
कावेरी जल विवाद के चलते बेंगलुरु में बंद, पूरे शहर में धारा 144 लागू
क्या है खबर?
कावेरी जल विवाद के कारण कर्नाटक में विरोध-प्रदर्शन जारी है और इस सप्ताह 2 बंद का ऐलान किया गया है।
पहला बंद मंगलवार यानि आज बेंगलुरु में है, जिसका आह्वान कर्नाटक जल संरक्षण समिति ने किया है। ये समिति किसान नेता कुरुबुरु शांताकुमार के नेतृत्व वाले किसान संघों और अन्य संगठनों का एक प्रमुख संगठन है।
दूसरा बंद शुक्रवार (29 सितंबर) को राज्यव्यापी होगा, जिसका ऐलान कन्नड़ कार्यकर्ता वतल नागराज के नेतृत्व वाले कन्नड़ ओक्कुटा संगठन ने किया है।
बंद
बेंगलुरु में धारा 144 लागू, स्कूल-कॉलेज भी बंद
बंद के मद्देनजर बेंगलुरु के शहरी उपायुक्त केए दयानंद ने शहर के सभी स्कूलों और कॉलेजों के लिए सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की है।
बेंगलुरु के पुलिस आयुक्त बी दयानंद के अनुसार, शहर में धारा 144 लागू कर दी गई है और किसी भी विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं है।
बता दें कि बंद के दौरान कन्नड़ समर्थक संगठनों ने फ्रीडम पार्क, राजभवन और टाउन हॉल में विरोध-प्रदर्शन की योजना बनाई है।
मेट्रो
यातायात सेवाओं पर बंद का कितना असर पड़ेगा?
बंद का बेंगलुरु मेट्रो पर कोई असर नहीं होगा और मेट्रो सेवाएं सामान्य रूप से काम करती रहेंगी।
ओला-उबर ड्राइवर्स एसोसिएशन ने कहा कि वे मंगलवार के बंद का समर्थन नहीं कर रहे हैं। हालांकि, ऑटो और टैक्सी संघों ने मंगलवार के बंद का समर्थन दिया है, यानि ये नहीं चलेंगे।
बेंगलुरु मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (BMTC) के अधिकारियों के मुताबिक, वे मंगलवार के बंद का समर्थन नहीं कर रहे हैं। ऐसे में सिटी बस सेवाएं प्रभावित नहीं होंगी।
एडवाइजरी
इंडिगो और विस्तारा एयरलाइंस ने जारी की एडवाइजरी
इंडिगो और विस्तारा समेत कई एयरलाइंस ने यात्रियों से हवाई अड्डे तक यात्रा करते समय पर्याप्त समय लेने का अनुरोध किया है।
इंडिगो ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "बेंगलुरु में बंद की घोषणा के कारण बेंगलुरु हवाई अड्डे तक यात्रा में सामान्य से अधिक समय लग सकता है। यात्रियों को घरेलू प्रस्थान से कम से कम 2.5 घंटे पहले और अंतरराष्ट्रीय प्रस्थान के लिए 3.5 घंटे पहले पहुंचने की सलाह देते हैं।"
कावेरी
क्या है कावेरी विवाद?
तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच दशकों से कावेरी नदी के पानी को लेकर गतिरोध बना हुआ है।
ताजा विवाद में कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) ने कर्नाटक सरकार से 13 सितंबर से 15 दिनों के लिए तमिलनाडु को 5,000 क्यूसेक पानी देने के लिए कहा था।
इसके खिलाफ कर्नाटक सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।
इसके बावजूद कर्नाटक सरकार अपने तर्क पर कायम है कि वो अधिक पानी नहीं छोड़ेगी।