
सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर के ठिकानों पर CBI का छापा, FCRA उल्लघंन मामले में कार्रवाई
क्या है खबर?
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने पूर्व भारतीय प्रशासनिक अधिकारी (IAS) और मानवाधिकार कार्यकर्ता हर्ष मंदर के ठिकानों पर छापा मारा है।
ये कार्रवाई मंदर के एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) के खिलाफ विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) के उल्लंघन से जुड़ा हुआ है।
CBI ने इस मामले में कई लोगों से पूछताछ भी की है। इससे पहले मंदर के NGO 'अमन बिरादरी' के खिलाफ CBI ने मामला दर्ज किया था।
छापा
दिल्ली स्थिति आवास और कार्यालय पर पड़ा छापा
इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए एक सूत्र ने कहा, "हम उनके आवास और सेंटर फॉर इक्विटी स्टडीज (CES) के कार्यालय में तलाशी ले रहे हैं।" बता दें कि CES मंदर द्वारा संचालित थिंक टैंक है।
छापे पर सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण ने लिखा, 'CBI हर्ष मंदर के घर और कार्यालय पर छापेमारी कर रही है। वह सबसे सज्जन, मानवीय और उदार कार्यकर्ताओं में से एक रहे हैं, जिन्होंने कमजोरों और गरीबों के लिए अथक प्रयास किया है।'
जांच
पिछले साल गृह मंत्रालय ने दिए थे जांच के आदेश
मंदर के NGO के खिलाफ मार्च, 2023 में गृह मंत्रालय ने CBI जांच के आदेश दिए थे। आरोप थे कि मंदर ने FCRA नियमों का उल्लंघन कर अपने NGO के लिए विदेशी दान लिया था।
इसके बाद जून में गृह मंत्रालय ने CES का FCRA लाइसेंस भी रद्द कर दिया था। मंत्रालय ने कहा था कि मंदर लगातार विभिन्न मीडिया प्रकाशनों में स्तंभ और लेख लिखते रहते हैं, इसलिए उन्होंने FCRA की धारा 3 का उल्लंघन किया है।
NGO
क्या करता है हर्ष का NGO?
'अमन बिरादरी' की वेबसाइट के मुताबिक, ये एक धर्मनिरपेक्ष, शांतिपूर्ण, न्यायपूर्ण और मानवीय दुनिया के लिए लोगों का अभियान है।
इसका उद्देश्य गांव और जिला स्तर पर संस्थाओं के निर्माण के माध्यम से अलग-अलग धर्मों के लोगों के बीच सहिष्णुता, बंधुत्व, सम्मान और शांति के बंधन को मजबूत करना है।
इसके लिए विभिन्न पृष्ठभूमि, जाति, भाषा समूह और पंथ को मानने वाले लोगों में मुख्य रूप से युवाओं और महिलाओं को एकजुट किया जाता है।
मंदर
कौन हैं हर्ष मंदर?
मंदर बतौर IAS करीब 20 साल तक मध्य प्रदेश और छतीसगढ़ में सेवाएं दे चुके हैं। 2002 में गुजरात दंगों के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था और सामाजिक काम करने लगे।
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में वे राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (NSC) के सदस्य रहे। वे 25 से अधिक किताबें लिख चुके हैं।
उनकी गिनती देश के शीर्ष स्तंभकार, लेखक और सामाजिक कार्यकर्ताओं में होती है। मंदर अमेरिका के कई विश्वविद्यालयों में पढ़ा चुके हैं।