
राज कपूर की 'आवारा' ने दुनियाभर में बदला बॉलीवुड का नक्शा, कैसे बने रूस के हीरो?
क्या है खबर?
आज यानी 14 दिसंबर को बॉलीवुड के शो मैन राज कपूर की 100वीं जयंती है। इस खास मौके का जश्न कपूर खानदान भव्य तरीके से मना रहा है।
इस अवसर पर उनकी फिल्मों के मुरीद सिनेप्रेमियों के लिए बीते शुक्रवार को एक इवेंट रखा गया, जिसमें फिल्म इंडस्ट्री मशहूर हस्तियां शामिल हुईं।
राज की दीवानगी न सिर्फ देश, बल्कि विदेशों में भी था। खासकर रूस के लोग तो उनके दीवाने थे।
आइए जानें कैसे रूस के हीरो बने राज कूपर।
ख्याति
राज कपूर को इस फिल्म ने दुनियाभर में दिलाई थी शोहरत
राज कपूर की फिल्में सामाजिक संदेश और संगीत के लिए भी चर्चा में रहती थीं। साल 1951 में वह भी वह एक ऐसी फिल्म लेकर आए थे, जिसे दर्शकों ने खूब प्यार दिया था। फिल्म का नाम था 'आवारा'।
इस फिल्म ने राज कपूर को अंतरराष्ट्रीय ख्याति दिलाई थी। फिल्म का टाइटल सॉन्ग 'आवारा हूं या गर्दिश में आसमान का तारा हूं' इतना लोकप्रिय हुआ था कि इसे देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी काफी पसंद किया गया था।
विश्वास
पृथ्वीराज कपूर को नहीं था बेटे पर भरोसा
'आवारा' ने दुनिया में हिंदी सिनेमा का नक्शा बदल दिया। कहते हैं कि कहानी जानने के बाद राज कपूर के पिता और दिग्गज अभिनेता पृथ्वीराज कपूर इस फिल्म में काम करने के लिए राजी हो गए थे।
हालांकि, जब उन्हें पता चला कि इसका हीरो और निर्देशक उनका बेटा है तो उन्होंने अपने कदम पीछे ले लिए।
पृथ्वीराज का मानना था कि उनका बेटा अच्छी फिल्म नहीं बना सकता है। फिर लेखक ख्वाजा अब्बास अहमद के समझाने पर वह माने।
कमाल
पहली बार कपूर परिवार की 3 पीढ़ियां आईं साथ
बहुत कम लोग जानते हैं कि ये राज कपूर की पहली ऐसी फिल्म थी, जिसमें राज की 3 पीढ़िया नजर आई थीं।
'आवारा' के जरिए उन्होंने न सिर्फ अपने पिता, बल्कि अपने दादा जी बशेश्वर नाथ कपूर को निर्देशित किया था। बशेश्वर नाथ कपूर ने इसमें जज की भूमिका निभाई थी। हालांकि, फिल्म में उनका कैमियो था।
इतना ही नहीं राज के छोटे भाई शशि कपूर भी इस फिल्म में राज कपूर के बचपन की भूमिका में नजर आए थे।
खासियत
क्यों खास थी 'आवारा'?
'आवारा' राज के करियर के लिए मील का पत्थर साबित हुई थी। वैसे तो राज कपूर की बनाई कई फिल्में हिंदी सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में शामिल है, लेकिन इस फिल्म की कहानी एक खास संदेश भी देती है।
फिल्म में दिखाया गया है कि कोई भी इंसान जन्म से अपराधी नहीं होता। उसके हालात उसे जुर्म की दुनिया में झोंक देते हैं।
फिल्म में स्वतंत्रता के बाद देश में बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के बारे में बात की गई थी।
राह
'आवारा' से रूस में खुला भारतीय फिल्मों का रास्ता
इस फिल्म ने रूस में भारतीय फिल्मों के लिए रास्ता खोल दिया। तुर्की में इस फिल्म का 8 बार रीमेक बना।
साल 2012 में जब टाइम मैगजीन ने दुनिया की 100 महान फिल्मों की फेहरिस्त बनाई तो उसमें एक नाम 'आवारा' का भी था।
जब 'आवारा' रूस में रिलीज हुई तो वो वहां की राष्ट्रीय फिल्म बन गई। इस फिल्म का गाना 'आवारा हूं' हर रूसी दर्शक की ज़ुबान पर था और ये भी वहां का राष्ट्रीय गीत बन गया।
अकिअक
क्यों रूस में लोकप्रिय हुई आवारा?
'आवारा' राज और नरगिस दत्त की जोड़ी को भी काफी पसंद किया गया था।
यह पहली ऐसी भारतीय फिल्म थी, जो रूस में जबरदस्त हिट हुई।
सोवियत संघ की पूर्व प्रधानमंत्री निकिता ख्रुश्चेव ने फिल्म की लोकप्रियता का कारण बताते हुए कहा था कि रूस ने विश्व युद्ध की मार को झेला है। कई रूसी फिल्मकारों ने युद्ध पर फिल्में बनाईं, लेकिन 'आवारा' त्रासदियों के बीच प्यार और उम्मीद को जिस तरह दिखाती है, वैसा पहले कभी नहीं हुआ था।
लोकप्रियता
नेहरू जैसे लोकप्रिय हो गए राज कपूर
वैसे तो निमाई घोष की 'चिन्नामुल' सोवियत संघ में रिलीज होने वाली पहली भारतीय फिल्म थी, लेकिन राज कपूर की चार्ली चैपलिन की भूमिकाओं ने दर्शकों का दिल जीत लिया।
ये वो दौर था जब हिंदी सिनेमा के 'शोमैन', फिल्म निर्माता, निर्देशक, सोवियत संघ में भी हीरो बन गए।
राज कपूर की दीवानगी का आलम यह था कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू जब अपनी पहली सोवियत यात्रा पर गए थे तो भीड़ उन्हें देख कर चिल्लाई, 'आवारा हूं'।
जानकारी
'श्री 420' के बाद हुआ लाेकप्रियता में इजाफा
राज के प्रति पूरे रूस में दीवानगी तब और बढ़ गई, जब उनकी अगली फिल्म 'श्री 420' रिलीज हुई। साल 1954 में जब भारतीय प्रतिनिधिमंडल रूस गया तो हर जगह यही मांग उठती थी कि 'आवारा हूं' गाएं और उन्होंने पूरे दिल से गाया भी।