
चीन-पाकिस्तान के संयुक्त युद्धाभ्यास पर भारतीय नौसेना रख रही कड़ी नजर- रिपोर्ट
क्या है खबर?
चीन और पाकिस्तान की नौसेनाएं उत्तरी अरब सागर में 11 नवंबर से एक संयुक्त युद्धाभ्यास कर रही हैं। इस युद्धाभ्यास पर भारतीय नौसेना नजरें जमाए हुए है। सरकारी सूत्रों ने इस बात की जानकारी दी है।
नौसेना चीनी पनडुब्बी और युद्धपोतों की आवाजाही पर कड़ी नजर रख रही है। बता दें कि चीन और पाकिस्तान के बीच ये अब तक का सबसे बड़ा युद्धाभ्यास है, जिसे सी गार्जियन-3 नाम दिया गया है।
नजर
हिंद महासागर क्षेत्र में नौसेना की कड़ी नजर
सूत्रों के मुताबिक, चीन के युद्धपोतों और पनडुब्बियों के मलक्का जलडमरुमध्य के रास्ते हिंद महासागर में दाखिल होने के साथ ही नौसेना ने उन पर नजर रखनी शुरू कर दी थी।
भारत की व्यापक समुद्री निगरानी के तहत नौसेना राष्ट्रीय सुरक्षा हितों के अनुरूप हिंद महासागर क्षेत्र में सभी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस युद्धाभ्यास के लिए चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने युद्धपोतों और पनडुब्बियों सहित कई पोतों को तैनात किया है।
गार्जियन
क्या है सी गार्जियन-3?
सी गार्डियन-3 पाकिस्तान और चीन की नौसेनाओं के बीच एक द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास है। इसके बारे में दोनों नौसेनाओं ने कहा कि ये दोनों देशों का उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में समकालीन पारंपरिक और गैर-पारंपरिक खतरों पर पेशेवर अनुभव साझा करना और दोनों नौसेनाओं के बीच द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाना है।
अधिकारियों ने कहा कि यह अभ्यास पाकिस्तान नौसेना और चीनी नौसेना के बीच मजबूत द्विपक्षीय सैन्य सहयोग को दिखाता है।
युद्धपोत
अभ्यास में कौन-कौनसे युद्धपोत हैं शामिल?
चीनी नौसेना की टाइप 039 डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बी युद्धाभ्यास के लिए कराची पहुंची है।
NDTV ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि उसके पास मौजूद सैटेलाइट तस्वीरों में कराची में खड़ी चीनी टाइप 926 पनडुब्बी की मौजूदगी का भी संकेत मिलता है।
चीनी युद्ध-समूह में एक टाइप 52D विध्वंसक, 2 टाइप 54 फ्रिगेट और एक टाइप 903 रीप्लेनिशमेंट ऑयलर भी शामिल हैं, जो युद्धपोत और पनडुब्बी को लंबी दूरी से संचालन करने में सक्षम बनाता है।
प्लस
न्यूजबाइट्स प्लस
पिछले कुछ सालों में चीन हिंद महासागर में अपनी गतिविधियां बढ़ा रहा है।
हाल में एक चीनी अनुसंधान जहाज शि-यान 6 श्रीलंका में रुका, लेकिन इससे पहले इस जहाज को तमिलनाडु समुद्र तट और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के बीच उत्तर में बंगाल की खाड़ी में देखा गया था।
इसके अलावा भी चीन के कई जहाज इस इलाके में गश्त करते रहे हैं। इस वजह से चीन पर जासूसी का आरोप भी लगता रहा है।