
जब विकास दुबे ने की थी नेता की हत्या, गवाही से मुकर गए थे 25 पुलिसकर्मी
क्या है खबर?
कानपुर में गिरफ्तारी के लिए दबिश देने आई पुलिस टीम पर अंधाधुंध फायरिंग कर एक DSP सहित आठ पुलिसकर्मियों को मौत की नींद सुलाने वाले कुख्यात गैंगस्टर विकास दुबे का पुलिस में भी खासा दबदबा था।
यही कारण है कि साल 2001 में उसने एक पुलिस थाने में घुसकर भाजपा नेता की गोली मारकर हत्या कर दी थी, लेकिन कोर्ट में सुनवाई के दौरान घटना के गवाह 25 पुलिसकर्मी बयानों से पलट गए। इससे उसे सजा नहीं हो सकी थी।
प्रकरण
19 साल पहले भाजपा नेता की हत्या कर सुर्खियों में आया था विकास दुबे
करीब दो दशक पहले, जब रक्षामंत्री राजनाथ सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। उस दौरान विकास दुबे सरकार में मंत्री भाजपा के संतोष शुक्ला की हत्या कर सुर्खियों में आया था।
विकास दुबे और उसके साथियों ने शुक्ला को बीच रास्ते में रोक लिया था और उसके काफिले पर हमला कर दिया था।
उस दौरान शुक्ला ने दुबे और उसके साथियों से मुकाबला करने का प्रयास किया, लेकिन दुबे ने उस पर रॉड से हमला कर दिया।
हत्या
जान बचाने के लिए थाने में घुसे शुक्ला ने दुबे ने मार दी थी गोली
हमले में घायल होने के बाद शुक्ला कानपुर देहात के शिवली पुलिस थाने में घुस गए, लेकिन किसी भी पुलिसकर्मी ने उन्हें नहीं बचाया।
उस दौरान विकास दुबे ने यह दिखाते हुए कि उसे पुलिस का कोई डर नहीं है, वह भी थाने में घुस गया और पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में गोली मारकर उनकी हत्या कर दी।
इसके बाद भी पुलिस उसे नहीं पकड़ पाई और उसने चार महीने बाद आत्मसमर्पण कर दिया और बाद में बरी भी हो गया।
परिवार
दुबे के राजनेताओं के साथ कोर्ट पहुंचने पर भौचक्का रह गया शुक्ला का परिवार
दुबे के "आत्मसमर्पण" को याद करते हुए शुक्ला के भाई मनोज ने बताया कि दुबे ने राजनेताओं के साथ कोर्ट में प्रवेश किया था।
इससे वह भौचक्के रह गए, लेकिन उन्हें सबसे बड़ा झटका उस समय लगा, जब मामले के जांच अधिकारी सहित 25 पुलिसकर्मियों ने कोर्ट में अपने बयान बदल दिए।
इसके बाद उन्होंने तत्कालीन कानपुर देहात के जिला मजिस्ट्रेट और विशेष अभियोजन अधिकारी (SPO) से भी मुलाकात की, लेकिन किसी ने मदद नहीं की।
विवरण
शुक्ला ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर जताया भरोसा
संतोष शुक्ला के भाई मनोज ने बताया कि कुछ सालों पहले पुलिस ने कहा था कि कानपुर को नरसंहार से बचाया जा सकता है। इसके लिए विकास दुबे और उसके साथियों को जेल में बंद करना हो, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
उन्होंने वैसा नहीं होने पर गहरा अफसोस जताया। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भरोसा जताते हुए कहा कि 2020 का समय साल 2001 जैसा नहीं है। उन्हें यकीन है कि इस बार पुलिस उसे दबोच लेगी।
परिणाम
दुबे की गिरफ्तारी के लिए दी जा रही है दबिश
हाल की घटना के बाद विकास दुबे की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है और उन पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है, जिन्होंने दुबे को पुलिस दबिश की सूचना पहले ही दे दी थी।
मामले में सोमवार को तीन पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया था। कानपुर ASP दिनेश कुमार पी ने बताया कि सब-इंस्पेक्टर कुंवरपाल, कृष्ण कुमार और चौबेपुर थाने के कॉन्स्टेबल राजीव सहित तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ जांच शुरू की गई है।
कार्रवाई
चौबेपुर थानाप्रभारी विनय तिवारी को भी किया निलंबित
घटना में तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई से पहले स्पेशल टास्क फोर्स ने चौबेपुर थानाप्रभारी विनय तिवारी को थी निलंबित कर दिया था।
उसने दुबे को वारदात से पांच घंटे पहले ही सूचना दे दी थीं। तिवारी की कॉल डिटेल में सामने आया है कि वह आरोपी दुबे के लगातार संपर्क में रहा है।
तिवारी कुछ दिन पहले दुबे के घर भी गए थे और मुठभेड़ में अपनी जान बचाने के लिए जानबुझकर पुलिस टीम से अलग हो गया था।
गिरफ्तारियां
दुबे अभी भी फरार, लेकिन उसकी बहू को किया गिरफ्तार
आरोपी दुबे अभी भी पुलिस पकड़ से दूर है और पुलिस लगातार दबिश दे रही है। इसी बीच पुलिस ने उसकी बहू शमा, पड़ोसी सुरेश वर्मा और घरेलू मददगार रेखा को गिरफ्तार कर लिया है।
शमा ने दुबे और उसके साथियों द्वारा छत से बरसाई जा रही गोलियों के बीच अपनी जान बचाने के दरवाजा खटखटा रहे पुलिसकर्मी के लिए जानबूझकर कुंदी नहीं खोली थी।
तीनों पर दुबे और उसके साथियों को पुलिस की लोकेशन बताने का भी आरोप है।