
'डायल 100' रिव्यू: समय नहीं है तो रिजेक्ट कर दें मनोज बाजपेयी की यह कॉल
क्या है खबर?
मनोज बाजपेयी, नीना गुप्ता और साक्षी तंवर के प्रशंसक लंबे समय से फिल्म 'डायल 100' का इंतजार करे थे और अब उनका यह इंतजार खत्म हो गया है।
'डायल 100' आज यानी 6 अगस्त को OTT प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज हो गई है। पिक्चर्स फिल्म्स इंडिया, सिद्धार्थ मल्होत्रा और सपना मल्होत्रा की अल्केमी फिल्म्स द्वारा निर्मित इस फिल्म का निर्देशन रेंसिल डीसिल्वा ने किया है।
एक घंटा 44 मिनट लंबी यह सस्पेंस थ्रिलर फिल्म कैसी है, आइए जानते हैं।
कहानी
एक कॉल के खेल पर बुनी गई है फिल्म की कहानी
एक तरफ जहां मुंबई पुलिस एमरजेंसी कॉल सेंटर में सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर निखिल सूद उर्फ मनोज बाजपेयी पुलिस सिस्टम के फोन से जनता के सवालों का जवाब दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वह अपनी पत्नी प्रेरणा सूद उर्फ साक्षी तंवर और बेटे की अनबन को सुलझाते दिखते हैं।
इसी बीच कॉलर सीमा पल्लव (नीना गुप्ता) की एक कॉल आती है। कैसे यह कॉल निखिल के लिए काल बन जाती है, यह जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।
अभिनय
तीनों किरदार में शानदार मनोज बाजपेयी
फिल्म में मनोज बाजपेयी ने बहुत अच्छा काम किया है। उन्होने ना सिर्फ सीनियर पुलिस अफसर के किरदार के साथ न्याय किया है, बल्कि एक पति और पिता के किरदार को भी बखूबी पर्दे पर उतारा है।
मतलब यह कि एक साथ तीन किरदारों को मनोज ने पूरी शिद्दत से इस फिल्म में जिया है। उन्होंने अपने अभिनय से इस फिल्म को बचाने की हरसंभव कोशिश की है। हालांकि, ऐसे किरदारों में मनोज पहले भी नजर आ चुके हैं।
अभिनय
नीना गुप्ता और साक्षी तंवर की अदाकारी
नीना गुप्ता और साक्षी तंवर ने भी फिल्म में अपनी छाप छोड़ी है। नीना का किरदार बेशक फिल्म में आपको चौंकाएगा, क्योंकि उन्हें अपने लंबे करियर में पहले कभी ऐसी भूमिका में नहीं देखा गया। उनकी डायलॉग डिलीवरी भी फिल्म में काफी अच्छी है।
मनोज बाजपेयी की पत्नी बनीं साक्षी भी ध्यान खींचती हैं। हालांकि, उनके किरदार में कुछ ऐसा खास था नहीं, लेकिन साक्षी फिल्म में अपनी मौजूदगी का अहसास कराने में सफल रहीं।
निर्देशन
कैसा है फिल्म का निर्देशन?
फिल्म में निर्देशक रेंसिल डिसिल्वा की रचनात्मकता नजर नहीं आती। उनका निर्देशन कच्चा है। फिल्म देखते हुए लगता है कि यह सीन पहले देखा हुआ है।
कहानी की रफ्तार इतनी धीमी है कि आगे क्या होगा, इसका अनुमान आप आसानी से लगा सकते हैं। निर्देशक ने फिल्म के क्लाइमैक्स पर भी थोड़ी और मेहनत की होती तो यह फिल्म औसत ड्रामा बनकर नहीं रह जाती।
निर्देशक मनोज, नीना और साक्षी जैसे मंझे हुए कलाकारों की प्रतिभा भुनाने में नाकाम रहे।
कमियां
ये हैं फिल्म की खामियां
फिल्म के दृश्य काफी लंबे हैं। शुरुआत के 10-15 मिनट फिल्म विजुल्स से ज्यादा ऑडियो पर टिकी है, जो शुरू में ही उत्साह और उमंग को खत्म कर देती है।
फिल्म बड़ी धीमी गति से आगे चलती है। अगर इसकी एडिटिंग में कसावट होती तो इसकी लंबाई कम हो सकती थी। मनोरंजन के पैमाने पर भी फिल्म खरी नहीं उतरती।
फिल्म यूं तो एक सस्पेंस थ्रिलर है, लेकिन सस्पेंस कहां है, वो आप फिल्म के अंत तक ढूंढते रह जाएंगे।
समीक्षा
देखें या ना देखें?
पुलिस को लेकर कई फिल्में बन चुकी हैं, लेकिन जरूरी है कि इसमें कुछ नयापन हो। 'डायल 100' में ऐसा कुछ नहीं दिखता। हालांकि, अगर आप एक बार आप इस फिल्म का नंबर डायल कर भी लें तो आपका कोई नुकसान नहीं है।
कलाकारों की परफॉर्मेंस के लिहाज से यह फिल्म अच्छी है। अगर आप मनोज बाजपेयी और नीना गुप्ता के फैन हैं तो आप 'डायल 100' देख सकते हैं।
हमारी तरफ से फिल्म को दो स्टार।