
कानपुर: इत्र कारोबारी के घर आयकर विभाग का छापा, बरामद हुए 150 करोड़ रुपये
क्या है खबर?
कानपुर के इत्र कारोबारी पीयूष जैन के घर पर पड़े आयकर विभाग के छापे में लगभग 150 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए हैं।
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के अध्यक्ष विवेक जौहरी ने बताया कि संबंधित विभाग को सूचना मिली थी कि गुटखा कंपनी 'त्रिमूर्ति फ्रेगनेन्स' बिना चालान और कर चुकाए सामान की आवाजाही कर रही है।
जौहरी ने बताया कि उनसे जुड़ी तीन जगहों की तलाशी ली गई, जिसमें अबतक की सबसे बड़ी बरामदगी हुई।
मामला
फर्जी बिल और क्रेडिट से जुड़ा था मामला- जौहरी
CBIC के अध्यक्ष विवेक जौहरी ने बताया कि फर्जी बिल और फर्जी क्रेडिट से जुड़ा एक मामला दर्ज किया गया था। प्रारंभिक तलाशी के दौरान पता चला कि मामले में शामिल लोग बिना किसी चालान और ई-वे बिल के सामान की आवाजाही कर रहे थे।
उनके अनुसार इस मामले में करीब दो-तीन पार्टियां शामिल हैं। वहां मिले सभी चालान फर्जी थे और सामान की कीमत छिपाई गई थी।
घटनाक्रम
DGGI अहमदाबाद की टीम ने शुरू किया तलाशी अभियान- जौहरी
छापे के बारे में जानकारी देते हुए जौहरी ने बताया कि DGGI अहमदाबाद की टीम ने पान मसाला के निर्माता और आपूर्तिकर्ता के यहाँ तलाशी लेना शुरू किया था।
जौहरी ने बताया कि उन्नाव की एक इत्र कंपनी और ट्रांसपोर्टर के यहां भी तलाशी ली गयी क्योकिं वे पान मसाला कंपनी को इत्र उपलब्ध कराते थे।
GST अधिकारियों ने कर चोरी के मामले में छापेमारी शुरू की थी। पूरी जानकारी मिलने के बाद आयकर विभाग को भी बुलाया गया था।
कार्रवाई
24 घंटे तक चली तलाशी की कार्रवाई
गुरुवार को शुरू हुई तलाशी की कार्रवाई 24 घंटे से ज्यादा समय तक चली, जिसमें 150 करोड़ रुपए नकद बरामद किए गए।
इंडिया टुडे के अनुसार आयकर विभाग और DGGI की सयुंक्त टीम ने इत्र कारोबारी पीयूष जैन के घर की अलमारियों में रखे नोटों को बरामद किया था।
शुरुआत में टीम ने हाथों से ही नोट गिनने शुरू किए, लेकिन भारी मात्रा में रुपए बरामद होने के कारण बाद में नोट गिनने वाली मशीनें मंगानी पड़ी।
जानकारी
इत्र के कारोबार के लिए प्रसिद्ध है पीयूष जैन
पीयूष जैन अपना कारोबार कानपुर की इत्रवाली गली से चलाते हैं। कानपुर की इस गली को इत्र के कारोबार के लिए जाना जाता है।
पीयूष जैन के कन्नौज, कानपुर और मुंबई में कार्यालय हैं।
आयकर विभाग को जैन की करीब 40 कंपनियां मिली हैं, जिनके जरिए कारोबार किया जाता था।
कानपुर में पान मसाला बनाने वाली ज्यादातर कंपनियां जैन से खरीदी गई जमीन पर चल रही हैं।