
कौन हैं जस्टिस एनवी रमन्ना, जिनके नाम की मुख्य न्यायाधीश के लिए की गई सिफारिश?
क्या है खबर?
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) एसए बोबडे आगामी 23 अप्रैल को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। ऐसे में केंद्र सरकार के आग्रह पर उन्होंने बुधवार को अगले मुख्य न्यायाधीश के लिए जस्टिस एनवी रमन्ना के नाम की सिफारिश की है।
जस्टिस रमन्ना को 17 फरवरी, 2014 को सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किया गया था। ऐसे में यदि सरकार सिफारिश को मानती है तो रमन्ना का CJI बनना तय है।
ऐसे में आइए जानते हैं जस्टिस रमन्ना के बारे में जरुरी बातें।
जन्म
आंध्र प्रदेश के पोन्नावरम गांव में हुआ था जस्टिस रमन्ना का जन्म
जस्टिस रमन्ना का जन्म 27 अगस्त, 1957 को आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के पोन्नावरम गांव के एक किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने बैचलर ऑफ साइंस और बैचलर ऑफ लॉ की पढ़ाई की है।
कानून की दुनिया में उनका प्रवेश 10 फरवरी, 1983 को अधिवक्ता के तौर पर पंजीयन कराने के साथ हुआ था।
वह आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट, सेंट्रल और आंध्र प्रदेश एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट में भी प्रैक्टिस कर चुके हैं।
जानकारी
इस तरह के मामलों में विशेषज्ञता रखते हैं जस्टिस रमन्ना
जस्टिस रमन्ना ने सामान्य, दीवानी, संवैधानिक, श्रम, सेवा और चुनाव से जुड़े मामलों में प्रैक्टिस की है, लेकिन संवैधानिक, दीवानी मामलों में विशेषज्ञता रखते हैं। वह कई सरकारी संगठनों में पैनल काउंसलर और आंध्र प्रदेश में एडिश्नल एडवोटकेट जनरल भी रह चुके हैं।
नियुक्ति
रमन्ना को जून 2000 में मिली थी हाई कोर्ट न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति
जस्टिस रमन्ना को 27 जून, 2000 को आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के स्थाई न्यायाधीश के रूप में नियुुुुुुुुुुुुुक्ति मिली थी। 10 मार्च, 2013 से 20 मई, 2013 तक वह हाई कोर्ट के ऐक्टिंग चीफ जस्टिस रहे।
इसके बाद 2 सितंबर, 2013 को उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया।
करीब 6 महीने बाद यानी 17 फरवरी, 2014 को उनकी सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में नियुक्ति हुई। वह CJI बोबडे के बाद सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश हैं।
जानकारी
अगस्त, 2022 तक रहेगा जस्टिस रमन्ना का कार्यकाल
जस्टिस रमन्ना का सुप्रीम कोर्ट में कार्यकाल 26 अगस्त, 2022 तक का है। यदि सरकार उनकी नियुक्ति करती है तो वह दो साल से भी कम समय के लिए CJI पद पर रह पाएंगे, लेकिन फिर भी यह उनके लिए बड़ी उपलब्धि होगी।
फैसले
कई अहम फैसले दे चुके हैं जस्टिस रमन्ना
जस्टिस रमन्ना ने अपने कार्यकाल में कई अहम फैसले दिए हैं, लेकिन कुछ फैसले बहुत महत्वपूर्ण रहे हैं। इनमें गत जनवरी में आगजनी की घटना के मुआवजे के मामले को लेकर दिया गया फैसला प्रमुख रहा है।
इस फैसले में जस्टिस रमन्ना और सूर्यकांत की पीठ ने कहा था घर के रहकर काम करने वाली महिला के काम की कीमत उसके ऑफिस जाने वाले पति के काम से कम नहीं है। ऐसे में वह समान मुआवजे का अधिकार रखती है।
अन्य फैसले
जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट बहाली का फैसला रहा सबसे चर्चित
जस्टिस रमन्ना के कार्यकाल में जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट बहाली का फैसला सबसे चर्चित रहा था। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाए जाने के बाद सरकार ने वहां इंटरनेट पर पाबंदी लगा दी थी।
इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस रमन्ना, आर सुभाष रेड्डी और बीआर गवई की पीठ ने इंटरनेट के निलंबन पर तत्काल समीक्षा करने का फैसला सुनाया था।
इसके बाद सरकार ने मामले की समीक्षा करते हुए धीरे-धीरे इंटरनेट सेवा को बहाल किया था।
RTI
मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय को RTI के दायरे में लाने का दिया था फैसला
साल 2019 में जस्टिस रंजन गोगोई, एनवी रमन्ना, डीवाई चंद्रचूड़, दीपक गुप्ता और संजीव खन्ना की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय को सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के दायरे में लाने की सिफारिश की थी।
इसी तरह 2019 में ही इसी पीठ ने वित्त अधिनियम, 2017 की धारा 184 को बरकरार रखने का फैसला सुनाया था। इसी तरह उन्होंने 2017 में हरियाणा सरकार द्वारा आयातीत सामान पर लिए जाने वाले कर को उचित ठहराया था।
जानकारी
देश के 48वें CJI होंगे रमन्ना
जस्टिस बोबड़े ने नवंबर, 2019 में रंजन गोगोई के रिटायर होने के बाद देश के 47वें CJI के तौर पर शपथ ली थी। अब अगले महीने वो इस पद से रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में जस्टिस रमन्ना देश के 48वें CJI के रूप में शपथ लेंगे।
बता दें, सुप्रीम कोर्ट में जजों की अनुमोदित संख्या 34 है, लेकिन फिलहाल यहां 30 जज ही कार्यरत है। जस्टिस गोगाई, जस्टिस गुप्ता, जस्टिस भानुमति के रिटायरमेंट के बाद नियुक्ति नहीं हुई।