
'भूत पुलिस' रिव्यू: टुकड़ों में हंसाती है, लेकिन डराती नहीं यह फिल्म
क्या है खबर?
सैफ अली खान, अर्जुन कपूर, यामी गौतम, जैकलीन फर्नांडिज, जावेद जाफरी, अमित मिस्त्री और जेमी लीवर जैसे कलाकारों के अभिनय से सजी फिल्म 'भूत पुलिस' का इंतजार दर्शकों को बेसब्री से था, जो आखिरकार 10 सितंबर को खत्म हो गया।
फिल्म डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर रिलीज हो गई है। इस फिल्म के निर्देशन की कमान पवन कृपलानी ने संभाली है और निर्माता हैं रमेश तौरानी।
'भूत पुलिस' हमारी कसौटी पर कितनी खरी उतरी, आइए जानते हैं।
कहानी
क्या है फिल्म की कहानी?
फिल्म की कहानी दो भाइयों, सैफ (विभूति) और अर्जुन (चिरौंजी) से शुरू होती है, जिनके पिता एक पहुंचे हुए तांत्रिक थे।
विभूति-चिरौंजी को जगह-जगह भूत भगाने के लिए बुलाया जाता है, जो फीस के साथ GST भी वसूलते हैं।
फिर माया उर्फ यामी गौतम अपनी समस्या लेकर उनके पास पहुंचती है, जिसकी बहन कनु (जैकलीन फर्नांडिज) हैं। अब इस मामले में विभूति और चिरौंजी कुछ कर पाते हैं या नहींं, ये जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।
एक्टिंग
एक्टिंग के मोर्चे पर कैसी रही फिल्म?
अभिनय की बात करें तो सैफ अली खान कुछेक सीन को छोड़ कहीं भी असरदार नहीं लगे। दूसरी तरफ अर्जुन की भूमिका भले ही संजीदा थी, लेकिन उनका अभिनय बनावटी लगा।
बात करें यामी गौतम की तो उन्होंने अपनी भूमिका के लिए मेहनत की, लेकिन जैकलीन के लिए अभिनय अब भी टेढ़ी खीर जैसा ही लगता है।
हालांकि, दिवंगत अभिनेता अमित मिस्त्री, जॉनी लीवर की बेटी जेमी लीवर और जावेद जाफरी अपने-अपने किरदार से असर छोड़ने में कामयाब रहे हैं।
निर्देशन
औसत रहा फिल्म का निर्देशन
'रागिनी एमएमएस' और 'फोबिया' जैसी हॉरर फिल्में निर्देशित कर चुके पवन कृपलानी हॉरर कॉमेडी जॉनर के साथ सही दांव नहीं खेल पाए।
इस फिल्म में उनका निर्देशन साधारण लगा है। अपनी पूरी अवधि में बांधकर रखने वाली फिल्म हमेशा नहीं बन पाती। ऐसा ही कुछ 'भूत पुलिस' के साथ हुआ है।
अपने निर्देशन के जरिए कृपलानी दर्शकों को आखिरी तक बांध नहीं पाए। कॉमेडी का फ्लेवर तो उन्होंने दिया, लेकिन इसके जरिए उनकी दर्शकों को डराने की कोशिश नाकाम रही।
खामियां
ये रह गईं फिल्म की कमियां
फिल्म को लेकर जिस तरह का डरावना माहौल बनाया गया, वो बचकाना सा लगता है। इसमें बेशक कॉमेडी की पुट है, लेकिन इसे और मजेदार बनाया जा सकता था।
हॉरर की बात करें तो आप यह कहेंगे कि सपने में आने वाला भूत भी इस फिल्म से ज्यादा डराता है, वहीं एडिटिंग की अच्छी-खासी गुंजाइश थी।
फिल्म में सैफ कभी-कभार हंसाते हैं, लेकिन उनकी भाषा अखरती है। फिल्म की डायलॉग राइटिंग पर भी और मेहनत की जा सकती थी।
फैसला
देखें या ना देखें?
पटकथा के हिसाब से फिल्म में ऐसा कुछ है नहीं, जो आपने पहले ना देखा हो। इसे आप एक हल्की-फुल्की मनोरंजक फिल्म कह सकते हैं।
यह थोड़ा हंसाती है और अगर आप पहली बार कोई हॉरर कॉमेडी फिल्म देख रहे हैं तो शायद यह आपको थोड़ा डरा भी दे।
फिल्म की सिनेमैटोग्राफी और बैकग्राउंड म्यूजिक काबिल-ए-तारीफ है।
अगर आप हॉरर कॉमेडी फिल्मों के फैंन हैं तो आप बेशक यह फिल्म देख सकते हैं।
हमारी तरफ से फिल्म को दो स्टार।