
दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे पंजाब के किसान की मौत
क्या है खबर?
दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे पंजाब के एक किसान की आज सुबह मौत हो गई। साथी किसानों ने ठंड की वजह से पड़े दिल के दौरे को उसकी मौत का कारण बताया है।
टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, भठिंडा के तुंगवाली गांव के रहने वाले जय सिंह के टिकरी बॉर्डर पर मौत हुई।
NDTV के अनुसार, जय सिंह के तीन बच्चे हैं। बच्चों की उम्र 10, 12 और 14 साल बताई जा रही है।
अन्य मामला
कल सिख संत ने की थी आत्महत्या
इस किसान की मौत की खबर ऐसे समय पर आई है जब एक दिन पहले ही प्रदर्शन में शामिल एक सिख संत ने गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी।
हरियाणा के करनाल के रहने वाले 65 वर्षीय राम सिंह ने खुद की लाइसेंसी बंदूक से ही खुद को गोली मारी। वे पंजाब और हरियाणा के हजारों लोगों के धार्मिक उपदेशक थे और वे हरियाणा SGPC सहित कई सिख संगठनों के सदस्य भी रह चुके थे।
सुसाइड नोट
राम सिंह ने सुसाइड नोट में आत्महत्या को बताया जुल्म के खिलाफ आवाज
संत राम सिंह के पास से उनका सुसाइड नोट भी बरामद हुआ था। इसमें किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए उन्होंने लिखा था, "किसानों का दुख देखा, बहुत दिल दुखा। सरकार न्याय नहीं दे रही। जुल्म करना पाप है, जुल्म सहना भी पाप है। किसी ने किसानों के हक में और जुल्म के खिलाफ कुछ नहीं किया। कइयों ने सम्मान वापस किए। यह जुल्म के खिलाफ आवाज है। वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह।"
जानकारी
20 से ज्यादा किसानों की हो चुकी है मौत
किसानों के प्रतिनिधियों ने मंगलवार को बताया था कि अब तक किसी भी कारण से 20 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है। जल्द ही उनके सम्मान में श्रद्धांजलि दिवस का आयोजन किया जाएगा।
पृष्ठभूमि
क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं किसान?
मोदी सरकार कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए तीन कानून लेकर लाई है जिनमें सरकारी मंडियों के बाहर खरीद के लिए व्यापारिक इलाके बनाने, अनुबंध खेती को मंजूरी देने और कई अनाजों और दालों की भंडारण सीमा खत्म करने समेत कई प्रावधान किए गए हैं।
पंजाब और हरियाणा समेत कई राज्यों के किसान इन कानूनों का जमकर विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इनके जरिये सरकार मंडियों और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से छुटकारा पाना चाहती है।
गतिरोध
अब तक असफल रही है किसानों और सरकार के बीच की बातचीत
इन कानूनों के खिलाफ किसान पिछले कई महीने से सड़कों पर हैं और 25 नवंबर से दिल्ली के आसपास डटे हुए हैं। किसानों और सरकार के बीच पांच दौर की बैठक भी हो चुकी है, हालांकि इनमें समाधान का कोई रास्ता नहीं निकला है।
सरकार ने किसानों को कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव दिया है, हालांकि किसानों ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है और वे कानूनों को वापस लिए जाने की मांग पर अड़े हुए हैं।
सरकार का पक्ष
सरकार का आंदोलन हाईजैक होने का आरोप, आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई
इस बीच सरकार ने "अल्ट्रा-लेफ्ट" और "टुकड़े-टुकड़े गैंग" के किसानों के आंदोलन को हाइजैक करने का आरोप लगाया है। वहीं कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन एक राज्य तक ही सीमित रहने की बात कही है।
इस बीच मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच गया है और कोर्ट ने किसानों और सरकार को एक समिति बनाकर चर्चा करने की सलाह दी है। आज सुप्रीम कोर्ट किसानों को सड़कों से हटाने संबंधी याचिका पर अपना फैसला सुनाएगी।