
इस जिलाधिकारी ने खुद पर ही लगा दिया जुर्माना, जानें क्यों
क्या है खबर?
किसी को बताने की ज़रूरत नहीं कि दिल्ली-NCR में पानी की भारी किल्लत है। इसके बाद भी लोग अपनी ज़िम्मेदारी नहीं समझते हैं और पानी की बर्बादी करते हैं।
आज के समय में जहाँ ज़्यादातर अधिकारी लोगों का शोषण करते हैं, वहीं एक अधिकारी ने अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए ज़िम्मेदारी की मिसाल पेश की है।
दरअसल, हाल ही में पानी की बर्बादी पर एक जिलाधिकारी ने अपने और अपने स्टाफ़ के ऊपर जुर्माना लगाया है।
आइए जानें।
जानकारी
टैंक से पानी ओवरफ़्लो होने के कारण लगाया जुर्माना
मामला उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले का है। जहां जिलाधिकारी अजय शंकर पांडेय ने अपने और अपने अधिकारियों के ऊपर जुर्माना लगा दिया।
दरअसल, सुबह लगभग 09:30 बजे जिलाधिकारी ऑफ़िस पहुँचे। ऑफ़िस की साफ-सफाई करने के बाद वह विश्राम कक्ष पहुँचे तो उन्हें पानी गिरने की आवाज़ सुनाई दी।
इसके बाद उन्होंने स्टाफ को बुलाकर पूछा कि पानी कहाँ से गिर रहा है, तो पता चला कि विश्राम कक्ष के पीछे रखे टैंक से पानी ओवरफ़्लो होकर गिर रहा है।
जुर्माना
30 अधिकारियों और 100 कर्मचारियों पर लगा जुर्माना
इसके बाद पानी की बर्बादी का आँकलन करके जिलाधिकारी ने 10,000 रुपये का जुर्माना ख़ुद पर और कलेक्ट्रेट में बैठने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के ऊपर लगा दिया।
जिलाधिकारी कलेक्ट्रेट के मुखिया थे, इसलिए जुर्माने की लिस्ट में सबसे पहला नाम उन्होंने अपना लिखा।
बता दें कि जिलाधिकारी ने 10,000 रुपये की रक़म में से 30 अधिकारियों पर 100-100 रुपये और 100 कर्मचारियों पर 70-70 रुपये जुर्माना लगाया। यह रक़म जल संरक्षण के काम में ख़र्च की जाएगी।
जानकारी
जिलाधिकारी ने अपनी जेब से जमा कराए पैसे
'पश्चाताप शुल्क' के रूप में फिलहाल जिलाधिकारी ने 10,000 रुपये अपनी जेब से जमा करा दिए हैं। यह रकम कलेक्ट्रेट में बैठने वाले 30 अधिकारियों और 100 कर्मचारियों से वसूली जाएगी।
मिसाल
जिलाधिकारी ने पेश की मिसाल
बुधवार को संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से जुर्माने की राशि ली जाएगी।
जिलाधिकारी पांडेय ने कहा, "जल संरक्षण करना सभी की ज़िम्मेदारी है, फिर चाहे वह अधिकारी हो या कर्मचारी। पानी की बर्बादी पर पश्चाताप शुल्क के रूप में अर्थदंड लगाया गया है।"
उन्होंने आगे कहा, "यह रक़म सरकारी कोष में जमा करा दी गई है और इसका इस्तेमाल जल संरक्षण के कार्यों में किया जाएगा।"
ऐसा करके सही मायनों में जिलाधिकारी ने एक मिसाल पेश की है।
पुराना मामला
पहले भी सामने आ चूका है ऐसा ही मामला
इससे पहले महाराष्ट्र के बीड जिले के कलेक्टर आस्तिक कुमार पांडे ने सामाजिक ज़िम्मेदारी निभाते हुए ऑफ़िस में प्लास्टिक के कप का इस्तेमाल करने पर अपने कर्मचारियों समेत ख़ुद पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया था।
ख़बरों के अनुसार, कलेक्टर के ऑफ़िस में पत्रकारों को चाय देने के लिए प्लास्टिक के कप का इस्तेमाल किया गया था।
आपकी जानकारी के लिए बता दें सिंगल यूज प्लास्टिक महाराष्ट्र सहित देश के कई राज्यों में प्रतिबंधित है।