
'शेरशाह' रिव्यू: कारगिल हीरो विक्रम बत्रा की शहादत और जांबाजी की कहानी है फिल्म
क्या है खबर?
फिल्म 'शेरशाह' का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। विष्णु वर्धन के निर्देशन में बनी यह बायोग्राफिकल वॉर ड्रामा 12 अगस्त को अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हो गई है।
फिल्म के निर्माता हैं करण जौहर और हीरो हैं सिद्धार्थ मल्होत्रा। इस सफर में उनका साथ दिया है कियारा आडवाणी ने, जो फिल्म की हीरोइन हैं, वहीं शिव पंडित, निकितिन धीर, शतफ फिगर और साहिल वैद्य जैसे कई कलाकारों ने सहायक भूमिका निभाई है।
आइए जानते हैं कैसी है फिल्म।
कहानी
कुछ ऐसी है फिल्म की कहानी
'शेरशाह' हमें कारगिल युद्ध के नायक विक्रम बत्रा से मिलवाती है। उनका बचपन कैसा रहा, जवानी में उन्होंने क्या सपना देखा और कैसे अपना सपना साकार किया, ये सब फिल्म में दिखाया गया है।
फिल्म देखने के दौरान आपको पता चलेगा कि कारगिल युद्ध में कैसे अपने पराक्रम और बहादुरी से विक्रम बत्रा ने सबको प्रभावित किया।
पाकिस्तानी सेना के खिलाफ भारत की जीत में बत्रा ने एक अहम भूमिका निभाई, यह पूरी फिल्म इसी बात के इर्द-गिर्द घूमती है।
एक्टिंग
कैप्टन विक्रम बत्रा के किरदार में जमे सिद्धार्थ
कैप्टन विक्रम मल्होत्रा का जीवन पर्दे पर उतारना आसान नहीं था, लेकिन सिद्धार्थ ने अपने किरदार के साथ पूरा इंसाफ किया। 'शेरशाह' में उन्होंने अपने बेहतरीन अभिनय का परिचय दिया है।
वह देशभक्ति का जज्बा जगाने में कामयाब रहे। परफॉर्मेंस के लिहाज से उनकी उनकी यह फिल्म उम्दा है। सिद्धार्थ ने यह साबित कर दिया कि वह अपने कंफर्ट जोन से हटके किरदार भी बखूबी निभा सकते हैं। इस फिल्म से यकीनन सिद्धार्थ के करियर को एक नई छलांग मिलेगी।
एक्टिंग
अन्य कलाकारों का अभिनय
फिल्म में कियारा भी ठीक लगी हैं। उनकी खूबसूरती और सादगी की तारीफ करने से आप नहीं चूकेंगे। हालांकि, कहानी के हिसाब से उनके पास करने के लिए कुछ खास था नहीं। फिल्म में सिद्धार्थ के साथ कियारा की केमिस्ट्री अच्छी लगी है, लेकिन एक्टिंग के मोर्चे पर वह उतनी खरी नहीं उतरतीं।
निकितिन धीर ने और शिव पंडित ने अपने-अपने किरदार की कद्र की। साहिल वैद्य, शरफ फिगर और हिमांशु मल्होत्रा ने भी फिल्म में ठीक-ठाक काम किया है।
निर्देशन
कैसा रहा निर्देशन पक्ष?
साउथ के मशहूर निर्देशक विष्णु वर्धन ने 'शेरशाह' के साथ हिंदी फिल्मों में बतौर निर्देशक अपनी पारी शुरू की है। यह कहने में कोई संकोच नहीं कि उन्होंने विक्रम बत्रा की जिंदगी के हर पहलु से दर्शकों को रूबरू कराया है।
कहानी में प्रामाणिकता को भी बरकरार रखा है। फिल्म के युद्ध दृश्यों पर भी उनकी मेहनत साफ नजर आ रही है, लेकिन अगर निर्देशक फिल्म के सहायक कलाकारों को ठीक से पनपने देते तो बात ही कुछ और होती।
कमियां
ये हैं फिल्म की खामियां
फिल्म मे भले ही आम लोगों के मनोरंजन को देखते हुए विक्रम बत्रा और डिंपल के बीच रोमांस भुनाया गया है, लेकिन देशभक्ति से लबरेज इस फिल्म में लगभग हर बॉलीवुड फिल्म की तरह लव स्टोरी का तड़का रास नहीं आ रहा। इसने दर्शकों को भटकाने का काम किया है।
फिल्म की पटकथा उतनी सधी हुई नहीं है। इसमें संतुलन की कमी खलती है।
कारगिल युद्ध में देश ने जो कुछ भुगता है, उसकी कमी भी फिल्म में अखरती है।
निष्कर्ष
देखें या ना देखें?
युद्ध मिशन पर जाते हुए विक्रम बत्रा को कोडवर्ड मिलता है, 'शेरशाह'। मिशन सफल होने पर उनकी तरफ से संकेत दिया जाता है, 'ये दिल मांगे मोर'।
अब भले ही फिल्म देखने के बाद आप 'ये दिल मांगे मोर' ना भी कहें, लेकिन विक्रम बत्रा की प्रेरणादाई कहानी सभी को देखनी चाहिए।
देशभक्ति के दौर में 'शेरशाह' इसी मौसम की फिल्म है और देशभक्ति फिल्मों के शौकीनों को तो यह जरूर पसंद आएगी।
हमारी तरफ से फिल्म को तीन स्टार।