
#NewsBytesExclusive: कोलपैक डील, अंतरराष्ट्रीय करियर और नामीबिया को लेकर डेविड विजे से खास बातचीत
क्या है खबर?
क्रिकेट में कई ऐसे खिलाड़ी रहे हैं जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दो देशों के लिए खेला है। पूर्व दक्षिण अफ्रीकी खिलाड़ी डेविड विजे का नाम भी इस लिस्ट में जुड़ चुका है। दक्षिण अफ्रीका के लिए खेलने के बाद वर्तमान समय में डेविड नामीबिया के लिए टी-20 विश्व कप खेल रहे हैं।
सुपर-12 में विजयी शुरुआत करने वाली नामीबिया के स्टार ऑलराउंडर से न्यूजबाइट्स ने उनके करियर, कोलपैक डील और तमाम अन्य चीजों पर खास बातचीत की है।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट
कोलपैक डील साइन करने के बाद नहीं थी दोबारा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने की उम्मीद- डेविड
डेविड ने 2017 में कोलपैक डील साइन की थी और इसके बाद दक्षिण अफ्रीका के लिए उनका करियर समाप्त हो गया था।
उन्होंने बताया, "कोलपैक डील साइन करने के बाद मैंने नहीं सोचा था कि अब दोबारा कभी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल पाउंगा। हालांकि, ससेक्स के साथ डील खत्म होने के बाद नामीबिया ने मुझसे संपर्क किया। मेरा पिता वहीं से हैं तो मैं उनके लिए खेलने योग्य था। इस मौके के लिए मैं नामीबिया क्रिकेट का आभारी हूं।"
राय
कोलपैक डील फायदेमंद या घाटे का सौदा?
डेविड के मुताबिक यदि एक निश्चित समय के बाद कोलपैक डील साइन की जाए तो यह खिलाड़ियों के लिए वरदान हो सकती है।
उन्होंने बताया, "मेरे लिए कोलपैक साइन करना बेहतरीन निर्णय रहा क्योंकि इससे मेरे खेल में काफी सुधार आया है। हालांकि, यदि कोई खिलाड़ी कम उम्र में कोलपैक साइन करता है तो थोड़ा अलग हो जाता है। दक्षिण अफ्रीका में मौके नहीं मिलने पर आप बाहर जाकर अनुभव बटोर सकते हैं।"
क्या आप जानते हैं?
क्या है कोलपैक डील?
कोलपैक डील साइन करने वाला खिलाड़ी काउंटी टीमों में विदेशी खिलाड़ी की श्रेणी में नहीं आता है। इस तरह की डील साइन करने पर खिलाड़ी का अंतरराष्ट्रीय करियर समाप्त हो जाता है। कोलपैक डील खत्म होने के बाद वह दोबारा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल सकता है।
IPL
दुनिया की सभी टी-20 लीग्स से अलग और बड़ा है IPL- डेविड
दुनियाभर की तमाम टी-20 लीग्स में खेल चुके डेविड के मुताबिक इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) दुनिया की सबसे बड़ी टी-20 लीग है।
उन्होंने कहा, "IPL में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ी और कोच दुनिया में सबसे बेहतरीन होते हैं। IPL के पास अपना अलग विंडो होने के कारण इसमें दुनियाभर के बेस्ट खिलाड़ी उपलब्ध रहते हैं। कोई युवा खिलाड़ी केवल टीम का हिस्सा रहकर ही काफी कुछ सीख सकता है।"
भरोसा
डेविड बोले- युवाओं को मिलेगी नामीबिया में रहकर भी सफल होने की प्रेरणा
डेविड ने कहा कि जिस तरह से हमारी टीम ने बेहद कम संसाधनों के बीच टी-20 विश्व कप के सुपर-12 में जगह बनाई है उससे युवाओं को काफी प्रेरणा मिलेगी।
उन्होंने कहा, "युवाओं को अब यह भरोसा होगा कि सफल होने के लिए उन्हें नामीबिया से बाहर नहीं जाना है। अब वे यह सपना देख सकते हैं कि नामीबिया के लिए खेलते हुए भी वे विश्व कप खेल सकते हैं।"
बयान
नामीबिया क्रिकेट के विकास पर है डेविड का पूरा ध्यान
भविष्य की योजना के बारे में डेविड ने कहा, "अब मैं वहां नहीं लौटने वाला हूं। दक्षिण अफ्रीका के लिए मैं घरेलू क्रिकेट भी नहीं खेलूंगा। मेरा पूरा ध्यान नामीबिया की क्रिकेट पर है। मैं चाहता हूं कि नामीबिया की क्रिकेट का विकास हो।"
टेस्ट
टेस्ट क्रिकेट नहीं खेल पाने का है मलाल- डेविड
100 से अधिक फर्स्ट-क्लास मैच खेलने के बावजूद टेस्ट क्रिकेट नहीं खेल पाने का डेविड को मलाल है।
उन्होंने कहा, "एक क्रिकेटर टेस्ट खेलने को ही अपने करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि मानता है। मैं भी टेस्ट क्रिकेट खेलना पसंद करता। हालांकि ईमानदारी से कहूं तो मैं कभी टेस्ट खेलने के करीब भी नहीं पहुंच सका। जैक कैलिस, अल्बी मोर्कल और रयान मैक्लारेन जैसे खिलाड़ियों की मौजूदगी में मेरी जगह ही नहीं बन सकी।"
नामीबिया डेब्यू
थोड़ा अजीब था 36 की उम्र में नामीबिया के लिए डेब्यू करना- डेविड
डेविड ने बताया कि 36 साल की उम्र में नामीबिया के लिए डेब्यू करना उनके लिए थोड़ा अजीब था, लेकिन यहां के लोग इतने अच्छे हैं कि उनके लिए यह काफी आसान हो गया।
उन्होंने कहा, "नामीबिया के हेड कोच पिएरे डी ब्रूयन और असिस्टेंट कोच अल्बी मोर्कल के साथ मैंने काफी क्रिकेट खेला है। इन लोगों ने ही मुझे नामीबिया आने का ऑफर भी दिया था। परिचित लोगों के होने से चीजें काफी आसान हो जाती हैं।"
वनडे स्टेटस
2019 में वनडे टीम का दर्जा मिलने से मिला नामीबिया क्रिकेट को नया जीवन- डेविड
डेविड ने बताया कि 2019 में वनडे टीम का दर्जा मिलने से नामीबिया क्रिकेट को नया जीवन मिला है क्योंकि अब टीम को अधिक फंडिंग मिल रही है।
उन्होंने बताया, "पहले नामीबिया के पास केवल तीन कॉन्ट्रैक्टेड खिलाड़ी ही थे, लेकिन वनडे का दर्जा मिलने के बाद इनकी संख्या 16 हो गई है। अब खिलाड़ी पूरी तरह से प्रोफेशनल हो गए हैं और उन्हें क्रिकेट के साथ दूसरी नौकरी करने की जरूरत नहीं है।"