
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा बुलडोजर से घर गिराने का मामला, याचिका दायर
क्या है खबर?
हिंसा के आरोपियों के घरों को बुलडोजर से गिराने के प्रचलन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। इस्लामी संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने ये याचिका दायर की है।
याचिका में बुलडोजर से घर गिराने की कार्रवाई को अपराध रोकथाम की आड़ में अल्पसंख्यकों, विशेषकर मुस्लिमों, को निशाना बनाने की साजिश बताया गया है।
इसमें कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि वह सरकारों को बिना कोर्ट की अनुमति के घरों को ध्वस्त न करने का निर्देश दे।
पृष्ठभूमि
क्या है बुलडोजर से घर गिराने का मामला?
पिछले कुछ हफ्तों में कई भाजपा शासित राज्यों में हिंसा के कथित आरोपियों के घरों और दुकानों को बुलडोजर की मदद से गिराया गया है। ऐसा बिना किसी न्यायिक अनुमति के किया गया।
ये चलन उत्तर प्रदेश से शुरू हुआ जहां योगी आदित्यनाथ की सरकार ने सबसे पहले आरोपियों के घर ढहाने के लिए बुलडोजर का इस्तेमाल किया था।
इसके बाद मध्य प्रदेश और गुजरात में भी ऐसी कार्रवाई की गई हैं।
ढहाए गए लगभग सभी घर मुस्लिमों के थे।
याचिका
जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने अपनी याचिका में क्या कहा है?
इस चलन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका में जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने कहा है कि हालिया समय में दंडात्मक कार्रवाई के तौर पर आरोपियों के घरों को बुलडोजर से तोड़ने का प्रचलन बढ़ा है।
संगठन के अनुसार, "मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और गृह मंत्री समेत कई मंत्रियों और विधायकों ने ऐसी कार्रवाई का समर्थन करने वाले बयान दिए हैं और अल्पसंख्यक समूहों को दंगा होने पर उनके घरों और व्यावसायिक संपत्तियों को गिराने की धमकी दी है।"
दलीलें
अपराधिक न्याय प्रणाली और संवैधानिक प्रक्रियाओं को नुकसान पहुंचाते हैं ऐसे कदम- याचिकाकर्ता
याचिकाकर्ता के अनुसार, ऐसे कदम संवैधानिक प्रक्रियाओं और अपराधिक न्याय प्रणाली के खिलाफ हैं और आरोपियों के अधिकारों का उल्लंघन करते हैं।
संगठन के अनुसार, "सरकारों के ऐसे कदम हमारे देश की अपराधिक न्याय प्रणाली को कमजोर करते हैं। सरकार के इन कृत्यों से कानूनी प्रक्रिया प्रभावित होती है और इसलिए इन्हें रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई की जरूरत है।"
उसने तनाव को बढ़ने से रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट से तत्काल दखल देने को कहा है।
मांगें
याचिका में क्या अनुरोध किए गए हैं?
जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि वह केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दे कि वे दंडात्मक कार्रवाई के तौर पर आरोपियों के घर नहीं गिरा सकते हैं। उसने बिना कोर्ट की अनुमति के किसी भी घर या दुकान को न गिराने का निर्देश देने का अनुरोध भी किया है।
इसके अलावा सांप्रदायिक दंगों को संभालने के लिए पुलिसकर्मियों को उचित ट्रेनिंग से संबंधित निर्देश देने का अनुरोध भी किया गया है।
जानकारी
नेताओं को बयान न देने का निर्देश जारी करने का भी अनुरोध
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से ये अनुरोध भी किया है कि वो जांच से असंबद्ध मंत्रियों, विधायकों और नेताओं को कोर्ट का फैसला आने तक मामले पर कोई भी सार्वजनिक बयान जारी न करने का निर्देश दे।