
कोरोना वायरस: देश में मार्च के बाद पहली बार बढ़ी ट्रांसमिशन रेट
क्या है खबर?
कोरोना वायरस की शुरुआत के बाद से देश में पहली बार ट्रांसमिशन रेट में इजाफा हुआ है।
ट्रांसमिशन रेट को रिप्रोडक्शन नंबर, R वैल्यू या सिर्फ R से भी जाना जाता है।
इसके सहारे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि कोई महामारी जनसंख्या को कैसे अपना निशाना बना रही है।
लॉकडाउन लागू होने के बाद से लगातार इसमें कमी होती जा रही थी, लेकिन अनलॉक-2 के पहले हफ्ते में इसमें बढ़ोतरी देखी गई है।
कोरोना वायरस
लॉकडाउन लागू होने के समय 1.83 थी ट्रांसमिशन रेट
चेन्नई स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ मैथमेटिकल साइसेंस (IMSc) के अनुसार, 25 मार्च से जब लॉकडाउन का पहला चरण शुरू हुआ, तब ट्रांसमिशन रेट 1.83 थी।
इसका मतलब यह हुआ कि कोरोना वायरस से संक्रमित 100 लोग अपने संपर्क में आने वाले औसतन 183 अन्य लोगों को संक्रमित कर रहे थे।
इसके बाद से यह लगातार कम होती गई, लेकिन पिछले एक सप्ताह में बढ़कर यह फिलहाल 1.19 हो गई है। ऐसा पहली बार हुआ है, जब यह रेट बढ़ी है।
जानकारी
ट्रांसमिशन रेट 1 से कम करना लक्ष्य
गौरतलब है कि जब ट्रांसमिशन रेट 1 से कम हो जाती है, तभी किसी महामारी के अंत की शुरुआत मानी जाती है। सरकार और प्रशासन इस रेट को 1 से कम करने का प्रयास कर रहे हैं ताकि कर्व फ्लैट हो सके।
संक्रमण
कम होते-होते ऐसे बढ़ी ट्रांसमिशन रेट
मार्च में भारत में ट्रांसमिशन रेट 1.83 थी। यानी एक संक्रमित व्यक्ति 1.83 अन्य लोगों तक वायरस पहुंचा रहा था।
6-11 अप्रैल के बीच यह कम होकर 1.55 हो गई। इसके बाद इसमें फिर कमी आई और यह 1.49 और जून की शुरुआत में 1.2 हो गई।
जून में यह रेट लगातार कम होती रही और 26 जून को यह 1.11 पर पहुंच गई, लेकिन जुलाई आते ही यह 2-5 जुलाई के बीच बढ़कर 1.19 पर पहुंच गई।
कोरोना वायरस
कर्नाटक में सबसे ज्यादा है रेट
अगर राज्यों के हिसाब से बात करें तो दक्षिणी राज्यों में ट्रासंमिशन रेट सबसे ज्यादा है। कर्नाटक में यह 1.66 और आंध्र प्रदेश में 1.65 है। सिन्हा ने राष्ट्रीय स्तर पर R बढ़ने की वजह दक्षिणी राज्यों को माना है।
सिन्हा के अनुमान के मुताबिक, इस महीने के अंत तक सक्रिय मामलों की संख्या लगभग छह लाख हो सकती है, जो इस समय लगभग 2.70 लाख है। अकेले महाराष्ट्र में तब तक 1.5 लाख सक्रिय मामले होंगे।
ट्रांसमिशन रेट
दिल्ली में हुआ सुधार
दिल्ली ने इस मामले में अच्छा प्रदर्शन किया है। यहां 13-16 जून के ट्रांसमिशन रेट 1.25 थी, जो अब घटकर 1 के पास पहुंच गई है। 21 जून के बाद से यह लगातार 1 के पास बनी हुई है।
सिन्हा ने कहा कि यहां पिछले कुछ दिनों से कर्व तेजी से नहीं बढ़ रहा है।
पिछले कुछ दिनों से राजधानी की स्थिति में भी सुधार हो रहा है। हरियाणा में भी ऐसे ही संकेत देखे जा सकते हैं।
बयान
क्या कहते हैं जानकार?
IMSc से जुड़े डॉक्टर सीताभ्रा सिन्हा ने कहा, "रेट के बढ़ने या घटने का असर आमतौर पर 10-14 दिनों के बाद दिखता है। अभी हम मामलों में जो बढ़ोतरी देख रहे हैं, उसकी जड़ें जून के बीच या उसके आखिर की घटनाओं से जुड़ी है। अभी हम फिर से उस स्थिति में पहुंच गए हैं, जिसमें हम मई और जून की शुरुआत में थे। जून में जो थोड़ा-बहुत सुधार हुआ, वह लंबे समय तक जारी नहीं रह सका।"