर्यटकों को उनका धर्म पूछकर गोली मार दी थी। इनमें एक नेपाली नागरिक भी था। आतंकियों ने हमले में M4 कार्बाइन और AK-47 जैसे हथियारों का इस्तेमाल किया था। बाद में सेना ने मूसा की पहचान हमले की योजना बनाने और उसे अंजाम देने के पीछे मुख्य व्यक्ति के रूप में की थी। सेना ने उसका स्केच भी जारी किया था।
प्रयास
सेना ने मूसा को पकड़ने के लिए की थी इनाम की घोषणा
पहलगाम हमले में मूसा का नाम सामने आने के बाद सेना ने उसका स्केच जारी करने के साथ ही उसे पकड़वाने में मदद करने वालों को 20 लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा भी की थी। उसका सुराग जुटाने के लिए संवेदनशील जिलों में पोस्टर भी लगाए गए थे। उसके बाद सेना को मूसा के संबंध में गुप्त जानकारियां मिलने लगी थी। उन्हीं जानकारियों के आधार पर सेना ने आखिरकार मूसा को उसके गुनाहों की सजा दे दी।